स्वास्थ्य से जुड़ी बड़ी परेशानियां अक्सर इंसान को शारीरिक रूप से ही नहीं, बल्कि आर्थिक और मानसिक रूप से भी पूरी तरह तोड़ देती हैं। छत्तीसगढ़ के सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के बिलाईगढ़ विकासखंड के अंतर्गत आने वाले छोटे से ग्राम मुच्छमल्दा की रहने वाली 53 वर्षीय मालती बंजारे भी कुछ ऐसे ही संघर्षों के दौर से गुजर रही थीं। लंबे समय से बच्चेदानी संबंधी गंभीर स्वास्थ्य समस्या के कारण उनका दैनिक जीवन दूभर हो गया था। छोटे-छोटे घरेलू काम करना भी उनके लिए पहाड़ चढ़ने जैसा साबित हो रहा था। लेकिन, सही समय पर मिले एक सरकारी दस्तावेज ने उनकी इस पूरी कायाकल्प कहानी को ही बदलकर रख दिया।
जब बीमारी बनी सिरदर्द और पैसों की चिंता ने घेरा
मालती बंजारे की जब तबीयत अधिक बिगड़ी, तो परिवार ने उन्हें स्थानीय चिकित्सकों को दिखाया। शुरुआती जांच और डॉक्टरों के परामर्श के बाद यह साफ हो गया कि उन्हें बच्चेदानी के ऑपरेशन (हिस्टेरेक्टॉमी) की सख्त जरूरत है। नामी अस्पतालों के खर्च और दवाओं के भारी-भरकम बिलों के बारे में सोचते ही मध्यम और गरीब परिवार के माथे पर चिंता की लकीरें उभर आना स्वाभाविक है। मालती के परिवार के सामने भी यही सबसे बड़ा संकट था कि आखिर इतने महंगे इलाज का खर्च कहां से उठाया जाए। खेत-खलिहान और मजदूरी के सहारे चलने वाले परिवार के लिए यह राशि जुटाना नामुमकिन सा लग रहा था।
आयुष्मान कार्ड ने दिखाई उम्मीद की नई किरण
कठिन समय में उम्मीद की एक ऐसी रोशनी जली जिसने परिवार की सारी उलझनों को दूर कर दिया। मालती बंजारे के पास पहले से ही 'आयुष्मान कार्ड' बना हुआ था। जैसे ही परिजनों को यह याद आया कि इस कार्ड के जरिए सरकारी और अनुबंधित निजी अस्पतालों में मुफ्त इलाज की सुविधा मिलती है, उनके पैरों के नीचे की जमीन वापस मजबूत हो गई। बिना किसी देरी के उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। आयुष्मान भारत योजना की प्रक्रिया के तहत उनके सभी जरूरी मेडिकल टेस्ट और जांचें बिल्कुल मुफ्त हुईं।
सफल ऑपरेशन और अस्पताल से मुस्कुराते हुए घर वापसी
विशेषज्ञ चिकित्सकों की देखरेख में मालती बंजारे का बच्चेदानी का ऑपरेशन पूरी तरह सफल रहा। सर्जरी के बाद उन्हें डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की कड़ी निगरानी में रखा गया, जहां उन्हें बेहतर दवाइयां और रिकवरी के लिए जरूरी दिशा-निर्देश दिए गए। कुछ ही दिनों के भीतर उनकी सेहत में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला। जब उन्हें अस्पताल से छुट्टी (डिस्चार्ज) दी गई, तो उनके चेहरे पर वर्षों बाद एक सच्ची मुस्कान और राहत साफ झलक रही थी।
ऑपरेशन के बाद अस्पताल से घर लौटीं मालती और उनके परिजनों ने खुलकर केंद्र और राज्य सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना की सराहना की। उन्होंने कहा कि यदि उनके पास आयुष्मान कार्ड न होता, तो शायद वे कभी कर्ज के जाल में फंसकर इलाज टालते रहते। इस कार्ड ने न केवल उन्हें एक नई जिंदगी दी है, बल्कि उन्हें अस्पताल के बिलों के भारी आर्थिक बोझ से भी पूरी तरह बचा लिया है।
सेवा संकल्प अभियान और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच
छत्तीसगढ़ में इन दिनों चलाए जा रहे 'सेवा संकल्प अभियान' के तहत यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक बेहतर, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंच सकें। शासन की मंशा है कि कोई भी जरूरतमंद पैसों के अभाव में गंभीर बीमारी से दम न तोड़े। इसी सोच के तहत पात्र हितग्राहियों को लगातार सरकारी योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग की दो टूक अपील: बनवाएं आयुष्मान कार्ड
इस पूरी घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग ने एक बार फिर प्रदेश के सभी पात्र नागरिकों से पुरजोर अपील की है कि वे बिना किसी देरी के अपना आयुष्मान कार्ड जरूर बनवाएं। विभाग का कहना है कि यह कार्ड केवल एक कागज का टुकड़ा नहीं है, बल्कि यह किसी भी आपातकालीन मेडिकल स्थिति में एक मजबूत सुरक्षा कवच का काम करता है।
- आर्थिक सुरक्षा: गंभीर बीमारियों के इलाज में लाखों रुपये तक के खर्च से मुक्ति।
- निःशुल्क जांच: अस्पताल में भर्ती होने से लेकर ऑपरेशन और दवाओं तक का खर्च शून्य।
- आसान प्रक्रिया: नजदीकी चॉइस सेंटर या जन सेवा केंद्र के जरिए आसानी से बन सकता है कार्ड।
- मानसिक शांति: इलाज के पैसों की चिंता किए बिना मरीज अपनी सेहत पर ध्यान दे सकता है।
मालती बंजारे की यह कहानी इस बात का सबसे बड़ा प्रमाण है कि सही योजनाएं जब जमीन पर उतरती हैं, तो वे किस तरह आम आदमी के जीवन में क्रांतिकारी बदलाव लाती हैं। जरूरत है तो बस जागरूकता की, ताकि समय रहते हर पात्र व्यक्ति इन सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ उठा सके।