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वाराणसी में बैंकिंग सेक्टर पर बड़ा एक्शन, सीडी रेशियो 80 फीसदी करने का टारगेट

वाराणसी में बैंकिंग सेक्टर पर बड़ा एक्शन, सीडी रेशियो 80 फीसदी करने का टारगेट

वाराणसी के वित्तीय परिदृश्य में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। स्थानीय प्रशासन ने बैंकिंग सेक्टर को लेकर अपनी कमर कस ली है और वित्तीय संस्थाओं को कड़े निर्देश जारी किए गए हैं। ज़िले की आर्थिक रफ्तार को नई गति देने के लिए अब बैंकों का ऋण जमानुपात (सीडी रेशियो) बढ़ाने पर विशेष ज़ोर दिया जा रहा है, ताकि अधिक से अधिक जरूरतमंदों और उद्यमियों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंच सके।

हाल ही में कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित जिला स्तरीय सलाहकार एवं समन्वय समिति की महत्वपूर्ण बैठक में इस बाबत स्पष्ट निर्देश दिए गए। इस उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता जिला प्रशासन के मुखिया जिलाधिकारी सत्येन्द्र कुमार ने की। बैठक का मुख्य उद्देश्य केंद्र और प्रदेश सरकार द्वारा चलाई जा रही प्रायोजित योजनाओं की प्रगति की गहराई से समीक्षा करना और बैंकिंग गतिविधियों में तेजी लाना था।

सीडी रेशियो को 80 फीसदी तक ले जाने का लक्ष्य

समीक्षा बैठक के दौरान ज़िले के वर्तमान ऋण जमानुपात यानी सीडी रेशियो (CD Ratio) पर विस्तार से चर्चा हुई। वर्तमान में यह आंकड़ा 58.88 प्रतिशत दर्ज किया गया है, जिसे बढ़ाकर सीधे 80 प्रतिशत तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

जिलाधिकारी ने बैंकवार और योजनावार प्रगति रिपोर्ट की एक-एक बिंदु पर समीक्षा की। जिन बैंकों का ऋण वितरण का प्रदर्शन सुस्त पाया गया और जो लक्ष्य के मुकाबले काफी पीछे चल रहे थे, उनके प्रतिनिधियों को कड़ी चेतावनी देते हुए अपनी कार्यप्रणाली में सुधार लाने के निर्देश दिए गए। प्रशासन का मानना है कि जब तक बैंक आगे बढ़कर ऋण वितरण नहीं करेंगे, तब तक स्थानीय स्तर पर आर्थिक विकास को गति नहीं मिल सकती है।

कृषि और पशुपालन को प्राथमिकता

अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले कृषि और पशुपालन क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए प्रशासन ने विशेष रणनीति बनाई है। बैठक में स्पष्ट रूप से निर्देश दिए गए कि कृषि और पशुपालन से जुड़ी योजनाओं के तहत ऋण वितरण में किसी भी प्रकार की हीलाहवाली बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इन क्षेत्रों से जुड़े आवेदनों का प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण करने को कहा गया है।

इसके साथ ही, स्वरोजगार, नई उद्यमिता और वित्तीय समावेशन से जुड़ी तमाम योजनाओं को ज़मीन पर प्रभावी ढंग से लागू करने पर बल दिया गया। अधिकारियों का कहना है कि युवाओं को रोजगार देने के लिए उद्यमिता ऋण बेहद जरूरी हैं, इसलिए इसमें बैंकों का सकारात्मक सहयोग अनिवार्य है।

अधिक गैप वाले क्षेत्रों में लगेंगे विशेष केसीसी कैंप

किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) योजना को लेकर प्रशासन काफी गंभीर नजर आ रहा है। ज़िले में केसीसी की जमीनी हकीकत जानने के लिए अग्रणी जिला प्रबंधक (एलडीएम) को ग्रामवार आंकड़े उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।

  • ग्रामवार मैपिंग: उन क्षेत्रों की पहचान की जाएगी जहां केसीसी आच्छादन का गैप सबसे ज्यादा है।
  • विशेष कैंप का आयोजन: गैپ वाले ग्रामीण इलाकों में विशेष कैंप लगाकर ऑन-द-स्पॉट किसानों के केसीसी बनाए जाएंगे।
  • कृषि विभाग का सहयोग: इस पूरी प्रक्रिया को सुचारू रूप से चलाने के लिए कृषि विभाग के साथ तालमेल बिठाकर आवश्यक डेटा जुटाने के निर्देश दिए गए हैं।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को और मजबूत करने के लिए स्वयं सहायता समूहों (SHG) से जुड़ी महिलाओं के बैंक खातों की ई-केवाईसी प्रक्रिया को भी तेज करने को कहा गया है। इसके लिए रोस्टर तैयार कर विशेष कैंप आयोजित किए जाएंगे। इसके अलावा, ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आर-सेटी) के निदेशक को एक बड़े स्तर पर कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि अधिक से अधिक युवाओं को स्किल ट्रेनिंग मिल सके।

प्रमुख सरकारी योजनाओं की हुई समीक्षा

बैठक में केवल एक या दो योजनाओं तक सीमित न रहकर सरकार की तमाम महत्वकांक्षी योजनाओं की प्रगति की फाइलें खंगाली गईं। चर्चा के केंद्र में निम्नलिखित योजनाएं प्रमुख रूप से रहीं:

  • स्वयं सहायता समूह (SHG) गतिविधियां
  • पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना
  • मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान
  • प्रधानमंत्री मुद्रा योजना
  • सीएम युवा विकास अभियान
  • पीएम स्वनिधि योजना (स्ट्रीट वेंडर के लिए)
  • राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM)

प्रशासन ने साफ कर दिया है कि योजनाओं के लाभार्थियों का चयन पूरी तरह से पारदर्शी होना चाहिए। इसमें किसी भी तरह की सिफारिश या भ्रष्टाचार की गुंजाइश नहीं है। जो भी पात्र व्यक्ति इन योजनाओं के दायरे में आते हैं, उन्हें बिना किसी परेशानी के लाभ मिलना चाहिए। स्वीकृत हो चुके आवेदनों का त्वरित निस्तारण करने के निर्देश भी बैंकों को दिए गए हैं।

प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता: जनकल्याणकारी योजनाएं

बैठक के अंत में जिलाधिकारी ने अधिकारियों और बैंक प्रबंधकों को संबोधित करते हुए कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का वास्तविक लाभ अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचाना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए सभी विभागों और बैंकों को आपसी समन्वय (Coordination) के साथ काम करना होगा।

उन्होंने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी कि योजनाओं के क्रियान्वयन में यदि किसी भी स्तर पर प्रशासनिक शिथिलता या बैंक स्तर पर लापरवाही बरती गई, तो संबंधित के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। बैठक में अग्रणी जिला प्रबंधक के साथ-साथ जनपद के तमाम जिला समन्वयक और चिन्हित प्रमुख बैंक शाखाओं के प्रबंधक मौजूद रहे, जिन्होंने प्रशासन के इन दिशा-निर्देशों को पूरी गंभीरता से लेते हुए समय सीमा के भीतर लक्ष्यों को पूरा करने का भरोसा दिलाया है।

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निवेदिता ठाकुर

निवेदिता ठाकुर

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निवेदिता ठाकुर जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती है...

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