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सतुआ बाबा का जमीन कब्जे के आरोपों पर पलटवार, दिए प्रमाण

सतुआ बाबा का जमीन कब्जे के आरोपों पर पलटवार, दिए प्रमाण

वाराणसी की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक नगरी इन दिनों एक बड़े विवाद के केंद्र में आ गई है। काशी के प्रतिष्ठित संतों में शुमार सतुआ बाबा और कांग्रेस पार्टी के बीच चल रहा तकरार अब सोशल मीडिया से होते हुए आम चर्चा का मुख्य विषय बन गया है। जमीन कब्जे के गंभीर आरोपों से घिरे सतुआ बाबा ने अब खुलकर मोर्चा संभाल लिया है। उन्होंने न केवल अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को बेबुनियाद करार दिया है, बल्कि विरोधी पक्षों को दस्तावेजों और साक्ष्यों के साथ सामने आने की खुली चुनौती भी दे दी है।

सोशल मीडिया की एक तस्वीर से भड़का विवाद

इस पूरे विवाद की शुरुआत सोशल मीडिया पर वायरल हुई एक तस्वीर और उसके साथ किए गए दावों से हुई। तस्वीर सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई और कांग्रेस पार्टी के नेताओं ने सतुआ बाबा पर जमीन पर अवैध कब्जे के गंभीर आरोप मढ़ दिए। देखते ही देखते यह मामला तूल पकड़ गया और दोनों पक्षों की ओर से बयानबाजी का दौर शुरू हो गया। स्थानीय राजनीति में इस घटना ने तहलका मचा दिया है, क्योंकि मामला एक धार्मिक पीठ और पीठाधीश्वर से जुड़ा हुआ है।

आरोप-प्रत्यारोप के इस दौर में जब माहौल पूरी तरह गरमा गया, तब सतुआ बाबा ने सामने आकर चुप्पी तोड़ी और तमाम चर्चाओं पर विराम लगाने की कोशिश की। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि लगाए जा रहे आरोप पूरी तरह से निराधार और उनकी छवि को धूमिल करने की एक सोची-समझी साजिश हैं।

'बाप' से लेकर जमीन कब्जे तक: सतुआ बाबा का तीखा पलटवार

आलोचकों और विरोधियों के बयानों पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए सतुआ बाबा ने कहा कि केवल एक व्यक्ति विशेष को निशाना नहीं बनाया जा रहा है, बल्कि इसके पीछे एक सुनियोजित रणनीति काम कर रही है। उन्होंने कहा कि न केवल उन पर बल्कि उनके साथ खड़े होने वाले और सच का साथ देने वाले अन्य लोगों से भी इस मामले में जवाब तलब किया गया है।

सतुआ बाबा ने अपने ऊपर लगे जमीन कब्जे के दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा, 'अगर किसी के पास मेरे खिलाफ या मेरे आश्रम से जुड़ी किसी भी संपत्ति के अवैध कब्जे का कोई ठोस प्रमाण है, तो वह उसे सार्वजनिक करे। हम हर जांच का सामना करने के लिए तैयार हैं।' उन्होंने चुनौती दी कि हवा में तीर चलाने के बजाय लोग तथ्यों और दस्तावेजों के साथ आएं, दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।

350 वर्षों पुरानी संत परंपरा का केंद्र है काशी स्थित आश्रम

अपने ऊपर उठ रहे सवालों के बीच सतुआ बाबा ने काशी स्थित अपने ऐतिहासिक आश्रम की गरिमा और उसकी लंबी परंपरा का भी विशेष उल्लेख किया। उन्होंने मीडिया और जनता को याद दिलाते हुए कहा कि यह आश्रम कोई कल का बना हुआ ठिकाना नहीं है, बल्कि पिछले करीब 350 वर्षों से यह स्थान सनातन धर्म और संत परंपरा का एक प्रमुख केंद्र रहा है।

'यह भूमि और यह आश्रम पीढ़ियों से संतों की तपस्थली और लोक कल्याण का माध्यम रहा है। इस पर इस तरह के अनर्गल आरोप लगाना सीधे तौर पर हमारी सनातन परंपरा और संतों का अपमान है।' - सतुआ बाबा

उन्होंने यह भी जोड़ा कि इतने लंबे इतिहास में कभी भी इस संस्था या इससे जुड़े संतों पर इस तरह के दाग नहीं लगे, और आज अचानक इस तरह के आरोप लगाना राजनीतिक कुंठा को दर्शाता है।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष से फोन पर बातचीत का दावा

इस पूरे घटनाक्रम को शांत करने और अपनी बात सीधे शीर्ष स्तर तक पहुंचाने के लिए सतुआ बाबा ने कदम उठाया है। उन्होंने जानकारी दी कि उन्होंने इस पूरे मामले के संदर्भ में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष से फोन पर सीधा संपर्क किया है। बातचीत के दौरान उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष को घटना की वास्तविक स्थिति से अवगत कराया है और पूरे विवाद के पीछे की सच्चाई बताई है।

बाबा के अनुसार, उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व से यह भी अपेक्षा की है कि वे बिना पूरी सच्चाई जाने अपने स्थानीय नेताओं या कार्यकर्ताओं के बयानों के आधार पर किसी नतीजे पर न पहुंचें। राजनीति और धर्म के इस टकराव में अब देखना यह होगा कि कांग्रेस पार्टी की ओर से इस पर क्या आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आती है और क्या यह मामला यहीं थमता है या और आगे बढ़ता है।

जनता और भक्तों में चर्चा का विषय

वाराणसी के आम नागरिकों और श्रद्धालुओं के बीच इस विवाद को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। एक तरफ जहां संत समाज अपने मार्गदर्शक के समर्थन में खड़ा नजर आ रहा है, वहीं दूसरी तरफ राजनीतिक दल इस मुद्दे भुनाने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं। बहरहाल, सतुआ बाबा की इस खुली चुनौती के बाद अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या विरोधी पक्ष कोई ठोस प्रमाण पेश कर पाता है या फिर यह विवाद सिर्फ बयानों की हद तक ही सिमट कर रह जाता है।

आने वाले दिनों में इस मामले में कुछ नए खुलासे होने की भी उम्मीद जताई जा रही है, क्योंकि दोनों पक्ष अपनी-अपनी दलीलों पर अड़े हुए हैं। सच्चाई क्या है, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा, लेकिन इस हाई-प्रोफाइल विवाद ने उत्तर प्रदेश की राजनीति और धार्मिक गलियारों में एक बार फिर से गर्मी पैदा कर दी है।

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निवेदिता ठाकुर

निवेदिता ठाकुर

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निवेदिता ठाकुर जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती है...

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