उत्तर प्रदेश माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद की वर्ष 2027 की परीक्षाओं के लिए जारी हुई नई केंद्र नीति, वित्तविहीन स्कूलों को किया गया बाहर
उत्तर प्रदेश माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद ने वर्ष 2027 की परीक्षाओं के लिए अपनी नई और कड़े प्रावधानों वाली केंद्र निर्धारण नीति की घोषणा कर दी है। परीक्षा की शुचिता बनाए रखने और नकल पर पूरी तरह से अंकुश लगाने के उद्देश्य से तैयार की गई इस नीति के तहत इस बार वित्तविहीन विद्यालयों को परीक्षा केंद्र की सूची से पूरी तरह बाहर रखा गया है। परिषद ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा के लिए केवल सरकारी और सहायता प्राप्त संस्थानों को प्राथमिकता दी जाएगी।
छात्र संख्या और दूरी के नए मानक
जारी की गई नीति के अनुसार, किसी भी परीक्षा केंद्र पर न्यूनतम 100 से कम और अधिकतम 500 से अधिक परीक्षार्थी आवंटित नहीं किए जाएंगे। इसके साथ ही, परीक्षार्थियों को उनके अध्ययन स्थल से यथासंभव 12 किलोमीटर के दायरे में ही परीक्षा केंद्र आवंटित किए जाने का प्रावधान किया गया है ताकि विद्यार्थियों को लंबी दूरी तय न करनी पड़े। बोर्ड ने यह भी नियम बनाया है कि एक ही प्रबंधक के अधीन संचालित विद्यालयों के विद्यार्थियों को आपस में परीक्षा केंद्र नहीं बनाया जाएगा। यदि कोई परीक्षार्थी निर्धारित केंद्र के अलावा किसी अन्य स्थान पर परीक्षा देता है, तो उसका परीक्षा परिणाम स्वतः निरस्त कर दिया जाएगा और संबंधित केंद्र को आगामी तीन वर्षों के लिए प्रतिबंधित कर दिया जाएगा।
बुनियादी ढांचे और तकनीकी संसाधनों का सत्यापन
शिक्षा निदेशक (माध्यमिक) एवं परिषद के अध्यक्ष प्रताप सिंह बघेल ने राज्य के सभी मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशकों और जिला विद्यालय निरीक्षकों (DIOS) को केंद्र निर्धारण को लेकर विस्तृत निर्देश जारी कर दिए हैं। व्यवस्थाओं की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए जिला विद्यालय निरीक्षक या उनके अधीन कार्यरत राजपत्रित अधिकारियों की एक विशेष टीम विद्यालयों की आधारभूत सुविधाओं और तकनीकी संसाधनों का भौतिक सत्यापन करेगी।
केंद्र बनने वाले स्कूलों में सीसीटीवी कैमरे, वॉइस रिकॉर्डर, डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर (DVR), राउटर, मॉनिटर और हाई-स्पीड इंटरनेट का पूरी तरह चालू हालत में होना अनिवार्य कर दिया गया है। इसके अलावा उत्तर पुस्तिकाओं के सुरक्षित रखरखाव के लिए अलग से सीसीटीवी युक्त कक्ष, सुरक्षित चारदीवारी, मजबूत लोहे का गेट, अग्निशमन यंत्र, शुद्ध पेयजल, छात्र-छात्राओं के लिए पृथक शौचालय और निर्बाध विद्युत आपूर्ति की व्यवस्था होना जरूरी है। बिजली के विकल्प के तौर पर जनरेटर या इनवर्टर के साथ-साथ कंप्यूटर, प्रिंटर और एक दक्ष कंप्यूटर ऑपरेटर की अनिवार्यता भी रखी गई है।
किन स्कूलों को नहीं मिलेगा केंद्र का दर्जा?
नई नीति के तहत कई श्रेणियों के विद्यालयों को परीक्षा केंद्र बनाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षाओं के लिए पहले से परीक्षा केंद्र बनाए जा चुके विद्यालयों को संस्कृत बोर्ड की परीक्षा का केंद्र नहीं बनाया जाएगा। इसके अलावा जिन विद्यालयों के खिलाफ पूर्व में प्रश्नपत्र लीक होने, चोरी, परीक्षा की गोपनीयता भंग होने या उत्तर पुस्तिकाएं केंद्र के बाहर लिखे जाने जैसे मामले सामने आए हैं, उन्हें इस प्रक्रिया से बाहर रखा गया है।
जिन संस्थानों पर मान्यता प्रत्याहरण (रद्द करने) की कार्रवाई चल रही है अथवा जहां प्रबंधक और प्रधानाचार्य के बीच किसी प्रकार का विवाद चल रहा है, वे विद्यालय भी परीक्षा केंद्र नहीं बन सकेंगे।