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वाराणसी के भेलूपुर में सीवर ओवरफ्लो से राहत, पंपों की मरम्मत के बाद चमके रास्ते

वाराणसी के भेलूपुर में सीवर ओवरफ्लो से राहत, पंपों की मरम्मत के बाद चमके रास्ते

वाराणसी के ऐतिहासिक और घनी आबादी वाले भेलूपुर जोन के अंतर्गत आने वाले शिवाला वार्ड से स्थानीय नागरिकों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आ रही है। रत्नाकर पार्क के आसपास और उससे जुड़ी तंग गलियों में पिछले कुछ समय से लगातार बनी सीवर ओवरफ्लो की गंभीर समस्या से आखिरकार लोगों को निजात मिल गई है। प्रशासनिक स्तर पर की गई त्वरित कार्रवाई और तकनीकी अमले की तत्परता के चलते अब इन इलाकों की सड़कों पर गंदा पानी नहीं बह रहा है, जिससे स्थानीय निवासियों, दुकानदारों और यहां से गुजरने वाले राहगीरों ने राहत की सांस ली है।

नगर आयुक्त के सख्त निर्देशों का असर

प्राप्त जानकारी के अनुसार, क्षेत्र में सीवर उफनाने की लगातार मिल रही शिकायतों को प्रशासन ने बेहद गंभीरता से लिया था। नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने इस मामले में सीधे तौर पर हस्तक्षेप करते हुए जलकल विभाग के तमाम वरिष्ठ अभियंताओं और संबंधित अधिकारियों को तुरंत मैदानी निरीक्षण करने के निर्देश दिए थे। नगर आयुक्त के इन स्पष्ट और सख्त निर्देशों के बाद जलकल विभाग की तकनीकी टीम हरकत में आई और बिना किसी देरी के मौके पर पहुंचकर हालात का जायजा लेना शुरू किया।

अधिकारियों ने न केवल प्रभावित गलियों का पैदल दौरा किया, बल्कि सीवर ओवरफ्लो की असल जड़ तक पहुंचने के लिए मुख्य सीवेज पंपिंग स्टेशनों की कार्यप्रणाली की भी गहराई से जांच-पड़ताल की। इस दौरान ओल्ड ट्रंक सीवर लाइन की मौजूदा स्थिति का भी बारीकी से मुआयना किया गया ताकि भविष्य में इस तरह की दिक्कतों से स्थाई रूप से बचा जा सके।

कोनिया मेन सीवेज पंपिंग स्टेशन की हकीकत आई सामने

निरीक्षण के दौरान जलकल विभाग की टीम ने कोनिया मेन सीवेज पंपिंग स्टेशन का भी औचक जायजा लिया, जो इस पूरे इलाके की सीवेज व्यवस्था को संभालने में रीढ़ की हड्डी माना जाता है। स्टेशन की तकनीकी स्थिति की जांच करने पर कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए, जो इस भयंकर ओवरफ्लो की असल वजह बने हुए थे।

जांच में पता चला कि इस महत्वपूर्ण पंपिंग स्टेशन पर:

  • 100 एमएलडी क्षमता वाले चार नए सबमर्सिबल पंप: इनमें से केवल दो पंप ही चालू हालत में थे, जबकि शेष दो पंप तकनीकी खराबी के चलते पूरी तरह बंद पड़े हुए थे।
  • 33 एमएलडी क्षमता वाले तीन पुराने पंप: इनकी स्थिति और भी ज्यादा चिंताजनक थी, क्योंकि इनमें से मात्र एक पंप ही संचालित हो रहा था और बाकी के दो पंप लंबे समय से बंद पड़े थे।

पंपों की इस लचर और खस्ताहाल स्थिति के कारण पंपिंग स्टेशन अपनी पूरी क्षमता से काम नहीं कर पा रहा था, जिसका सीधा असर आगे के इलाकों की सीवर लाइनों पर पड़ रहा था और वे ओवरफ्लो होकर सड़कों पर फैल रही थीं।

जलनिगम और जलकल का आपसी समन्वय आया काम

स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए जलकल विभाग ने बिना वक्त गंवाए जलनिगम (नगरीय) के अधिशासी अभियंता और निर्माण खंड प्रथम के अधिकारियों के साथ एक आपात बैठक की और आपसी समन्वय स्थापित करते हुए तत्काल प्रभाव से मरम्मत कार्य शुरू करवाया। तकनीकी विशेषज्ञों और कर्मचारियों की टीमों ने तुरंत मोर्चा संभाला और युद्ध स्तर पर खराब पड़े उपकरणों को ठीक करने का काम शुरू किया गया।

अधिकारियों के मुताबिक, आपसी तालमेल और त्वरित प्रयास का नतीजा यह रहा कि महज एक से डेढ़ घंटे के भीतर ही 33 एमएलडी क्षमता वाले एक महत्वपूर्ण पंप के साथ-साथ पंप हाउस के अन्य जरूरी और संवेदनशील उपकरणों को सफलतापूर्वक दुरुस्त कर लिया गया। जैसे ही इन उपकरणों की मरम्मत पूरी हुई, उन्हें तुरंत चालू कर दिया गया।

पंप चालू होते ही दिखा असर, गलियों से गायब हुआ सीवर का पानी

मरम्मत कार्य पूरा होने के बाद कोनिया पंपिंग स्टेशन की कुल कार्यक्षमता में अचानक भारी सुधार दर्ज किया गया। पंपों के दोबारा से पूरी क्षमता के साथ संचालित होने से प्रभावित क्षेत्रों से सीवर के गंदे पानी को खींचने और बाहर निकालने की रफ्तार कई गुना तेज हो गई।

देखते ही देखते कुछ ही घंटों के भीतर रत्नाकर पार्क के आसपास के संपूर्ण क्षेत्र और उससे जुड़ी सभी गलियों में जमा सीवर का सारा पानी पूरी तरह से साफ हो गया। लंबे समय से गंदे पानी के बीच से गुजरने को विवश स्थानीय नागरिकों और दुकानदारों ने प्रशासन की इस मुस्तैदी की जमकर सराहना की है। सीवर का पानी हटने से अब इलाके की बदबू और संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा भी काफी हद तक कम हो गया है।

भविष्य के लिए प्रशासन की सख्त निगरानी और दिशा-निर्देश

इस पूरी घटना से सबक लेते हुए जलकल विभाग के उच्च अधिकारियों ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि शहर की सीवर लाइनों और पंपिंग स्टेशनों की कार्यप्रणाली पर अब पहले से कहीं अधिक कड़ी और निरंतर निगरानी रखी जाएगी। संबंधित अभियंताओं को यह सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे नियमित अंतराल पर सभी पंपों और मोटरों का भौतिक और तकनीकी मुआयना करें, ताकि भविष्य में कभी भी जलभराव या सीवर ओवरफ्लो जैसी अप्रत्याशित समस्या दोबारा सिर न उठा सके।

प्रशासन की इस सक्रियता और दूरदर्शी सोच से यह साफ है कि वाराणसी में जनहित से जुड़ी नागरिक सुविधाओं को लेकर लापरवाही बरतने वालों के लिए अब कोई गुंजाइश नहीं बची है। स्थानीय जनता भी उम्मीद जता रही है कि आने वाले दिनों में ऐसी व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ किया जाएगा ताकि उन्हें जल निकासी या सीवर से जुड़ी समस्याओं का सामना दोबारा न करना पड़े।

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निवेदिता ठाकुर

निवेदिता ठाकुर

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निवेदिता ठाकुर जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती है...

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