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मेरठ कमिश्नरी पार्क में गरमाई राजनीति: रवि गौतम की भूख हड़ताल से प्रशासन में हड़कंप

मेरठ कमिश्नरी पार्क में गरमाई राजनीति: रवि गौतम की भूख हड़ताल से प्रशासन में हड़कंप

उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर में प्रशासनिक और राजनीतिक सरगर्मी अपने चरम पर पहुंच गई है। चौधरी चरण सिंह पार्क (कमिश्नरी पार्क) में पिछले काफी समय से जारी अनिश्चितकालीन धरना अब एक बड़े संघर्ष का रूप ले चुका है। युवा शक्ति दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष और एडवोकेट रवि गौतम ने अपने पूर्व ऐलान के मुताबिक 3 सितंबर 2026 से आधिकारिक तौर पर आमरण अनशन यानी भूख हड़ताल शुरू कर दी है। उनके इस कदम से स्थानीय पुलिस और प्रशासन के माथे पर चिंता की लकीरें साफ देखी जा सकती हैं। धरना स्थल पर लगातार समर्थकों का हुजूम उमड़ रहा है, जिसे देखते हुए सुरक्षा के अत्यंत कड़े प्रबंध किए गए हैं।

कमिश्नरी पार्क में क्यों मचा है बवाल?

यह पूरा विवाद बीते कुछ महीनों पहले घटी एक दर्दनाक घटना और उसके बाद प्रशासनिक कार्रवाई से जुड़ा हुआ है। मूल रूप से यह पूरा घटनाक्रम 15 मई को हुई एक अनुसूचित जाति की छात्रा के अपहरण और हत्या (ललिता गौतम हत्याकांड) के बाद से सुलग रहा है। इस मामले में पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए न्याय की मांग को लेकर लगातार प्रदर्शन किए जा रहे थे। मामला तब और गंभीर हो गया जब 8 जुलाई को कलेक्ट्रेट परिसर के बाहर भारी विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी झड़प देखने को मिली थी।

आरोप है कि 8 जुलाई के प्रदर्शन के दौरान तत्कालीन वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) अविनाश पांडेय ने कानून व्यवस्था संभालने के नाम पर अतिवादी रुख अपनाया और एक बंदी वाहन के भीतर घुसकर युवा शक्ति दल के अध्यक्ष रवि गौतम को थप्पड़ जड़ दिए थे। इस घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गया था, जिसके बाद से बहुजन समाज और विभिन्न सामाजिक संगठनों में भारी आक्रोश व्याप्त है।

प्रमुख मांगें: बर्खास्तगी और मुकदमों की वापसी

आज से शुरू हुई इस भूख हड़ताल के दौरान रवि गौतम और उनके समर्थकों ने शासन-प्रशासन के सामने कुछ बेहद सख्त और स्पष्ट मांगें रखी हैं। इन प्रमुख मांगों में शामिल हैं:

  • तत्कालीन एसएसपी अविनाश पांडेय समेत उन सभी पुलिस अधिकारियों और कर्मियों पर आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाए, जो इस घटना में लिप्त थे।
  • दोषी पाए गए अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त किया जाए।
  • बीते 8 जुलाई को कलेक्ट्रेट बवाल के दौरान प्रदर्शनकारियों पर दर्ज किए गए सभी 'फर्जी' मुकदमों को तुरंत वापस लिया जाए।
  • इस पूरे संघर्ष और प्रदर्शन के दौरान जेल भेजे गए सभी 8 कार्यकर्ताओं को बिना किसी शर्त के तुरंत रिहा किया जाए।

'न्याय नहीं मिला तो दे दूंगा जान' - रवि गौतम

धरना स्थल पर भूख हड़ताल पर बैठने से ठीक पहले एडवोकेट रवि गौतम ने बेहद आक्रामक तेवर दिखाते हुए दो टूक शब्दों में कहा कि अब यह लड़ाई आर-पार की है। उन्होंने मीडिया और समर्थकों से बात करते हुए चेतावनी दी, "जब तक हमें और हमारी पीड़ित बेटी को न्याय नहीं मिल जाता, यह आंदोलन किसी भी कीमत पर थमेगा नहीं। इसके लिए चाहे हमें अपनी जान ही क्यों न गंवानी पड़े, पीछे नहीं हटेंगे। संवैधानिक पदों पर बैठकर संविधान की धज्जियां उड़ाने वाले अधिकारियों को बख्शा नहीं जाएगा।"

बता दें कि पिछले रविवार को कमिश्नरी पार्क में एक विशाल दलित महापंचायत का आयोजन किया गया था। इस महापंचायत में हजारों की संख्या में लोग जुटे थे, जहां प्रशासन को अपनी मांगों को पूरा करने के लिए तीन दिन का अल्टीमेटम दिया गया था। वह डेडलाइन समाप्त होने के बाद आज से रवि गौतम ने जल-अन्न त्यागकर भूख हड़ताल का रास्ता चुन लिया है।

प्रशासनिक चौकसी और सामाजिक संगठनों का समर्थन

स्थिति की नजाकत को भांपते हुए मेरठ जिला प्रशासन और पुलिस विभाग पूरी तरह मुस्तैद नजर आ रहा है। कमिश्नरी पार्क और उसके आसपास के रास्तों पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। साथ ही बैरिकेडिंग को और अधिक मजबूत कर दिया गया है ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।

दूसरी ओर, रवि गौतम की इस भूख हड़ताल को केवल युवा शक्ति दल ही नहीं, बल्कि 'शोषित क्रांति दल' समेत कई अन्य प्रमुख सामाजिक और राजनीतिक संगठनों का खुला समर्थन मिल रहा है। संगठनों के नुमाइंदों का कहना है कि यदि प्रशासन ने समय रहते इस मामले में कोई सकारात्मक और न्यायसंगत कदम नहीं उठाया, तो यह आंदोलन मेरठ से निकलकर पूरे उत्तर प्रदेश में एक बड़ा रूप ले सकता है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।

फिलहाल, निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार और स्थानीय प्रशासन इस गंभीर स्थिति से निपटने के लिए क्या नया रुख अपनाते हैं और क्या रवि गौतम की सेहत बिगड़ने से पहले कोई आधिकारिक बातचीत का दौर शुरू हो पाता है या नहीं।

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निवेदिता ठाकुर

निवेदिता ठाकुर

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निवेदिता ठाकुर जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती है...

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