गोरखपुर के शहीद अशफाक उल्ला खां प्राणि उद्यान में चिंपैंजी और जिराफ के लिए नए बाड़े बनेंगे। सोसाइटी की बैठक में 6.22 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत हुआ है।
गोरखपुर के शहीद अशफाक उल्ला खां प्राणि उद्यान (चिड़ियाघर) में जल्द ही पर्यटकों को चिंपैंजी और जिराफ का दीदार करने का मौका मिलेगा। प्राणि उद्यान सोसाइटी की सातवीं बैठक में मास्टर ले आउट में बदलाव कर इनके लिए नए बाड़े बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। इसके अलावा चिड़ियाघर में वन्यजीवों की सुरक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार और पर्यटकों की सुविधाओं से जुड़े कई अहम विकास कार्यों पर मुहर लगी है।
प्रमुख सचिव वन एवं पर्यावरण महेंद्र प्रसाद अग्रवाल की अध्यक्षता में आयोजित इस उच्चस्तरीय बैठक में वन्यजीवों की बेहतर देखभाल और संक्रामक बीमारियों से बचाव के पुख्ता इंतजामों पर गहन मंथन हुआ। बैठक में आगामी वित्तीय वर्ष के लिए 6.22 करोड़ रुपये के बजट को स्वीकृति प्रदान की गई है। इस बजट की राशि का उपयोग वन्यजीवों के दैनिक भोजन, कर्मचारियों के वेतन भुगतान के साथ-साथ विभिन्न नए निर्माण और विकास कार्यों को पूरा करने में किया जाएगा।
अस्पताल परिसर का विस्तार और बाड़ों में सुधार
प्राणि उद्यान प्रशासन ने रेस्क्यू कर लाए जाने वाले वन्यजीवों की चिकित्सा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने का निर्णय लिया है। इसके तहत अस्पताल परिसर में चार नए सेल बनाए जाएंगे, जिससे घायल या रेस्क्यू किए गए जानवरों को तुरंत और बेहतर आइसोलेशन व इलाज की सुविधा मिल सकेगी। इसके साथ ही, मौजूदा शेर के बाड़े में एक नया क्राल (वह सुरक्षित स्थान जहां वन्यजीवों को अस्थायी रूप से रोका जाता है) और दरियाई घोड़े के लिए एक नए तालाब का निर्माण कराया जाएगा।
102 साल पुराना ऐतिहासिक रेल इंजन बनेगा मुख्य आकर्षण
दर्शकों और खासकर इतिहास प्रेमियों के लिए चिड़ियाघर में एक और नया आकर्षण जोड़ा जा रहा है। सोहगीबरवा वन प्रभाग के लक्ष्मीपुर रेंज से 102 साल पुराने एक ऐतिहासिक रेल इंजन को गोरखपुर चिड़ियाघर लाकर प्रदर्शित करने के प्रस्ताव को हरी झंडी मिल गई है। इस धरोहर को देखने के लिए पर्यटकों को एक नया अनुभव मिलेगा।
संक्रामक रोगों से बचाव और विशेष प्रशिक्षण
हाल के वर्षों में बर्ड फ्लू जैसी खतरनाक संक्रामक बीमारियों के खतरे को देखते हुए बैठक में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए। बाड़ों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम करने और निगरानी व्यवस्था को डिजिटल व भौतिक रूप से मजबूत करने पर जोर दिया गया। इसके अलावा, प्राणि उद्यान के कीपर और स्वीपर कर्मचारियों को वन्यजीवों की वैज्ञानिक तरीके से देखभाल, परिसर की साफ-सफाई और संक्रमण से बचाव के उपायों के संबंध में विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।
पर्यटकों की सुविधाएं बढ़ाने पर जोर
विशेष आमंत्रित सदस्य अरविंद विक्रम चौधरी ने बैठक के दौरान पर्यटकों की सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए। उन्होंने लंबे समय से बंद पड़ी कैंटीन को तत्काल प्रभाव से शुरू कराने, वरिष्ठ नागरिकों व बच्चों की सुविधा के लिए परिसर में गोल्फ कार्ट का संचालन करने और आगंतुकों के लिए निशुल्क पेयजल उपलब्ध कराने की मांग की। इसके अलावा, बच्चों के लिए वन्यजीवों से जुड़ी ज्ञानवर्धक जानकारी देने वाले साइनबोर्ड लगाने और नौका विहार की तरफ चिड़ियाघर का दूसरा प्रवेश द्वार व टिकट काउंटर खोलने का सुझाव भी रखा गया, ताकि पर्यटकों को आवागमन में आसानी हो।
बैठक में भौतिक रूप से प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्यजीव अनुराधा बेमुरी, वन निगम के प्रबंध निदेशक एपी सिंह, मुख्य वन संरक्षक डॉ. बीसी ब्रह्मा, निदेशक सूरज कुमार, प्रभागीय वंशीय अधिकारी (DFO) शुभम सिंह और उपनिदेशक डॉ. योगेश प्रताप सिंह उपस्थित रहे। इनके अलावा ऑनलाइन माध्यम से प्रधान मुख्य वन संरक्षक सुनील चौधरी, वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के डॉ. पराग निगम और आईवीआरआई बरेली के डॉ. एम पावड़े भी बैठक में जुड़े और महत्वपूर्ण तकनीकी सुझाव साझा किए।