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मानसिक परेशानी में चुप रहना खतरनाक, समय पर मदद लेना जरूरी: प्रो. अजय प्रताप

मानसिक परेशानी में चुप रहना खतरनाक, समय पर मदद लेना जरूरी: प्रो. अजय प्रताप

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव और मानसिक परेशानियां आम होती जा रही हैं। लोग अक्सर अपने अंदर चल रहे मानसिक द्वंद्व को किसी से साझा करने में कतराते हैं। इसी बीच मानसिक स्वास्थ्य को लेकर एक बेहद गंभीर और विचारणीय संदेश सामने आया है। प्रख्यात विशेषज्ञ प्रो. अजय प्रताप ने स्पष्ट रूप से कहा है कि मानसिक परेशानी की स्थिति में कभी भी चुप नहीं रहना चाहिए, बल्कि खुलकर बात करनी चाहिए और समय रहते उचित सहायता लेनी चाहिए।

मानसिक स्वास्थ्य को नजरअंदाज करना क्यों है खतरनाक?

जब किसी व्यक्ति को मानसिक तनाव या अवसाद (Depression) घेरता है, तो वह अक्सर खुद को दुनिया से अलग कर लेता है। यह चुप्पी धीरे-धीरे एक गंभीर मानसिक बीमारी का रूप ले लेती है। प्रो. अजय प्रताप के अनुसार, हमारे समाज में आज भी मानसिक स्वास्थ्य को लेकर कई तरह की भ्रांतियां और संकोच जुड़े हुए हैं, जिन्हें तोड़ना बेहद जरूरी है।

अक्सर लोग समाज के डर या इस सोच के साथ अपनी भावनाएं दबा लेते हैं कि लोग क्या कहेंगे। यह दबी हुई भावनाएं आगे चलकर शारीरिक स्वास्थ्य पर भी बुरा असर डालती हैं। दिल की धड़कन बढ़ना, उच्च रक्तचाप, अनिद्रा और हमेशा थकावट महसूस होना इसके शुरुआती लक्षण हो सकते हैं।

चुप रहने के बजाय संवाद क्यों है जरूरी?

बात करने से आधा तनाव तो वैसे ही कम हो जाता है। जब आप अपनी मन की बात किसी भरोसेमंद व्यक्ति, परिवार के सदस्य या काउंसलर के सामने रखते हैं, तो आपका दृष्टिकोण बदल जाता है।

  • तनाव का बोझ कम होता है: मन की बात बाहर आने से मस्तिष्क हल्का महसूस करता है।
  • नया दृष्टिकोण मिलता है: सामने वाला व्यक्ति आपको ऐसी सलाह दे सकता है जो आपने सोची भी न हो।
  • अकेलेपन का अहसास खत्म होता है: आपको यह अहसास होता है कि इस मुश्किल दौर में आप अकेले नहीं हैं।

समय पर मदद लेने के क्या हैं लाभ?

जिस तरह शारीरिक बीमारी होने पर हम तुरंत डॉक्टर के पास जाते हैं, ठीक उसी तरह मानसिक उलझन होने पर किसी मनोचिकित्सक या काउंसलर से मिलना बुद्धिमानी है। प्रो. अजय प्रताप का मानना है कि यदि शुरुआती स्तर पर ही सही मार्गदर्शन मिल जाए, तो किसी भी बड़े मानसिक संकट से आसानी से बचा जा सकता है।

समय पर थेरेपी या परामर्श लेने से न केवल व्यक्ति की कार्यक्षमता बढ़ती है, बल्कि उसका जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण भी लौट आता है। आज के समय में डिजिटल माध्यमों और हेल्पलाइन नंबरों के जरिए भी सहायता आसानी से उपलब्ध है, जिसका उपयोग किया जा सकता है।

परिवार और समाज की क्या है जिम्मेदारी?

यह केवल एक व्यक्ति की समस्या नहीं है, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है। अगर आपके आस-पास कोई व्यक्ति अचानक शांत रहने लगा है, लोगों से कटने लगा है या उसके व्यवहार में बदलाव आया है, तो उससे प्यार से बात करें। उसकी बात को बिना जज किए सुनें।

प्रो. अजय प्रताप की यह सलाह हमें यह सिखाती है कि मानसिक स्वास्थ्य उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि शारीरिक स्वास्थ्य। इसलिए, आज ही संकल्प लें कि मानसिक परेशानी में चुप नहीं रहेंगे, बल्कि बात करेंगे और जरूरत पड़ने पर मदद लेंगे।

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रोशनी गुप्ता

रोशनी गुप्ता

Writer

रोशनी गुप्ता जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती हैं।...

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