कीरतपुर-मनाली फोरलेन के महत्वपूर्ण हिस्से झलोगी सुरंग के भविष्य को लेकर पिछले डेढ़ वर्ष से चल रहा गतिरोध अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। सुरंग के डिजाइन और मरम्मत को लेकर निर्माण कंपनी और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के बीच उपजा विवाद अब नई दिल्ली स्थित एनएचएआई मुख्यालय में सुलझाया जाएगा।
एनएचएआई के चेयरमैन की अध्यक्षता में कंपनी और प्राधिकरण के शीर्ष अधिकारियों की एक उच्चस्तरीय बैठक बुलाई गई है, जिसमें इस पूरे मामले का स्थायी समाधान निकाले जाने की उम्मीद है। इस परियोजना से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से चली आ रही अड़चनों को दूर करने के लिए यह बैठक बेहद अहम मानी जा रही है।
वर्ष 2025 की आपदा से क्षतिग्रस्त हुई थी सुरंग
वर्ष 2025 के दौरान क्षेत्र में आई प्राकृतिक आपदा के कारण झलोगी सुरंग का पोर्टल पहाड़ी से भारी भूस्खलन और लगातार पत्थर गिरने के चलते क्षतिग्रस्त हो गया था। इस आपदा के बाद से ही सुरंग की मरम्मत और इसके सुदृढ़ीकरण के कार्यों को लेकर दोनों पक्षों के बीच पेंच फंसा हुआ है।
विवाद का मुख्य कारण वित्तीय पक्ष है। निर्माण कंपनी मरम्मत कार्यों के लिए अतिरिक्त वित्तीय बजट की मांग कर रही है, जबकि एनएचएआई का रुख पूरी तरह स्पष्ट है कि सभी आवश्यक कार्य मूल टेंडर के प्रावधानों और तय अनुबंध शर्तों के अंतर्गत ही पूरे किए जाने चाहिए।
नागचला से पंडोह तक मार्ग का सौंदर्यीकरण
इस बीच, एनएचएआई के शिमला क्षेत्र के क्षेत्रीय अधिकारी कर्नल अजय बरगोटी ने कीरतपुर-मनाली और पठानकोट-मंडी फोरलेन पर चल रहे निर्माण कार्यों का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने नागचला से पंडोह तक के सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण मार्ग के सौंदर्यीकरण कार्यों की प्रगति की गहन समीक्षा की।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय इस पूरे खंड के विकास कार्यों की खुद सीधी निगरानी कर रहा है। इसके तहत नागचला-पंडोह मार्ग पर ढलानों और किनारों को सुंदर बनाने के लिए हरी घास यानी टर्फिंग उगाने, विशेष साफ-सफाई सुनिश्चित करने तथा दीवारों पर रंग-रोगन करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं।
नवंबर तक वाहनों के लिए खुलेगा बिजणी-पद्धर सुपर हाईवे
दूसरी तरफ, पठानकोट-मंडी फोरलेन परियोजना के अंतर्गत बिजणी से पद्धर के बीच निर्मित करीब 19 किलोमीटर लंबे सुपर हाईवे को नवंबर महीने में हर हाल में वाहनों की आवाजाही के लिए बहाल और सुचारु करने के निर्देश निर्माण कंपनी को दिए गए हैं।
मानसून के मौसम में अत्यधिक वर्षा और जलभराव के कारण इस मार्ग को कई स्थानों पर काफी क्षति पहुंची थी। भविष्य में पानी के जमाव से सड़क को सुरक्षित रखने के लिए मार्ग के दोनों किनारों पर मजबूत निकास नालियों के निर्माण के निर्देश दिए गए हैं। इसके अतिरिक्त, द्रंग क्षेत्र के समीप बार-बार उत्पन्न हो रही भूस्खलन की समस्या का स्थायी और वैज्ञानिक समाधान खोजने के लिए विशेष विशेषज्ञों से अध्ययन करवाया जाएगा।
एनएचएआई मंडी के उपप्रबंधक दिगव्रत सिंह ने बताया कि क्षेत्रीय अधिकारी शिमला द्वारा दोनों मार्गों का निरीक्षण करने के बाद दिए गए सभी दिशा-निर्देशों पर मैदानी स्तर पर काम शुरू कर दिया गया है।