उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने समाज के कमजोर और वंचित वर्गों को लेकर एक बेहद सख्त और संवेदनशील कदम उठाया है। सचिवालय में आयोजित राज्य स्तरीय सतर्कता एवं निगरानी समिति की उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत आने वाले मामलों में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि अत्याचार से प्रभावित प्रत्येक व्यक्ति को समय पर न्याय, सुरक्षा, सम्मान और उसके सभी कानूनी अधिकार मिलने चाहिए।
औपचारिक बैठकों से आगे बढ़कर जमीन पर उतरे काम
मुख्यमंत्री धामी ने इस बात पर जोर दिया कि सरकारी कमेटियों की बैठकें महज कागजी औपचारिकता या रूटीन समीक्षा बनकर नहीं रह जानी चाहिए। व्यवस्था को पूरी तरह से संवेदनशील, जवाबदेह और धरातल पर असर दिखाने वाला बनाया जाना बेहद जरूरी है। उन्होंने अधिकारियों से दो टूक कहा कि पिछले वर्षों से लेकर अब तक लंबित चल रही विवेचनाओं के कारणों की गहराई से समीक्षा की जाए और उन्हें सर्वोच्च प्राथमिकता के आधार पर जल्द से जल्द निपटाया जाए।
गंभीर और लंबे समय से कोर्ट-कचहरी या पुलिस थानों में अटके मामलों में पुलिस महकमा, जिला प्रशासन और अभियोजन विभाग (Prosecution Department) को आपसी तालमेल के साथ तेजी से कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा, विशेष न्यायालयों में लंबित मामलों की नियमित मॉनिटरिंग करने और मामलों की मजबूत पैरवी के लिए जरूरत के मुताबिक विशेष लोक अभियोजकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने को भी कहा गया है।
राहत राशि और पुनर्वास में देरी बर्दाश्त नहीं
पीड़ितों को मिलने वाली आर्थिक सहायता को लेकर मुख्यमंत्री ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने अधिकारियों को साफ निर्देश दिए कि पीड़ितों को अनुमन्य राहत राशि के भुगतान में किसी भी स्तर पर अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए। केवल वित्तीय सहायता ही नहीं, बल्कि प्रभावित परिवारों को चिकित्सा, बच्चों की शिक्षा, सुरक्षा, पुनर्वास और शासन की अन्य पात्र कल्याणकारी योजनाओं से भी तुरंत जोड़ा जाना चाहिए।
- सुरक्षा सर्वोपरि: गंभीर मामलों में पीड़ित और उसके पूरे परिवार की सुरक्षा को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी जाए।
- शिक्षा प्रभावित न हो: यह सुनिश्चित किया जाए कि ऐसी घटनाओं से पीड़ित परिवारों के बच्चों की पढ़ाई-लिखाई पर कोई आंच न आए।
- डिजिटल निगरानी: मामलों की विवेचना, कोर्ट की स्थिति और राहत राशि के वितरण पर नजर रखने के लिए एक आधुनिक डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित किया जाए।
पुलिसकर्मियों और अधिकारियों के लिए विशेष प्रशिक्षण
संवेदनशील मामलों से निपटने के तौर-तरीकों को सुधारने के लिए मुख्यमंत्री ने पुलिस बल और प्रशासनिक अमले को नियमित प्रशिक्षण (Training) देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अधिनियम के प्रावधानों की सही समझ और पीड़ितों के प्रति मानवीय व संवेदनशील व्यवहार बेहद आवश्यक है। इसके साथ ही, ग्रामीण और दूरदराज के पर्वतीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को उनके कानूनी अधिकारों और मिलने वाली सहायता के प्रति जागरूक करने के लिए व्यापक स्तर पर अवेयरनेस अभियान चलाए जाएं।
विभिन्न विभागों—जैसे पुलिस, समाज कल्याण, शिक्षा, स्वास्थ्य और राजस्व—के बीच आपसी समन्वय को और अधिक बेहतर बनाने के निर्देश देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बैठकों में लिए जाने वाले फैसले केवल कार्यवृत्त (Minutes of Meeting) तक ही सीमित न रहें, बल्कि हर एक निर्णय की जवाबदेही तय करते हुए तय समय-सीमा के भीतर उसकी सख्त समीक्षा की जाए।
आंकड़े क्या कहते हैं? हालिया स्थिति पर एक नजर
समीक्षा बैठक के दौरान पिछले कुछ वर्षों के दौरान दर्ज मामलों और बांटी गई राहत राशि का ब्योरा भी सामने रखा गया, जो इस प्रकार है:
- वर्ष 2024: इस दौरान इस अधिनियम के तहत कुल 189 अभियोग पंजीकृत किए गए थे।
- वर्ष 2025: इस वर्ष कुल 157 नए अभियोग दर्ज किए गए।
- वर्ष 2026 (15 सितंबर तक): चालू वर्ष में अब तक 116 अभियोग पंजीकृत हो चुके हैं, जिनमें से 25 प्रकरण अभी विवेचनाधीन हैं।
- वित्तीय सहायता का विवरण: वर्ष 2024-25 में 205 पीड़ितों को 228.71 लाख रुपये, वर्ष 2025-26 में 127 पीड़ितों को 143.16 लाख रुपये और मौजूदा वित्तीय वर्ष 2026-27 में 18 सितंबर तक 104 पीड़ितों को कुल 99.528 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जा चुकी है।
इस उच्चस्तरीय बैठक में समाज कल्याण मंत्री खजान दास, विधायक ममता राकेश, सचिव गृह शैलेश बगौली, सचिव समाज कल्याण श्रीधर बाबू अद्दांकी, सचिव एवं आयुक्त राजस्व परिषद रंजना राजगुरू, अपर पुलिस महानिदेशक एपी अशुमन, आईजी बरिंदरजीत सिंह समेत कई वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी मौजूद रहे। सभी संबंधित विभागों को मुख्यमंत्री के इन निर्देशों का कड़ाई से पालन करने के आदेश दिए गए हैं ताकि पीड़ितों को बिना किसी परेशानी के त्वरित न्याय मिल सके।