समाजवादी पार्टी की शिकायत पर उत्तर प्रदेश निर्वाचन आयोग ने आजमगढ़ की मतदाता सूची में भारी अनियमितता पाए जाने के बाद कड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है।
मामले के तूल पकड़ने और निर्वाचन आयोग द्वारा की गई जांच के बाद, वोटर लिस्ट तैयार करने के कार्य में गंभीर लापरवाही बरतने वाले एक कंप्यूटर सहायक और पांच बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) को उनके कार्यों से हटा दिया गया है। इन सभी संबंधित कर्मियों की सेवाएं भी तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई हैं। इसके साथ ही, इस पूरी गड़बड़ी के लिए दोषी पाए गए सभी कर्मियों और अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करते हुए एफआईआर (FIR) दर्ज किए जाने के निर्देश दिए गए हैं।
जिम्मेदार अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई के आदेश
इस पूरी प्रशासनिक चूक और निगरानी में कोताही बरतने के लिए तत्कालीन निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO) और दो सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (AERO) को भी चिन्हित किया गया है। निर्वाचन आयोग ने इन तीनों वरिष्ठ अधिकारियों के विरुद्ध भी अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने के स्पष्ट आदेश जारी किए हैं।
यह पूरा घटनाक्रम तब सामने आया जब समाजवादी पार्टी की ओर से आजमगढ़ की एक विशेष मतदाता सूची में गंभीर विसंगतियों की शिकायत दर्ज कराई गई थी। जांच में यह बात सामने आई कि सूची में 'विकास यादव' नामक एक ही व्यक्ति का नाम एक या दो बार नहीं, बल्कि कुल 1010 बार दर्ज किया गया था। इस तरह की तकनीकी और प्रशासनिक चूक को चुनाव आयोग ने अत्यंत गंभीरता से लिया है, क्योंकि मतदाता सूचियों की शुद्धता निष्पक्ष और पारदर्शी लोकतांत्रिक चुनाव प्रक्रिया की पहली अनिवार्य शर्त होती है।