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यूपी की सियासत में भूचाल: डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के साले ने खोला मोर्चा

यूपी की सियासत में भूचाल: डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के साले ने खोला मोर्चा

सियासी गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म

उत्तर प्रदेश की राजनीति में कब क्या हो जाए, इसका अंदाजा लगाना अक्सर मुश्किल होता है। 1 सितंबर 2026 की शाम को एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने राज्य की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के खेमे में खलबली मचा दी है। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के साले, राजीव कुमार त्रिपाठी ने सार्वजनिक रूप से अपनी राजनीतिक निष्ठाओं का ऐलान कर दिया है। उन्होंने न केवल अपने जीजा के खिलाफ मोर्चा खोला है, बल्कि 2027 के विधानसभा चुनावों में समाजवादी पार्टी को जिताने का संकल्प भी लिया है।

फेसबुक पोस्ट से मचा हड़कंप

राजीव कुमार त्रिपाठी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर एक पोस्ट साझा की, जो देखते ही देखते वायरल हो गई। इस पोस्ट में उन्होंने स्पष्ट शब्दों में लिखा कि राजनैतिक कारणों से उनका अपनी बड़ी बहन नम्रता पाठक और उनके पति यानी उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक से अब कोई वास्ता नहीं है। उन्होंने लिखा, 'नम्रता पाठक जो मेरी सगी बड़ी बहन हैं और उनके पति ब्रजेश पाठक, जो उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री हैं, से राजनैतिक कारणों से मेरा कोई मतलब नहीं है।'

समाजवाद की राह पर राजीव कुमार

राजीव कुमार त्रिपाठी ने अपने पोस्ट में आगे कहा कि वे समाजवादी पार्टी की विचारधारा से प्रभावित हैं और अब पार्टी के प्रचार-प्रसार में जुटेंगे। उन्होंने लिखा, 'मेरे इस कदम से यदि उन्हें कष्ट होता है तो मैं अपने भविष्य को देखते हुए उनसे माफी मांगता हूं। मैं समाजवादी विचारधारा से ओतप्रोत होकर काम करूंगा। मैं जातिवाद को खत्म कर समाजवाद को अपनाऊंगा और समाजवादी पार्टी की पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने में अपना योगदान दूंगा।'

कौन हैं राजीव कुमार त्रिपाठी?

राजीव कुमार त्रिपाठी डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक की पत्नी नम्रता पाठक के छोटे भाई हैं। पारिवारिक रूप से बीजेपी से जुड़ाव होने के बावजूद, राजीव का यह कदम चौंकाने वाला है। हालांकि, वे कभी भी बीजेपी के औपचारिक सदस्य नहीं रहे, लेकिन एक बड़े पद पर बैठे नेता के परिवार का विपक्षी दल का समर्थन करना राजनीतिक विश्लेषकों के लिए चर्चा का विषय बना हुआ है।

2027 की लड़ाई और बीजेपी की चिंता

उत्तर प्रदेश में 2027 का विधानसभा चुनाव बीजेपी के लिए 'जीत की हैट्रिक' लगाने का मौका है, वहीं अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली समाजवादी पार्टी इसे सत्ता में वापसी का बड़ा जरिया मान रही है। ऐसे में किसी भी बड़े नेता के परिवार के भीतर से उठने वाली बगावत की आवाज पार्टी की साख पर असर डाल सकती है।

  • पारिवारिक कलह या राजनीतिक रणनीति? - लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या यह कोई अंदरूनी कलह है या फिर सोची-समझी राजनीतिक चाल।
  • समाजवादी पार्टी का रुख - अब तक समाजवादी पार्टी की ओर से इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन पार्टी कार्यकर्ताओं में इसे लेकर उत्साह देखा जा रहा है।
  • मतदाताओं पर प्रभाव - क्या यह कदम बीजेपी के वोट बैंक पर सेंध लगा पाएगा? यह आने वाला वक्त ही बताएगा।

निष्कर्ष

फिलहाल, यह मामला उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नए अध्याय की तरह है। ब्रजेश पाठक जैसे कद्दावर नेता के लिए अपने घर के भीतर से हो रही यह बगावत निश्चित रूप से एक बड़ी चुनौती है। क्या समाजवादी पार्टी इस मौके का फायदा उठा पाएगी? या फिर बीजेपी अपने इस पारिवारिक संकट को सुलझाने में कामयाब होगी? इन सवालों के जवाब पाने के लिए हमें आगामी चुनावों तक का इंतजार करना होगा।

यह खबर ताज़ा घटनाक्रम पर आधारित है। राजनीतिक गलियारों में इस घटना के बाद कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।

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रोशनी गुप्ता

रोशनी गुप्ता

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रोशनी गुप्ता जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती हैं।...

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