वाराणसी के चितईपुर थाना क्षेत्र के नेवादा इलाके में स्थित सुंदरपुर के हनुमत कृपा अपार्टमेंट में उस वक्त कोहराम मच गया, जब एक 35 वर्षीय महिला होमगार्ड का शव संदिग्ध परिस्थितियों में फंदे से लटकता हुआ मिला। मृतका की पहचान अनुराधा तिवारी के रूप में हुई है, जो इसी विभाग में अपनी सेवाएं दे रही थीं। इस घटना ने न केवल पुलिस महकमे को बल्कि पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। मौत से ठीक पहले अनुराधा द्वारा अपने मोबाइल फोन से भेजा गया एक व्हाट्सएप संदेश इस पूरी घटना की गुत्थी सुलझाने की सबसे बड़ी कड़ी बन गया है। इस सनसनीखेज मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी दवा कंपनी केकर्मी अजय पांडेय और उसकी महिला साथी अंजलि सिंह को गिरफ्तार कर लिया है और उनसे गहन पूछताछ की जा रही है।
पति की मौत के बाद बदली थी जिंदगी की राह
मिली जानकारी के अनुसार, अनुराधा तिवारी मूल रूप से अपने परिवार के साथ नेवादा स्थित इस अपार्टमेंट में रहती थीं। उनका ससुराल वाराणसी के ही अस्सी क्षेत्र में था। उनके पति धनंजय तिवारी भी होमगार्ड विभाग में ही कार्यरत थे। करीब तीन साल पहले पति का निधन हो गया था, जिसके बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा था। पति की आकस्मिक मृत्यु के बाद अनुकंपा के आधार पर अनुराधा को होमगार्ड विभाग में नौकरी मिल गई थी। उनकी ड्यूटी चितईपुर थाने पर लगाई जाती थी। वह अपनी इस नौकरी के जरिए अपने 17 साल के बेटे और 6 साल की मासूम बेटी का पालन-पोषण कर रही थीं और अपनी जिंदगी को पटरी पर लाने की जद्दोजहद में लगी थीं।
लेकिन किसे पता था कि महकमे की नौकरी मिलने के बाद उनकी जिंदगी में कुछ ऐसा होने वाला है जो उन्हें मौत के मुहाने पर ले जाएगा। परिजनों के मुताबिक, ड्यूटी के दौरान ही अनुराधा की मुलाकात सारनाथ इलाके में रहकर एक फार्मास्युटिकल कंपनी यानी दवा कंपनी में काम करने वाले 41 वर्षीय अजय पांडेय से हुई थी। अजय मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बांदा जिले का रहने वाला है। धीरे-धीरे दोनों की मुलाकातें बातचीत में बदलीं और फिर यह संपर्क गहरे रिश्तों में तब्दील हो गया। अनुराधा के परिवार का आरोप है कि अजय पांडेय ने अनुराधा को अपने प्रेम जाल में फंसाया और उससे शादी करने का पक्का वादा किया था। इसी वादे के भरोसे अनुराधा अपना सब कुछ उस पर लुटा बैठी थीं।
दूसरी युवती की एंट्री से शुरू हुआ विवाद और तनाव
सब कुछ ठीक चल रहा था कि तभी अनुराधा की जिंदगी में एक ऐसा मोड़ आया जिसने उनके रिश्तों की नींव हिला दी। बताया जा रहा है कि कुछ समय पहले अनुराधा की नजर अजय पांडेय के मोबाइल फोन पर पड़ी, जिसमें दवा कंपनी में ही कार्यरत एक अन्य युवती अंजलि सिंह के साथ अजय की लंबी बातचीत और कुछ तस्वीरें मौजूद थीं। अंजलि मूल रूप से झारखंड के बोकारो की रहने वाली है और वर्तमान में वाराणसी के महमूरगंज इलाके में एक किराए के मकान में रह रही थी। जब अनुराधा को यह पता चला कि अजय उसके साथ-साथ अंजलि के भी संपर्क में है और उससे भी नजदीतियां बढ़ा रहा है, तो दोनों के बीच कलह शुरू हो गई।
इस खुलासे के बाद अनुराधा और अजय के रिश्तों में खटास आ गई। परिजनों का गंभीर आरोप है कि जब अनुराधा ने अजय से विरोध जताया और शादी के वादे को निभाने की बात कही, तो अजय ने उससे किनारा करना शुरू कर दिया। इतना ही नहीं, बात बढ़ने पर उसे तरह-तरह की धमकियां भी दी जाने लगीं। कथित तौर पर अजय और अंजलि दोनों मिलकर अनुराधा पर मानसिक दबाव बना रहे थे, जिससे वह अंदर ही अंदर बुरी तरह टूट चुकी थीं।
व्हाट्सएप संदेश ने खोले सारे राज
घटना की रात अनुराधा अपनी ड्यूटी पूरी करने के बाद अपने कमरे में वापस लौटी थीं। उनके पास दो मोबाइल फोन थे। बुधवार की देर रात उनके 17 वर्षीय बेटे ने जब उनकी मां के दूसरे मोबाइल फोन को देखा, तो उसकी आंखें खुली की खुली रह गईं। उस फोन के व्हाट्सएप पर एक लंबा संदेश लिखा हुआ था, जिसे अनुराधा ने मौत से कुछ समय पहले टाइप किया था। उस संदेश में स्पष्ट रूप से अजय पांडेय के साथ उनके संबंधों, शादी के वादे, मुकरने की बात और अंजलि सिंह के साथ अजय के संपर्कों का कच्चा चिट्ठा दर्ज था।
संदेश में यह भी ब्योरा था कि कैसे अजय और अंजलि द्वारा उसे लगातार प्रताड़ित और प्रताड़ना भरे संदेश देकर डराया जा रहा था। बेटे ने जब यह खौफनाक दास्तान पढ़ी, तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। उसने तुरंत इसकी सूचना परिवार के अन्य सदस्यों और आसपास के लोगों को दी। फौरन पुलिस को इस अनहोनी की जानकारी दी गई। सूचना मिलते ही चितईपुर थाने की पुलिस दल-बल के साथ मौके पर पहुंची और अपार्टमेंट के कमरे का दरवाजा तोड़कर शव को अपने कब्जे में लिया। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर अपनी जांच का दायरा बढ़ा दिया।
आर्थिक लेनदेन और अन्य पहलुओं पर भी पुलिस की पैनी नजर
इस मामले में केवल प्रेम प्रसंग और आत्महत्या के लिए उकसाने का ही मामला नहीं है, बल्कि आर्थिक शोषण के भी गंभीर आरोप सामने आए हैं। मृतका के परिजनों ने पुलिस को दी गई शिकायत में यह भी दावा किया है कि अजय पांडेय ने अनुराधा के साथ बड़े पैमाने पर आर्थिक हेरफेर भी किया था। परिजनों का आरोप है कि पति धनंजय तिवारी की मौत के बाद विभाग से जो फंड या सहायता राशि मिली थी, उसमें भी अजय ने दखलंदाजी की थी। इसके अलावा अनुराधा के नाम पर लिए गए कुछ पर्सनल लोन या ऋण की रकम से जुड़े पैसों के लेनदेन में भी भारी अनियमितताएं बरती गईं।
परिजनों का कहना है कि अनुराधा बैंक से लिए गए ऋण की किस्तें अपनी सैलरी से जमा करती थी, लेकिन उस पैसे का इस्तेमाल कहां और कैसे हुआ, इसे लेकर भी विवाद चल रहा था। पुलिस इन सभी एंगल से अपनी तफ्तीश कर रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मोबाइल फोन से मिले व्हाट्सएप चैट्स, कॉल डिटेल्स रिकॉर्ड (CDR), आर्थिक लेनदेन के बैंक स्टेटमेंट और परिजनों के ब बयानों को आधार बनाकर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
दो मासूम बच्चों के सिर से उठा मां का साया
इस वीभत्स घटना का सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि इसके पीछे छूट गए दो मासूम बच्चे हैं। अनुराधा अपने पीछे 17 साल के बड़े बेटे और महज 6 साल की छोटी बेटी को छोड़ गई हैं। पिता का साया पहले ही उठ चुका था और अब मां के इस तरह चले जाने से दोनों बच्चों का भविष्य अधर में लटक गया है। रिश्तेदारों और पड़ोसियों का रो-रोकर बुरा हाल है। इस घटना ने एक बार फिर रिश्तों में भरोसे की कमी और मानसिक प्रताड़ना के गंभीर परिणामों पर सोचने को मजबूर कर दिया है। पुलिस ने दोनों आरोपियों (अजय पांडेय और अंजलि सिंह) को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है और आगे की विधिक कार्रवाई जारी है।