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उत्तराखंड कैबिनेट का बड़ा फैसला: 1.19 लाख युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते खुले

उत्तराखंड कैबिनेट का बड़ा फैसला: 1.19 लाख युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते खुले

पहाड़ की वादियों से लेकर देश की प्रशासनिक राजधानी तक, इस समय उत्तराखंड सरकार के एक ऐतिहासिक और दूरगामी फैसले की गूंज सुनाई दे रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में नेपाल सीमा से सटे चंपावत जिले के बनवसा में हुई कैबिनेट बैठक ने राज्य के युवाओं और प्रशासनिक ढांचे में बड़े बदलाव की नींव रख दी है। इस बैठक में कुल 24 महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर मुहर लगाई गई, जिनमें सबसे बड़ा केंद्रबिंदु राज्य के युवाओं का भविष्य और सरकारी व्यवस्था में पारदर्शिता लाना रहा है।

मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा कौशल संवर्धन योजना-2026 को हरी झंडी

आज के दौर में शिक्षा के साथ-साथ कौशल (स्किल) होना सबसे बड़ी जरूरत बन चुका है। इसी वास्तविक जरूरत को समझते हुए धामी कैबिनेट ने 'मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा कौशल संवर्धन योजना-2026' को मंजूरी दे दी है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य राज्य के उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे छात्र-छात्राओं को आधुनिक दौर की जरूरतों के हिसाब से रोजगार के लिए तैयार करना है।

आंकड़ों के मुताबिक, इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत प्रदेश के शासकीय और निजी विश्वविद्यालयों के साथ-साथ महाविद्यालयों में अध्ययनरत लगभग 1.19 लाख छात्रों को सीधा लाभ मिलेगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की मूल अवधारणा पर आधारित इस योजना के पाठ्यक्रम में डिजिटल साक्षरता और आधुनिक तकनीकी कौशल को विशेष रूप से शामिल किया जाएगा। सरकार ने अगले पांच वर्षों में इस योजना पर 200 करोड़ रुपये खर्च करने का प्रावधान किया है, जो युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक ठोस कदम माना जा रहा है।

राज्य कर्मचारियों के लिए आचरण नियमावली में संशोधन

कैबिनेट बैठक में केवल युवाओं के भविष्य पर ही ध्यान नहीं दिया गया, बल्कि प्रशासनिक कसावट और कर्मचारियों से जुड़े नियमों में भी महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। राज्य कर्मचारियों की आचरण (संशोधन) नियमावली को मंजूरी देते हुए सरकार ने कुछ सख्त और कुछ राहत भरे प्रावधान लागू किए हैं।

नए नियमों के अनुसार, अब समूह 'क', 'ख', 'ग' और 'घ' के सभी कर्मचारियों को अपनी आयकर विवरणी (ITR) दाखिल करते समय संपत्ति का पूरा ब्योरा देना अनिवार्य होगा। हालांकि, इसमें समूह 'क', 'ख' और 'ग' के कर्मचारियों को हर साल अपनी संपत्ति की जानकारी देनी होगी, जबकि समूह 'घ' के कर्मचारियों के लिए यह नियम पांच साल में एक बार संपत्ति का ब्योरा देने का प्रावधान करता है।

कर्मचारियों के लिए खरीद सीमा में बड़ी राहत

कर्मचारियों की लंबे समय से चली आ रही एक मांग पर विचार करते हुए सरकार ने उनकी खरीद सीमा को केंद्र सरकार के कर्मचारियों के समान कर दिया है। अब राज्य कर्मचारी अपने दो महीने के वेतन के बराबर तक की खरीद बिना किसी पूर्व अनुमति के कर सकेंगे। हालांकि, यदि कोई कर्मचारी दो महीने के वेतन से अधिक मूल्य की कोई संपत्ति ऐसी संस्था से खरीदता है जिसका सरकार से सीधा लेन-देन है, तो उसे इसके लिए शासन से अनुमति लेनी होगी।

संपत्ति की खरीद-बिक्री और फर्जी पैन कार्ड पर कड़ा प्रहार

राजस्व चोरी और बेनामी संपत्तियों के खेल पर लगाम कसने के लिए उत्तराखंड मंत्रिमंडल ने एक और बेहद कड़ा और सराहनीय कदम उठाया है। अब राज्य में 10 लाख रुपये से अधिक मूल्य की संपत्ति की रजिस्ट्री कराना पहले जितना आसान नहीं होगा।

  • अनिवार्य पैन सत्यापन: 10 लाख से अधिक की संपत्ति की खरीद-बिक्री में क्रेता (खरीदने वाले) और विक्रेता (बेचने वाले) दोनों के पैन नंबर का सत्यापन अनिवार्य कर दिया गया है।
  • ऑटोमैटिक सॉफ्टवेयर चेकिंग: रजिस्ट्री के दौरान जैसे ही पैन नंबर दर्ज किया जाएगा, सॉफ्टवेयर उसका स्वतः सत्यापन कर लेगा।
  • फर्जी पैन पर नो एंट्री: यदि किसी भी स्तर पर पैन नंबर गलत या अमान्य पाया जाता है, तो उस संपत्ति की रजिस्ट्री किसी भी कीमत पर नहीं हो सकेगी।

इस तकनीकी बदलाव से रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता आएगी और टैक्स चोरी करने वालों पर शिकंजा कसेगा।

सीमांत क्षेत्रों तक शासन की पहुंच और सुदूरवर्ती विकास

राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से यह बैठक इसलिए भी खास रही क्योंकि मुख्यमंत्री ने अपने गृह क्षेत्र और सीमांत जिले चंपावत में कैबिनेट की बैठक आयोजित कर यह संदेश दिया कि सरकार अब सुदूरवर्ती इलाकों से सीधे नीतियां तय कर रही है। चंपावत के बनवसा स्थित एनएचपीसी परिसर में हुई इस बैठक में क्षेत्रीय विकास के साथ-साथ राज्य के समग्र विकास का खाका खींचा गया।

विशेषज्ञों का मानना है कि उच्च शिक्षा कौशल संवर्धन योजना जैसी पहले न केवल युवाओं को पलायन रोकने में मदद करेंगी, बल्कि उन्हें स्थानीय स्तर पर ही स्वरोजगार और कॉर्पोरेट जगत के लिए तैयार करेंगी। उत्तराखंड सरकार के ये फैसले आने वाले समय में राज्य की आर्थिक और सामाजिक तस्वीर बदलने की पूरी क्षमता रखते हैं।

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रोशनी गुप्ता

रोशनी गुप्ता

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रोशनी गुप्ता जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती हैं।...

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