देश में पायलट प्रशिक्षण की घरेलू क्षमता को मजबूती देने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए, महाराष्ट्र के अमरावती स्थित बेलोरा एयरपोर्ट पर एअर इंडिया की फ्लाइंग ट्रेनिंग अकादमी को नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) से संचालन की औपचारिक मंजूरी मिल गई है।
यह देश में किसी भी प्रमुख भारतीय एयरलाइन की ओर से संचालित की जाने वाली अपनी तरह की पहली फ्लाइंग ट्रेनिंग अकादमी होगी। इस नई सुविधा के शुरू होने से देश के उड्डयन क्षेत्र में पायलटों की घरेलू उपलब्धता बढ़ने और विदेशी संस्थानों पर निर्भरता कम होने की उम्मीद जताई जा रही है।
दस एकड़ में फैली अत्याधुनिक सुविधाएं
करीब 10 एकड़ भूमि पर विकसित इस अत्याधुनिक प्रशिक्षण परिसर में कुल 34 विशेष प्रशिक्षण विमान तैनात किए गए हैं। इन विमानों के बेड़े में 31 सिंगल इंजन और 3 ट्विन इंजन विमान शामिल हैं, जो कैडेट्स को व्यावहारिक और उन्नत उड़ान प्रशिक्षण देने के लिए तैयार किए गए हैं।
प्रशिक्षण परिसर के भीतर कैडेट्स और प्रशिक्षकों की सुविधा के लिए कई आधुनिक बुनियादी ढाँचे तैयार किए गए हैं। इनमें डिजिटल क्लासरूम, रेजिडेंशियल हॉस्टल, डे-टू-डे ऑपरेशंस सेंटर, विमानों के रखरखाव और मरम्मत के लिए समर्पित हैंगर तथा अत्याधुनिक सिमुलेशन तकनीक शामिल हैं।
सालाना 180 पायलटों को तैयार करने का लक्ष्य
इस अकादमी में मुख्य रूप से कमर्शियल पायलट लाइसेंस (CPL) प्राप्त करने के इच्छुक युवाओं को पेशेवर प्रशिक्षण दिया जाएगा। एअर इंडिया का लक्ष्य इस संस्थान के माध्यम से हर साल लगभग 180 नए और प्रशिक्षित पायलट तैयार करने का है, जिससे एयरलाइन के बढ़ते बेड़े के लिए योग्य मानव संसाधन की मांग को घरेलू स्तर पर ही पूरा किया जा सके।
विदेशों पर निर्भरता घटाने की पहल
भारत में पहले से ही इंदिरा गांधी राष्ट्रीय उड़न अकादमी (IGRUA) सहित कई अन्य सरकारी और निजी फ्लाइंग ट्रेनिंग संस्थान देश के विभिन्न हिस्सों में संचालित हो रहे हैं। इसके बावजूद, देश में प्रशिक्षण विमानों की सीमित संख्या, प्रवेश सीटों की कमी और कई बार लंबी प्रशिक्षण अवधि के कारण भारतीय युवाओं को कमर्शियल पायलट लाइसेंस के लिए दक्षिण अफ्रीका, अमेरिका या अन्य यूरोपीय देशों का रुख करना पड़ता था।
अमरावती में स्थापित इस नई अकादमी के संचालन से देश में कुल प्रशिक्षण क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और युवाओं को विदेश जाकर प्रशिक्षण लेने की मजबूरी से काफी हद तक राहत मिलेगी।