लोकसभा में विपक्ष के नेता ने इंडिया गठबंधन की बैठक के बाद स्पष्ट किया कि लोकतंत्र की बहाली तक उनका संघर्ष नहीं रुकेगा।
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने दो टूक शब्दों में कहा है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाने तथा विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया को रोकने की मांग को लेकर उनका आंदोलन पूरी ताकत के साथ जारी रहेगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस संघर्ष में चाहे एक दिन का समय लगे या दो साल का, वह अपने कदम पीछे नहीं खींचेंगे। मंगलवार को अपने आधिकारिक आवास पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए कांग्रेस नेता ने अपनी राजनीतिक दृढ़ता दोहराई।
इससे पहले राहुल गांधी ने अपने आवास पर 'इंडिया' गठबंधन के प्रमुख नेताओं को चाय पर आमंत्रित किया था। इस बैठक में संसद के बाहर चल रहे विरोध प्रदर्शनों और आगे की राजनीतिक रणनीतियों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। बैठक के बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए उन्होंने कहा कि उनकी इस महत्वपूर्ण लड़ाई में पूरा विपक्ष पूरी तरह एकजुट है और सभी दल मिलकर इस दिशा में काम कर रहे हैं।
मांगें पूरी होने की कोई समय सीमा तय नहीं
अपनी मांगों के समाधान में लगने वाले समय के सवाल पर राहुल गांधी ने कहा कि उनकी मांगें कल पूरी हों, परसों, तीन महीने में, छह महीने में, एक साल में या फिर दो साल बाद, लेकिन उनका संघर्ष किसी भी स्थिति में धीमा नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार की ऊर्जा, ताकत और एकजुटता का परिचय पिछले कुछ दिनों में तमाम विपक्षी दलों ने दिया है, वैसी ही भावना के साथ आगे भी यह सिलसिला जारी रहेगा और वे अपने अंतिम लक्ष्य तक पहुंचेंगे।
'देश में लोकतंत्र और चुनाव व्यवस्था को किया जा रहा नष्ट'
केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए राहुल गांधी ने कहा कि देश में लोकतांत्रिक ढांचे को गंभीर नुकसान पहुंचाया जा रहा है, चुनावी व्यवस्था कमजोर की जा रही है और संविधान की मूल भावना को ठेس पहुंचाई जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति के पारंपरिक मंचों को भी सीमित कर रही है, जिसका एक उदाहरण जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शनों पर लगाई गई रोक है। उन्होंने घोषणा की कि विपक्ष सरकार के इस फैसले को कानूनी और राजनीतिक स्तर पर चुनौती देगा।
राहुल गांधी के अनुसार, सरकार यह तय नहीं कर सकती कि भारत के नागरिक अपनी आवाज उठाने के लिए सड़क पर संघर्ष न करें। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस पूरी व्यवस्था का मुख्य सूत्रधार बताया, जबकि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को इसे अमलीजामा पहनाने वाला करार दिया। साथ ही, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार सहित अन्य लोगों को इस पूरी प्रक्रिया में शामिल बताते हुए चेतावनी दी कि अब उनके चारों ओर शिकंजा कस रहा है और संविधान को नष्ट करके कोई नहीं बच सकता।
अपने संबोधन के अंत में उन्होंने सोमवार को दिल्ली में हुए प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए कहा कि वहां सिर्फ राजनीतिक दल एकजुट नहीं थे, बल्कि वह देश की आम जनता की मुखर आवाज थी। उन्होंने दिल्ली और देश भर की जनता द्वारा दिए जा रहे समर्थन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह लड़ाई किसी एक दल या नेता के बारे में नहीं है, बल्कि भारत के संविधान और आम नागरिकों के उज्ज्वल भविष्य से जुड़ी हुई है।