सनातन संस्कृति में देवी शक्ति के विभिन्न स्वरूपों की आराधना का विशेष महत्व है। पंचांग के अनुसार, इस वर्ष 23 सितंबर 2026 को जगत की संचालिका मां आदिशक्ति के चतुर्थ स्वरूप मां भुवनेश्वरी की जयंती बेहद धूमधाम और श्रद्धा के साथ मनाई जाएगी। देवी भुवनेश्वरी को ब्रह्मांड की राजराजेश्वरी और समस्त लोकों की स्वामिनी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो भी साधक सच्चे मन से इस पावन तिथि पर मां भुवनेश्वरी की उपासना करता है, उसके जीवन से समस्त प्रकार के अभाव, दुख और संताप हमेशा के लिए समाप्त हो जाते हैं।
संतान सुख और पारिवारिक समृद्धि की प्रदात्री हैं मां भुवनेश्वरी
अक्सर देखा गया है कि लाख कोशिशों के बाद भी कई दंपतियों को संतान सुख की प्राप्ति नहीं हो पाती है, या फिर घर-परिवार में क्लेश की स्थिति बनी रहती है। ऐसे में ज्योतिष और तंत्र शास्त्र के जानकारों का मानना है कि भुवनेश्वरी जयंती का दिन इन समस्याओं के निवारण के लिए अत्यंत फलदायी साबित होता है। मां भुवनेश्वरी की कृपा से न केवल वंश वृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है, बल्कि दांपत्य जीवन में भी मधुरता और अटूट प्रेम का संचार होता है।
माता के इस स्वरूप की साधना करने से व्यक्ति को भौतिक सुख-सुविधाओं के साथ-साथ आध्यात्मिक उन्नति की भी प्राप्ति होती है। यही कारण है कि इस विशेष पर्व को लेकर देश भर के प्रबुद्ध भक्तों में खासा उत्साह देखा जा रहा है।
23 सितंबर 2026: पूजा के लिए शुभ मुहूर्त और पंचांगीय गणना
इस वर्ष 23 सितंबर को पड़ने वाली भुवनेश्वरी जयंती के दिन ग्रहों और नक्षत्रों का एक बेहद दुर्लभ संयोग बन रहा है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इस दिन पूजा करने से कई गुना अधिक फल की प्राप्ति होती है। आइए जानते हैं कि इस दिन आपको किस प्रकार से अपने दिन की शुरुआत करनी चाहिए और किन नियमों का पालन करना अनिवार्य है:
- ब्रह्म मुहूर्त में उठें: पर्व के दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान आदि से निवृत्त हो जाएं और स्वच्छ वस्त्र (विशेषकर पीले या लाल रंग के) धारण करें।
- पूजा स्थल की शुद्धि: अपने घर के ईशान कोण में स्थित पूजा घर को गंगाजल छिड़क कर पवित्र करें और वहां एक चौकी स्थापित करें।
- माता की स्थापना: चौकी पर लाल या पीले रंग का वस्त्र बिछाकर मां भुवनेश्वरी की तस्वीर या विग्रह स्थापित करें। यदि तस्वीर उपलब्ध न हो, तो श्री यंत्र या सुपारी को मां का प्रतीक मानकर पूजा की जा सकती है।
आदिशक्ति भुवनेश्वरी की विधिवत पूजा पद्धति
किसी भी देवी-देवता की कृपा प्राप्त करने के लिए उनकी पूजा विधि का सही होना बहुत जरूरी है। मां भुवनेश्वरी की पूजा की प्रक्रिया कुछ इस प्रकार है:
1. संकल्प और आचमन
पूजा की शुरुआत करने से पहले हाथ में अक्षत, पुष्प और जल लेकर माता के समक्ष अपने मन की कामना (जैसे संतान प्राप्ति या गृहस्थ शांति) का संकल्प लें। इसके बाद आचमन कर खुद को पवित्र करें।
2. षोडशोपचार पूजन
माता को सबसे पहले रोली, सिंदूर, अक्षत, और लाल पुष्प अर्पित करें। मां भुवनेश्वरी को लाल रंग के फूल विशेष रूप से प्रिय हैं, इसलिए संभव हो तो गुड़हल या गुलाब के फूलों का प्रयोग करें। इसके बाद धूप और दीप प्रज्वलित करें।
3. नैवेद्य और भोग
माता को घर में बने शुद्ध सात्विक पकवान, खीर, या फल-मठरी का भोग लगाएं। भोग में तुलसी दल का विशेष रूप से ध्यान रखें (यदि परंपरा अनुसार मान्य हो)।
इस शक्तिशाली मंत्र का करें जाप
पूजा के दौरान माता के मूल मंत्र का जाप करना अत्यंत लाभकारी माना जाता है। रुद्राक्ष या स्फटिक की माला से निम्नलिखित मंत्र का कम से कम एक या पांच माला जाप अवश्य करें:
"ॐ ह्रीं भुवनेश्वर्यै नमः"
यह मंत्र अपने आप में इतना प्रभावशाली है कि इसके नियमित स्मरण से मन को असीम शांति मिलती है और नकारात्मक ऊर्जा कोसों दूर रहती है।
संतान प्राप्ति के लिए विशेष उपाय
यदि आप संतान प्राप्ति की कामना से यह व्रत और पूजन कर रहे हैं, तो 23 सितंबर के दिन किसी सुयोग्य ब्राह्मण या जरूरतमंद कन्याओं को भोजन कराएं। साथ ही, सुहाग की सामग्री किसी सुहागन स्त्री को दान दें। मान्यता है कि ऐसा करने से माता अतिशीघ्र प्रसन्न होती हैं और घर में किलकारी गूंजने का आशीर्वाद प्रदान करती हैं।
गृहस्थ जीवन की बाधाओं को ऐसे करें दूर
पति-पत्नी के बीच यदि अनबन रहती है या घर का माहौल अशांत रहता है, तो भुवनेश्वरी जयंती की संध्या बेला में घर के मुख्य द्वार पर घी का दीपक जलाएं और माता के दरबार में प्रार्थना करें कि आपके घर में सुख, शांति और समृद्धि का वास हो। मां राजराजेश्वरी की कृपा से आपके समस्त पारिवारिक संकट स्वतः ही टल जाएंगे।
इस प्रकार, 23 सितंबर 2026 का यह पावन दिन आपके जीवन में एक नई सकारात्मक ऊर्जा लेकर आ रहा है। विधि-विधान से मां भुवneश्वरी की आराधना करें और अपने जीवन को सुखमय बनाएं।