वाराणसी के नमो घाट पर 20 अक्टूबर को आयोजित होने वाले ‘विंग्स ओवर गंगा’ एयर डिस्प्ले में भारतीय वायुसेना अपनी ताकत, कौशल और आधुनिक क्षमताओं का भव्य प्रदर्शन करेगी। वायुसेना के 94 वर्षों की राष्ट्रसेवा के उपलक्ष್ಯ में हो रहे इस ऐतिहासिक आयोजन में कुल 100 विमान हिस्सा लेंगे, जो गंगा के ऊपर आसमान में विभिन्न हवाई करतबों से दर्शकों को रोमांचित करेंगे।
धर्म और आध्यात्म की नगरी काशी में होने वाले इस महाप्रदर्शन में देश के 12 अलग-अलग एयरबेस से विमानों का संचालन किया जाएगा। इसमें चेन्नई के निकट स्थित अरक्कोनम नौसैनिक एयरबेस भी शामिल है। इस पूरे एरियल डिस्प्ले में 52 लड़ाकू विमान, 15 परिवहन विमान, 32 हेलीकॉप्टर और एक विरासत विमान को शामिल किया गया है। वायुसेना के अनुसार, इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य देश के युवाओं को वायुसेना की ताकत से परिचित कराना और राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति उसके संकल्प को प्रदर्शित करना है।
अनोखी हवाई संरचनाएं और प्रमुख विमान
कार्यक्रम के दौरान 25 अलग-अलग हवाई संरचनाओं के माध्यम से विमानों की परिचालन क्षमता, सटीक उड़ान और आपसी तालमेल का प्रदर्शन किया जाएगा। इस एयर डिस्प्ले में राफेल, सुखोई-30 एमकेआई, मिराज-2000, मिग-29, जगुआर और स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान तेजस अपनी युद्धक क्षमता का लोहा मनवाएंगे। इसके अलावा परिवहन और निगरानी के लिए सी-295, सी-17 ग्लोबमास्टर, सी-130, एईडब्ल्यूएंडसी, आईएल-78, एएन-32 और पी-8आई जैसे विशेष विमान भी आसमान में उड़ान भरेंगे।
हेलीकॉप्टरों के बेड़े में एलसीएच प्रचंड, चिनूक, अपाचे, एएलएच, एमआई-17 वी5, चेतक और कामोव-31 अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन करेंगे। इसके साथ ही प्रसिद्ध सूर्यकिरण एरोबेटिक टीम, सारंग हेलीकॉप्टर डिस्प्ले टीम और हार्वर्ड विमान भी इस आयोजन के मुख्य आकर्षण होंगे। इस प्रदर्शन में भारतीय थलसेना के दो एएलएच हेलीकॉप्टर तथा भारतीय नौसेना का एक पी-8आई विमान और एक कामोव-31 हेलीकॉप्टर भी संयुक्त रूप से हिस्सा लेंगे।
काशी से लेकर प्रचंड तक धार्मिक और सांस्कृतिक नामों वाली संरचनाएं
एयर डिस्प्ले में विमानों की विभिन्न संरचनाओं को काशी, गंगा और देश की सांस्कृतिक विरासत से जुड़े नाम दिए गए हैं। ‘काशी’ संरचना में तीन किरण विमान वी-आकार में उड़ान भरते हुए भारतीय तिरंगे के रंगों से आसमान को सजाएंगे। ‘वरुणा’ संरचना में वायुसेना और सेना के एएलएच हेलीकॉप्टर स्लिदरिंग ऑपरेशन का प्रदर्शन करेंगे। ‘केदार’ में राफेल और ‘हनुमान’ संरचना में सुखोई-30 एमकेआई विमान कम ऊंचाई पर सटीक एरोबेटिक करतब दिखाएंगे।
‘ओमकार’ संरचना में तीन एमआई-17 वी5 हेलीकॉप्टर राष्ट्रीय ध्वज और वायुसेना का ध्वज लेकर उड़ान भरेंगे, जिसके बाद तीन चेतक हेलीकॉप्टरों की ‘गंगा’ संरचना के माध्यम से पुष्पवर्षा की जाएगी। ‘भागीरथी’ संरचना में स्वदेशी हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर प्रचंड और अपाचे हीरे के आकार में उड़ान भरेंगे। वहीं, ‘त्रिदेव’ संरचना के माध्यम से थलसेना, नौसेना और वायुसेना के हेलीकॉप्टर एक साथ उड़ान भरकर तीनों सेनाओं के बीच आपसी समन्वय और संयुक्त संचालन की मजबूत क्षमता का परिचय देंगे।
स्वदेशी तकनीक और तीनों सेनाओं का समन्वय
इस एयर शो में स्वदेशी रक्षा उपकरणों की ताकत भी प्रमुखता से दिखाई देगी। स्वदेशी तेजस लड़ाकू विमान ‘अस्सी’ नाम से कम ऊंचाई पर कलाबाजी दिखाएगा। वहीं, ‘प्रचंड’ संरचना में सुखोई-30 एमकेआई, राफेल, जगुआर, मिराज-2000, तेजस और मिग-29 जैसे छह लड़ाकू विमान तीर के आकार में उड़ान भरेंगे, जो ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वायुसेना की युद्धक क्षमता को समर्पित होगी।
‘दशाश्व’ संरचना में सी-17 ग्लोबमास्टर विमान नौ सूर्यकिरण हॉक विमानों के साथ उड़ान भरेगा। इसके बाद सूर्यकिरण एरोबेटिक टीम अपने रोमांचक हवाई करतबों से कार्यक्रम का समापन करेगी। गंगा के तट पर होने वाला यह त्रि-सेवा समन्वय वाला आयोजन ‘अचूक, अभेद्य और सटीक’ के संदेश के साथ भारतीय रक्षा बलों की आधुनिक तकनीक और अटूट सुरक्षा प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।