चिकित्सा जगत की नई करवटों और आधुनिक उपचार पद्धतियों के महाकुंभ के रूप में पहचानी जाने वाली प्रतिष्ठित कांफ्रेंस 'यूपी एपिकॉन-2026' का शानदार आगाज हो चुका है। धर्म और आध्यात्म की नगरी काशी (वाराणसी) इन दिनों देश भर के नामचीन चिकित्सकों, मेडिकल रिसर्चर्स और चिकित्सा शिक्षाविदों का केंद्र बनी हुई है। अवसर है 43वें वार्षिक उत्तर प्रदेश अध्याय एसोसिएशन ऑफ फिजिशियंस ऑफ इंडिया सम्मेलन का, जहां देश के कोने-कोने से आए चिकित्सा विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं के भविष्य को नया आकार देने के लिए मंथन कर रहे हैं।
ऐतिहासिक नगरी काशी में चिकित्सा विज्ञान का महाकुंभ
आज की तारीख यानी 25 सितंबर 2026 को पूर्व सम्मेलन वैज्ञानिक संगोष्ठी के साथ इस बड़े आयोजन की औपचारिक शुरुआत हो चुकी है, जबकि मुख्य दो दिवसीय महासम्मेलन 26 और 27 सितंबर को रोहनिया स्थित होटल लेमन ट्री और गोकुल धाम बैंक्वेट हॉल में पूरी भव्यता के साथ संपन्न होगा। इस आयोजन को लेकर चिकित्सा जगत में अभूतपूर्व उत्साह देखा जा रहा है। उत्तर प्रदेश के अलावा देश की आर्थिक राजधानी मुंबई, देश की राजधानी दिल्ली, कोलकाता, उत्तराखंड, बिहार और अन्य राज्यों से भी सैकड़ों की संख्या में सीनियर डॉक्टर्स, मेडिकल प्रोफेसर और युवा चिकित्सक इस ऐतिहासिक आयोजन का हिस्सा बनने के लिए काशी पहुंच चुके हैं।
इस वर्ष की मुख्य थीम: 'प्रिसिजन, प्रिवेंशन एंड प्रोग्रेस इन इंटरनल मेडिसिन'
हर साल इस सम्मेलन की एक विशेष थीम तय की जाती है, जो आने वाले समय में चिकित्सा की दिशा तय करती है। इस बार यूपी एपिकॉन-2026 की थीम बेहद सामयिक और दूरदर्शी रखी गई है— ‘प्रिसिजन, प्रिवेंशन एंड प्रोग्रेस इन इंटरनल मेडिसिन’ (Internal Medicine में सटीकता, रोकथाम और प्रगति)। आज के समय में जब नई-नई बीमारियां और जटिल स्वास्थ्य चुनौतियां सामने आ रही हैं, तब यह थीम इस बात पर जोर देती है कि कैसे सटीक डायग्नोसिस (सटीक चिकित्सा), समय से पहले बीमारी की पहचान और उसकी रोकथाम पर काम किया जाए।
विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक जांच तकनीकों और प्रमाण आधारित चिकित्सा (Evidence-based medicine) के जरिए मरीजों के इलाज के तरीकों में क्रांतिकारी बदलाव आ रहे हैं। इस सम्मेलन के वैज्ञानिक सत्रों में इन्हीं तमाम मुद्दों पर गहन और गंभीर चर्चा की जा रही है, ताकि देश के दूर-दराज के इलाकों में बैठे मरीजों तक भी आधुनिक चिकित्सा का लाभ पहुंचाया जा सके।
दिग्गज विशेषज्ञों का अनूठा समागम और ज्ञान का आदान-प्रदान
आयोजकों से मिली जानकारी के मुताबिक, इस महासम्मेलन का मुख्य उद्देश्य चिकित्सकों के बीच ज्ञान का आदान-प्रदान (Knowledge Exchange) और निरंतर चिकित्सा शिक्षा (Continuing Medical Education) को बढ़ावा देना है। जब देश के अलग-अलग कोनों से बेहतरीन दिमाग एक मंच पर आते हैं, तो जटिल से जटिल बीमारियों के इलाज के नए रास्ते निकलते हैं।
वैज्ञानिक सत्रों के दौरान निम्नलिखित प्रमुख विषयों पर विशेष रूप से विचार-विमर्श किया जा रहा है:
- आंतरिक चिकित्सा (Internal Medicine) के क्षेत्र में उभरती हुई नई तकनीकें।
- जटिल और दुर्लभ रोगों का समय रहते सटीक निदान (Diagnosis)।
- रोगी देखभाल (Patient Care) की गुणवत्ता को और अधिक उन्नत बनाना।
- आधुनिक जांच उपकरणों और पैथोलॉजिकल एडवांसमेंट का क्लिनिकल प्रैक्टिस में उपयोग।
बीएचयू कुलपति करेंगे भव्य उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता
इस सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को बेहद खास बनाया गया है। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के प्रतिष्ठित कुलपति प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी इस गरिमामयी समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत कर रहे हैं। वहीं, एसोसिएशन ऑफ फिजिशियंस ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं बीएचयू चिकित्सा विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रो. जी. नर्सिमुलु विशिष्ट अतिथि के तौर पर इस आयोजन की शोभा बढ़ा रहे हैं।
समारोह में एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष प्रो. ज्योतिर्मय पाल, उत्तर प्रदेश अध्याय के चेयरमैन डॉ. संजय टंडन और निर्वाचित चेयरमैन डॉ. रिचा गिरी सहित कई दिग्गज पदाधिकारी अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुके हैं। बीएचयू चिकित्सा विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रो. एसएन सांखवार भी इस आयोजन के प्रमुख संरक्षकों और अतिथियों में शामिल हैं, जिनकी देखरेख में यह कार्यक्रम सफलता के नए आयाम छू रहा है।
चिकित्सा क्षेत्र के दिग्गजों को मिलेगा पद्म सम्मान
किसी भी बड़े सम्मेलन की सार्थकता इस बात में होती है कि वह अपने उन पुरोधाओं और दिग्गजों को सम्मानित करे, जिन्होंने अपना पूरा जीवन चिकित्सा और समाज की सेवा में समर्पित कर दिया हो। यूपी एपिकॉन-2026 के उद्घाटन समारोह में चिकित्सा और चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में अतुलनीय और ऐतिहासिक योगदान देने के लिए दो महान विभूतियों—पद्मश्री प्रो. कमलाकर त्रिपाठी और पद्मश्री प्रो. श्याम सुंदर—को विशेष रूप से सम्मानित किया जा रहा है।
इन दोनों ही वरिष्ठ चिकित्सकों ने न केवल अनगिनत मरीजों का जीवन बचाया है, बल्कि देश को कई बेहतरीन डॉक्टर और रिसर्चर भी दिए हैं। उनका यह सम्मान नई पीढ़ी के युवा चिकित्सकों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा।
मजबूत नेतृत्व और प्रशासनिक टीम
इतने बड़े स्तर के राष्ट्रीय सम्मेलन को सफलता के मुकाम तक पहुँचाने के लिए एक मजबूत और अनुभवी टीम ने महीनों पहले से तैयारी शुरू कर दी थी। यूपी एपिकॉन-2026 का यह पूरा आयोजन डॉ. केके गुप्ता की कुशल अध्यक्षता में संचालित हो रहा है। इसके अलावा:
- आयोजन सचिव (Organizing Secretary): प्रो. एलपी मीणा
- सह-आयोजन अध्यक्ष (Co-Organizing Chairperson): प्रो. जया चक्रवर्ती
- कोषाध्यक्ष (Treasurer): डॉ. अरुण कुमार सिंह
इन सभी अनुभवी अधिकारियों की देखरेख में सम्मेलन की व्यवस्थाएं बेहद चाक-चौबंद रखी गई हैं, जिससे बाहर से आने वाले मेहमानों को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
युवा चिकित्सकों के लिए सीखने का सुनहरा अवसर
यह सम्मेलन केवल वरिष्ठ डॉक्टरों के बीच चर्चा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश भर से आए युवा रेजिडेंट डॉक्टरों और मेडिकल छात्रों के लिए भी किसी वरदान से कम नहीं है। युवा चिकित्सक देश के शीर्ष विशेषज्ञों के लाइव अनुभवों से रूबरू हो रहे हैं। वे समझ पा रहे हैं कि कैसे आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों को अपने दैनिक क्लीनिकल अभ्यास में उतारा जाए।
बदलते दौर में जब बीमारियां और उनके वैरिएंट्स तेजी से बदल रहे हैं, तब इस तरह के मंच डॉक्टरों को वैचारिक रूप से मजबूत बनाते हैं। काशी की पावन धरती से उठा यह चिकित्सा ज्ञान का संदेश आने वाले दिनों में देश की स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ और प्रभावी बनाने में मील का पत्थर साबित होगा।