प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सुपोषित भारत’ के विजन को धरातल पर उतारने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए बुधवार को बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी से 9वें राष्ट्रीय पोषण माह का भव्य शुभारंभ किया गया। सिगरा स्थित अत्याधुनिक रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बटन दबाकर इस 30 दिवसीय (9 सितंबर से 8 अक्टूबर तक) राष्ट्रव्यापी अभियान का औपचारिक आगाज किया। इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि इससे वर्चुअल माध्यम से देश भर के करीब 14 लाख आंगनबाड़ी केंद्र सीधे जुड़े, जिससे इस मुहिम को एक व्यापक राष्ट्रीय फलक मिला। चालू वर्ष 2026 के इस अभियान की थीम ‘हमारी आंगनबाड़ी-हमारी जिम्मेदारी’ तय की गई है, जो जमीनी स्तर पर हर एक कार्यकर्ता और समुदाय की जवाबदेही को सुनिश्चित करती है।
काशी की पावन भूमि से देश भर को मिला स्वास्थ्य का संदेश
कार्यक्रम के दौरान अपने संबोधन की शुरुआत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ‘हर-हर महादेव’ के ऊर्जावान उद्घोष के साथ की। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि काशी देवाधिदेव महादेव और मां अन्नपूर्णा की पावन धरती है, और इस पवित्र स्थान से पोषण का संदेश पूरे देश में जाना अपने आप में बेहद प्रतीकात्मक और महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री ने कड़े शब्दों में रेखांकित किया कि किसी भी युवा का मजबूत भविष्य उसके सुनहरे और स्वस्थ बचपन से ही तय होता है। यदि मां स्वस्थ होगी, तो निस्संदेह बच्चा भी स्वस्थ होगा, और एक स्वस्थ शिशु ही आगे चलकर राष्ट्र निर्माण तथा इसके चहुंमुखी विकास में अपनी सार्थक भागीदारी निभा सकता है।
विशेषज्ञों और चिकित्सीय तर्कों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि बच्चे के जीवन के शुरुआती एक हजार दिन अत्यंत संवेदनशील और महत्वपूर्ण होते हैं। इन शुरुआती दिनों में पोषण पर किया गया निवेश कभी भी व्यर्थ नहीं जाता, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत गारंटी बनता है।
उत्तर प्रदेश में आंगनबाड़ी केंद्रों का बदलता स्वरूप
राज्य में महिला एवं बाल विकास के मोर्चे पर हुए कायाकल्प का जिक्र करते हुए सीएम योगी ने आंकड़े साझा किए। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में कुल 1.90 लाख आंगनबाड़ी केंद्र स्वीकृत हैं। पिछले साढ़े नौ वर्षों के कार्यकाल में इनमें से 70 हजार से अधिक केंद्रों को पूरी तरह से नया और आधुनिक स्वरूप दिया गया है। इन केंद्रों पर अब बच्चों के लिए आधुनिक शौचालय, शुद्ध पेयजल और आकर्षक बाल वाटिका जैसी तमाम बुनियादी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।
- आधुनिक मॉडल: पहली बार प्रदेश के आंगनबाड़ी केंद्रों को लगभग 30 लाख रुपये की लागत से मॉडल स्वरूप में ढाला जा रहा है।
- पोषाहार व्यवस्था में सुधार: पारंपरिक व्यवस्था को बदलते हुए अब बच्चों को हॉट मील के साथ-साथ टेक होम राशन (टीएचआर) प्लांट के जरिए गुणवत्तापूर्ण आपूर्ति की जा रही है।
- आर्थिक संबल: आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से सीधे तौर पर पांच करोड़ माताओं के खातों में 2100 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि डीबीटी के जरिए पहुंचाई गई है।
मानदेय और सुरक्षा में ऐतिहासिक बढ़ोतरी
जमीनी स्तर पर काम करने वाली आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के समर्पण की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री ने उनके वित्तीय सशक्तिकरण का भी विशेष उल्लेख किया। उन्होंने याद दिलाया कि वर्ष 2017 से पहले इन कार्यकर्ताओं को बेहद मामूली तीन हजार रुपये मासिक मानदेय मिलता था, जिसे उनकी सरकार ने बढ़ाकर अब 12 हजार रुपये प्रति माह कर दिया है। इसके साथ ही, सुरक्षा कवच के रूप में पांच लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा भी उपलब्ध कराया गया है, ताकि वे पूरी निष्ठा के साथ समाज सेवा के इस कार्य में जुटी रहें।
सिर्फ पोषाहार वितरण तक सीमित नहीं रहेंगे केंद्र
इस बार के राष्ट्रीय पोषण माह की रूपरेखा में आमूल-चूल परिवर्तन किया गया है। अब ये केंद्र केवल राशन बांटने की जगह नहीं रह गए हैं, बल्कि इन्हें बाल विकास के समग्र केंद्रों के रूप में विकसित किया जा रहा है। अभियान के दौरान निम्नलिखित बिंदुओं पर विशेष फोकस रहेगा:
- आहार विविधता और बच्चों तथा महिलाओं को पर्याप्त प्रोटीन की उपलब्धता।
- आंगनबाड़ी केंद्रों पर ताजा और गर्म पका हुआ भोजन परोसा जाना।
- समुदाय का स्वामित्व और उसकी सीधी जवाबदेही तय करना।
- बाल विकास के लिए पोषण के साथ-साथ प्रारंभिक उद्दीपन (Early Childhood Care and Education) के तरीकों को बढ़ावा देना।
- प्रधानमंत्री मातृ वंदना अभियान को जन-जन तक पहुंचाना।
केंद्रीय मंत्रियों ने की सहभागिता, बताया समाज की साझी जिम्मेदारी
- समारोह में केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने बतौर मुख्य वक्ता शिरकत की। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि पोषण केवल किसी एक दिन या एक महीने का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह हर एक नागरिक के जीवन का हिस्सा और पूरे समाज की सहभागिता से चलने वाला सतत अभियान है। वर्ष 2018 में जिस पोषण अभियान की नींव रखी गई थी, वह आज ‘विकसित भारत’ के संकल्प को पूरा करने में सबसे बड़ी धुरी साबित हो रहा है। उन्होंने देश भर के 14 लाख केंद्रों को स्वस्थ राष्ट्र निर्माण की रीढ़ बताया।
- केंद्रीय राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने भी मां अन्नपूर्णा की नगरी से इस अभियान के शुरू होने के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कामकाजी महिलाओं और माताओं के हित में उठाए गए कदमों का जिक्र करते हुए बताया कि केंद्र सरकार ने मातृत्व अवकाश को 12 सप्ताह से बढ़ाकर सीधे 26 सप्ताह कर दिया है, जो मातृत्व और बाल कल्याण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।
जनभागीदारी से बन रहा है बड़ा जनआंदोलन
- उत्तर प्रदेश की महिला कल्याण एवं बाल विकास मंत्री बेबी रानी मौर्य ने विश्वास जताया कि सरकार के प्रयासों के साथ जब जनसमुदाय और अभिभावक जुड़ जाएंगे, तो कुपोषण के खिलाफ जंग में शत-प्रतिशत सफलता मिलेगी। वहीं, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के सचिव अनिल मलिक ने बताया कि यह अभियान अब सरकारी सीमाओं को पार कर चुका है और करोड़ों नागरिकों की सक्रिय भागीदारी से एक विशाल ‘जनआंदोलन’ का रूप ले चुका है।
- उद्घाटन समारोह के इस महत्वपूर्ण अवसर पर उत्तर प्रदेश सरकार के कई वरिष्ठ मंत्री, स्थानीय जनप्रतिनिधि, विधायक, महापौर और भारी संख्या में प्रशासनिक अधिकारी तथा दूर-दराज से आईं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता उपस्थित रहीं। इस आयोजन ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि यदि सही दिशा में सुनियोजित प्रयास किए जाएं, तो भारत को कुपोषण मुक्त बनाने का लक्ष्य दूर नहीं है।