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लालरी छठ पर रामकुंड में उमड़ी भीड़, महिलाओं ने रखा निर्जला व्रत

लालरी छठ पर रामकुंड में उमड़ी भीड़, महिलाओं ने रखा निर्जला व्रत

संतान की प्राप्ति, उनकी दीर्घायु और परिवार की सुख-समृद्धि की मंगलकामना को समर्पित लोक आस्था के महापर्व 'लालरी छठ' पर इस वर्ष 2026 में अभूतपूर्व उत्साह देखने को मिला। पावन नगरी वाराणसी के ऐतिहासिक रामकुंड स्थित रामेश्वर महादेव मंदिर परिसर में बुधवार को सुबह से ही सुहागिन महिलाओं का तांता लगा रहा। कठोर नियमों और अगाध आस्था के साथ महिलाओं ने निर्जला व्रत रखकर विधि-विधान से माता की आराधना की। मंदिर परिसर में गूंजते माता के जयकारों और भक्ति गीतों ने पूरे वातावरण को पूरी तरह से अध्यात्ममय बना दिया, जिससे हर आने वाला व्यक्ति भक्ति रस से सराबोर नजर आया।

सुबह से ही रामकुंड क्षेत्र में दिखा अनूठा धार्मिक माहौल

लालरी छठ के इस पवित्र अवसर पर रामकुंड और उसके आसपास के पूरे क्षेत्र में अलौकिक दृश्य देखने को मिला। पारंपरिक परिधानों में सजी-धजी महिलाएं हाथ में पूजन सामग्री की थाल लिए सुबह तड़के से ही मंदिर की ओर बढ़ती नजर आईं। सुदूर अंचलों से आईं व्रती महिलाओं ने रामकुंड की पावन पवित्रता के बीच सामूहिक रूप से पूजा-अर्चना की। सनातन संस्कृति में इस व्रत का अत्यंत विशिष्ट महत्व माना गया है। ऐसी गहरी मान्यता है कि जो माताएं पूरी निष्ठा से यह व्रत रखती हैं, उनकी संतान को अष्ट चिरंजीवी जैसा आरोग्य, दीर्घायु और जीवन में अटूट सफलता का वरदान प्राप्त होता है।

छह प्रकार के फल और पारंपरिक सामग्रियों का भोग

पूजा-पाठ के इस अनुष्ठान में पारंपरिक अनुष्ठानों का पूरी बारीकी से पालन किया गया। व्रती महिलाओं ने माता को विशेष रूप से छह प्रकार के मौसमी फल, महुआ, शुद्ध दही, खोआ, और अक्षत (चावल) समेत तमाम पारंपरिक सामग्रियां अर्पित कीं। मिट्टी के दीपकों को प्रज्ज्वलित कर महिलाओं ने अपने परिवार की सुख-शांति और अपनी संतानों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। इस दौरान एक बेहद सुंदर सामाजिक और सांस्कृतिक समन्वय भी देखने को मिला, जहां महिलाओं ने आपस में अपनी पूजन सामग्री साझा की और एक-दूसरे के मंगल की कामना करते हुए माता की सामूहिक आराधना की।

छह कथाओं का श्रवण और बुजुर्गों का मिला सानिध्य

लालरी छठ की पूजा का एक मुख्य आकर्षण इससे जुड़ी कथाओं का श्रवण करना रहा। महिलाओं ने सामूहिक रूप से बैठकर माता ललरी छठ से जुड़ी छह पौराणिक कथाओं को सुना। इस दौरान पीढ़ीगत अंतर को पाटने का एक अनूठा माध्यम भी दिखा। परिवार की बुजुर्ग महिलाओं और वरिष्ठ माताओं ने नई पीढ़ी की व्रती महिलाओं को इस व्रत से जुड़ी बारीक मान्यताओं, धार्मिक परंपराओं और पूजा की सही विधियों से अवगत कराया। बुजुर्गों के अनुभव और युवा पीढ़ी के उत्साह के इस संगम ने इस पर्व की गरिमा को और अधिक बढ़ा दिया।

मंदिर परिसर में गूंजे माता के जयकारे

कथा समाप्त होने के बाद मंदिर परिसर में भव्य सामूहिक आरती का आयोजन किया गया। इस आरती में सैकड़ों की संख्या में उपस्थित महिलाओं ने एकस्वर में भाग लिया। मंदिर परिसर में गूंजते माता के जयकारों और पारंपरिक भक्ति गीतों से पूरा रामेश्वर महादेव मंदिर गूंज उठा। महिलाओं ने माता की प्रतिमा के समक्ष अपनी भावुक मनोकामनाएं रखीं और अपने परिवार की रक्षा का आशीर्वाद मांगा। व्रती महिलाओं का कहना था कि ललरी छठ के प्रति उनकी अटूट और गहरी आस्था है, जो पीढ़ियों से चली आ रही है और वे हर वर्ष इस परंपरा को पूरी निष्ठा के साथ निभाती हैं।

लोक आस्था और परंपरा का अद्भुत संगम

इस वर्ष का लालरी छठ आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह भारतीय संस्कृति, लोक आस्था और सामाजिक सौहार्द का एक जीवंत दस्तावेज बन गया। मंदिर परिसर में जिस प्रकार से महिलाओं ने एकजुट होकर व्रत की सभी परंपराओं का पालन किया, वह आधुनिक दौर में हमारी सांस्कृतिक जड़ों की मजबूती को दर्शाता है। पूजन, कथा श्रवण, और महाआरती के संपन्न होने के बाद महिलाओं ने एक-दूसरे का मुंह मीठा कराया और बड़ों का आशीर्वाद प्राप्त किया। इस पूरे भव्य आयोजन के दौरान वाराणसी के रामकुंड और उसके आसपास के क्षेत्रों में श्रद्धा, भक्ति और उमंग का एक ऐसा माहौल बना रहा, जो लंबे समय तक लोगों के दिलों में जीवित रहेगा।

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निवेदिता ठाकुर

निवेदिता ठाकुर

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निवेदिता ठाकुर जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती है...

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