भारत के ओलिंपिक 2036 और राष्ट्रमंडल खेल 2030 की मेजबानी के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने खेल उद्योगों के विकास के लिए बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने खेलो इंडिया स्पोर्ट्स गुड्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम को मंजूरी दे दी है, जिसके तहत वर्ष 2026 से 2033-34 की अवधि के लिए कुल 1,856.67 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इस योजना के अंतर्गत मेरठ और जालंधर के पारंपरिक और पुराने खेल उद्योगों को 'विरासत वाले उद्योग' की श्रेणी में रखा गया है, जिससे इन्हें तकनीकी उन्नयन के लिए लगभग 130 से 150 करोड़ रुपये की अतिरिक्त सब्सिडी मिलेगी।
बुधवार को स्वीकृत इस योजना का मुख्य उद्देश्य स्थानीय खेल विनिर्माण इकाइयों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना और दुनिया भर के एथलीटों के हाथों में भारतीय ब्रांड के उपकरण पहुंचाना है। अब तक वैश्विक प्रतियोगिताओं में विदेशी कंपनियों के खेल उपकरणों का दबदबा रहा है, लेकिन इस वित्तीय सहायता से मेरठ और जालंधर के उत्पाद अंतरराष्ट्रीय ब्रांड्स को सीधी टक्कर दे सकेंगे। इसके अलावा, देश के अन्य हिस्सों में भी खेल उद्योग में निवेश करने वालों को इस योजना के तहत सब्सिडी का लाभ मिलेगा।
उद्योगपतियों और जानकारों की प्रतिक्रिया
क्रिकेट उत्पाद बनाने वाली कंपनी पीआर स्पोर्ट्स के प्रबंध निदेशक और खेल उत्पाद व खिलौना निर्यात प्रोत्साहन परिषद के चेयरमैन सुमनेश अग्रवाल ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि लंबे समय से इस तरह की सरकारी सहायता की मांग की जा रही थी। अब इस बजट के जरिए उद्योगों तक आधुनिक मशीनें और प्रशिक्षित श्रमिक आसानी से पहुंच सकेंगे, जिससे कंपनियों का अंतरराष्ट्रीय प्रमाण पत्र हासिल करने का मार्ग भी प्रशस्त होगा।
वेटलिफ्टिंग और एथलीट उत्पाद तैयार करने वाली कंपनी नेल्को के निदेशक तथा परिषद के वाइस चेयरमैन अंबर आनंद के अनुसार, मेरठ और जालंधर के अधिकांश उद्योग अभी तक संसाधनों के अभाव में अपने ब्रांड को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने के बजाय विदेशी कंपनियों के लिए उत्पाद बनाते रहे हैं। सरकार की इस नई सब्सिडी योजना से इन पारंपरिक उद्योगों को आधुनिक तकनीक अपनाने में बड़ी मदद मिलेगी।
टेबल टेनिस के प्रमुख निर्यातक स्टैग इंटरनेशनल के प्रबंध निदेशक राकेश कोहली ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय प्रमाण पत्र हासिल करना इस क्षेत्र की सबसे बड़ी चुनौती रही है, जिसके भारी खर्च के कारण भारतीय उत्पाद पीछे छूट जाते थे। अब सरकार द्वारा ढांचागत विकास और प्रमाणन में मदद मिलने से स्थिति में सुधार आएगा।
मेरठ और जालंधर के उद्योगों को मिलने वाले मुख्य लाभ
- तकनीकी आधुनिकीकरण: पारंपरिक विनिर्माण इकाइयों को स्वचालित प्रणालियों की ओर ले जाने के लिए आधुनिक सीएनसी मशीनों, रोबोटिक्स कटिंग और हाईटेक प्रयोगशालाओं की स्थापना पर सब्सिडी दी जाएगी।
- अंतरराष्ट्रीय प्रमाणन पर सहायता: विश्व स्तरीय खेल आयोजनों में उत्पादों को शामिल कराने के लिए जरूरी अंतरराष्ट्रीय प्रमाण पत्रों और उनके नवीनीकरण पर होने वाले भारी खर्च (जो सालाना एक से दो करोड़ रुपये तक होता है) पर सरकार 70 प्रतिशत तक सब्सिडी उपलब्ध कराएगी।
- स्टार्टअप्स और बुनियादी ढांचा: नए निवेशकों और स्टार्टअप्स के लिए टर्नओवर-लिंक्ड सहायता और प्लग-एंड-प्ले इंफ्रास्ट्रक्चर की व्यवस्था की जाएगी।
- उत्पाद की गुणवत्ता: उत्पादों की मजबूती और सटीक माप सुनिश्चित करने के लिए अत्याधुनिक टेस्टिंग लैब्स और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाए जाएंगे।
प्रमुख भारतीय खेल उपकरण निर्माता
वर्तमान में देश की कई प्रतिष्ठित कंपनियां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने उत्पादों की आपूर्ति कर रही हैं, जिनमें स्टैग इंटरनेशनल, भल्ला एंड वीनेक्स, नेल्को और नेशनल स्पोर्ट्स जैसे नाम शामिल हैं। इन सभी के उत्पाद ओलिंपिक और अन्य वैश्विक प्रतियोगिताओं तक पहुंचते रहे हैं, और इस नई योजना के बाद इनके दायरे और गुणवत्ता में और अधिक विस्तार होने की उम्मीद है।