इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बिजनौर के फीना गांव में लगने वाले पारंपरिक धार्मिक मेले जाहर दीवान (नौमी) के प्रबंधन को लेकर जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) के आदेश पर रोक लगा दी है।
न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति विवेक सरन की खंडपीठ ने सार्वजनिक आर्य इंटर कॉलेज की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए यह अंतरिम आदेश पारित किया है। अदालत ने अपने कड़े रुख में कहा कि प्रथमदृष्टया जिलाधिकारी का यह आदेश उनके अधिकार क्षेत्र से पूरी तरह बाहर है और ऐसा प्रतीत होता है कि डीएम ने किसी ट्रस्ट या संपत्ति के प्रबंधन के लिए योजना तैयार करने वाली सिविल अदालत की तरह काम किया है।
1997 की सिविल कोर्ट डिक्री का हवाला
याचिकाकर्ता पक्ष के अनुसार, बिजनौर जिले के फीना गांव स्थित प्लाट संख्या 981 और 997 पर पारंपरिक रूप से यह मेला आयोजित किया जाता रहा है। इस मेले के आयोजन अधिकारों को लेकर उपजे विवाद के बाद समिति ने वर्ष 1982 में ग्राम सभा के खिलाफ सिविल अदालत में वाद दायर किया था।
लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद द्वितीय अपर सिविल जज (सीनियर डिवीजन), बिजनौर ने दो दिसंबर 1997 को समिति के पक्ष में डिक्री पारित की थी, जिसके तहत प्रबंधन और अधिकारों की स्थिति स्पष्ट की गई थी। हाईकोर्ट ने माना है कि जिलाधिकारी का नया आदेश इस पुरानी डिक्री के भी विपरीत है।
जिलाधिकारी ने बनाई थी तीन सदस्यीय कमेटी
विवाद तब और गहराया जब जिलाधिकारी ने 29 अगस्त 2025 को एक प्रशासनिक आदेश जारी कर मेले के संपूर्ण प्रबंधन का अधिकार ग्राम सभा को सौंप दिया। साथ ही, मेले से होने वाली आय को भी ग्राम सभा को ही देने का निर्देश दिया गया था।
इस व्यवस्था को लागू करने के लिए प्रशासन ने तहसीलदार चांदपुर, मुख्य अधिकारी जिला पंचायत और खंड विकास अधिकारी चांदपुर को मिलाकर एक तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया था, जिसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई।
हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणी और आगे की कार्रवाई
सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने इस बात पर गहरी नाराजगी जताई कि जिलाधिकारियों को पहले भी प्रशासनिक सीमाओं का उल्लंघन न करने और अन्य न्यायिक अधिकारियों या जजों के क्षेत्राधिकार में हस्तक्षेप न करने की चेतावनी दी जा चुकी है।
अदालत ने स्पष्ट किया है कि याची संस्थान सभी आवश्यक विधिक अनुमतियां और औपचारिकताएं पूरी कर मेला आयोजित करने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है। इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 17 नवंबर 2026 की तारीख निर्धारित की गई है, जिस दौरान मामले पर विस्तृत सुनवाई होगी।