कल्याणपुर ब्लॉक के रौतेपुर संबलपुर गांव की ग्रामीण महिलाओं ने कौशल विकास प्रशिक्षण और सामूहिक प्रयास के दम पर स्वरोजगार की एक सफल मिसाल पेश की है। 'नारी एकता स्वयं सहायता समूह' से जुड़ी चार महिलाओं ने हर्बल साबुन और इत्र निर्माण के जरिए अपने हुनर को रोजगार में बदल दिया है, जिससे न केवल उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है बल्कि वे अन्य महिलाओं के लिए भी आत्मनिर्भरता का मार्ग प्रशस्त कर रही हैं।
कानपुर नगर के कल्याणपुर ब्लॉक के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत रौतेपुर संबलपुर में यह पहल ग्रामीण महिलाओं की उद्यमशीलता को दर्शाती है। वर्ष 2023 में गठित 'नारी एकता स्वयं सहायता समूह' में कुल 12 सदस्य हैं, जिनमें से चार महिलाएं—रामरती, गोल्डी, सोनी और प्रियंका—विशेष रूप से हर्बल साबुन और इत्र बनाने के पूरे कार्य को संभाल रही हैं। कच्चे माल की खरीद से लेकर साबुन तैयार करने, उसकी आकर्षक पैकेजिंग करने और बाजार में बिक्री तक की सारी जिम्मेदारी ये महिलाएं खुद निभाती हैं।
19 वैरायटी के 'स्किन सॉफ्ट' साबुन और उनकी बाजार में मांग
समूह द्वारा तैयार किए जाने वाले उत्पादों को 'स्किन सॉफ्ट' ब्रांड नाम दिया गया है। इसके तहत कुल 19 अलग-अलग वैरायटी के हर्बल साबुन बनाए जाते हैं। इनमें ग्राहकों के बीच गुलाब की खुशबू वाले साबुन की मांग सबसे अधिक बनी हुई है। समूह इन साबुनों को लगभग 50 रुपये प्रति पीस की थोक कीमत पर बेचता है, जबकि खुले बाजार में इनकी कीमत करीब 70 रुपये तक होती है।
इन उत्पादों की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए आवश्यक कच्चा माल कानपुर से, विशेष खुशबू कन्नौज से और पैकेजिंग के लिए रैपर सूरत से मंगाए जाते हैं। समूह हर महीने 400 से अधिक साबुन बेच रहा है, जिससे उन्हें 20 से 25 हजार रुपये तक का मुनाफा हो रहा है।
प्रशिक्षण से मास्टर ट्रेनर बनने तक का सफर
समूह की सदस्य रामरती ने सरकारी कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से हस्तनिर्मित साबुन बनाने की तकनीक सीखी थी। अपनी मेहनत और लगन से आज वह न केवल खुद सफल उद्यमी हैं, बल्कि मास्टर ट्रेनर के रूप में क्षेत्र की अन्य महिलाओं को भी साबुन बनाने का प्रशिक्षण दे रही हैं। रामरती का कहना है कि उचित प्रशिक्षण और नियमित अभ्यास से कोई भी महिला आसानी से अपना स्वरोजगार शुरू कर सकती है। उत्पादन के दौरान गुणवत्ता और पैकेजिंग पर विशेष ध्यान दिया जाता है, जिससे ग्राहकों का भरोसा लगातार बढ़ रहा है।
सामूहिक प्रयास से मजबूत हुई आर्थिक स्थिति
समूह की अध्यक्ष गोल्डी के अनुसार, स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद से महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है। सामूहिक रूप से काम करने के कारण उत्पादन क्षमता और बिक्री दोनों में इजाफा हुआ है। वर्तमान में समूह की महिलाएं अपने उत्पादों के दायरे और बाजार का विस्तार करने के लिए लगातार प्रयास कर रही हैं। सीमित संसाधनों के बीच शुरू हुई यह पहल यह साबित करती है कि पक्का इरादा और सही मार्गदर्शन मिलने पर ग्रामीण महिलाएं भी व्यावसायिक क्षेत्र में बड़ी सफलता हासिल कर सकती हैं।