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वाराणसी में बाढ़ का तांडव: पीएम मोदी ने खुद संभाली कमान, डीएम और मेयर से लिया एक-एक अपडेट

वाराणसी में बाढ़ का तांडव: पीएम मोदी ने खुद संभाली कमान, डीएम और मेयर से लिया एक-एक अपडेट

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी में गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर और बाढ़ के कारण उत्पन्न हुई गंभीर स्थितियों पर सीधी नजर बनाए रखी है। देश के विभिन्न विकास कार्यों और राष्ट्रीय मुद्दों के बीच, प्रधानमंत्री ने अपनी माटी और अपने मतदाताओं की सुधि लेते हुए स्थानीय प्रशासन से पल-पल की रिपोर्ट तलब की है। सितंबर 2026 के इन शुरुआती दिनों में उत्तर भारत की प्रमुख नदियों में आए उफान ने कई इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया है, और काशी भी इससे अछूती नहीं है।

वाराणसी में गहराता संकट: गंगा का बढ़ता जलस्तर

काशी के घाटों का आपस में संपर्क टूटना शुरू हो गया है और प्रसिद्ध मणिकर्णिका तथा हरिश्चंद्र घाट पर भी बाढ़ का पानी पहुंचने से अंतिम संस्कार की पारंपरिक व्यवस्थाओं में भारी बदलाव करना पड़ा है। तटीय इलाकों के निचले घरों में पानी घुसने के बाद जिला प्रशासन ने राहत और बचाव कार्यों को तेज कर दिया है। ऐसे वक्त में जब आम जनता और व्यापारी वर्ग दोनों ही इस प्राकृतिक आपदा से जूझ रहे हैं, देश के सर्वोच्च पद पर बैठे जनप्रतिनिधि यानी प्रधानमंत्री का खुद फोन पर हालचाल लेना लोगों के लिए एक बड़ा संबल साबित हो रहा है।

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाराणसी के जिला मजिस्ट्रेट (DM) और शहर के मेयर से दूरभाष पर लंबी बातचीत की। इस दौरान उन्होंने प्रशासन द्वारा उठाए जा रहे कदमों की एक-एक बारीकी से समीक्षा की। बातचीत का मुख्य केंद्र यह सुनिश्चित करना था कि बाढ़ पीड़ितों तक समय पर राहत सामग्री, दवाइयां और सुरक्षित ठिकाने पहुंच रहे हैं या नहीं।

प्रशासनिक तैयारी और राहत शिविरों का जायजा

प्रधानमंत्री कार्यालय से सीधे संवाद के बाद स्थानीय प्रशासन और भी अधिक मुस्तैद नजर आ रहा है। डीएम और मेयर ने पीएम मोदी को आश्वस्त किया है कि स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में है और सरकार के सभी विभाग आपसी तालमेल के साथ काम कर रहे हैं।

  • राहत शिविरों की स्थापना: विस्थापित हुए परिवारों के लिए सुरक्षित स्थानों पर कम्युनिटी शेल्टर और फूड कैंप बनाए गए हैं।
  • медицинская помощь (स्वास्थ्य सेवाएं): बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में मेडिकल टीमों को तैनात किया गया है ताकि जलजनित बीमारियों (Water-borne diseases) से समय रहते निपटा जा सके।
  • नावों और गोताखोरों की तैनाती: एनडीआरएफ (NDRF) और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमों को संवेदनशील इलाकों में लगातार गश्त करने के निर्देश दिए गए हैं।

प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से यह निर्देश दिए हैं कि पशुधन की सुरक्षा पर भी पूरा ध्यान दिया जाए, क्योंकि ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में बाढ़ आने पर मवेशियों के चारे और सुरक्षा की सबसे बड़ी समस्या खड़ी हो जाती है।

काशी के नागरिकों में जगा विश्वास

आपदा की इस घड़ी में देश के प्रधानमंत्री का अपनी जनता के प्रति यह सरोकार स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। सोशल मीडिया से लेकर चाय की दुकानों तक, काशी के लोग इस बात से आश्वस्त हैं कि संकट कितना भी बड़ा क्यों न हो, केंद्र और स्थानीय प्रशासन मिलकर इससे पूरी मजबूती से निपट लेंगे।

प्रशासन ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और प्रशासन द्वारा जारी की गई एडवाइजरी का पूरी तरह पालन करें। जलस्तर में उतार-चढ़ाव पर केंद्रीय जल आयोग (CWC) की टीम लगातार नजर बनाए हुए है और आने वाले 24 से 48 घंटों में मौसम के मिजाज को देखते हुए आगे के कदम उठाए जाएंगे।

आगे की राह और एहतियाती कदम

विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून के इस अंतिम चरण में पहाड़ी इलाकों में हो रही छिटपुट बारिश मैदानी इलाकों की नदियों पर भारी पड़ रही है। हालांकि, वाराणसी प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए उनके पास पर्याप्त संसाधन और खाद्यान्न उपलब्ध है। प्रधानमंत्री कार्यालय भी लगातार स्थिति पर पैनी नजर रखे हुए है और आवश्यकतानुसार अतिरिक्त सहायता भेजने के लिए तैयार है।

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रोशनी गुप्ता

रोशनी गुप्ता

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रोशनी गुप्ता जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती हैं।...

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