छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले से एक बेहद खास और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध करने वाली खबर सामने आ रही है। यहां के ग्राम सलधा में इन दिनों भव्य चातुर्मास महोत्सव का आयोजन चल रहा है, जो श्रद्धालुओं के बीच भारी आस्था का केंद्र बना हुआ है। इस धार्मिक अनुष्ठान में शिरकत कर रहे उत्तराम्नाय ज्योतिष पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने एक ऐसा रहस्य उजागर किया है, जिसे सुनकर हर शिव भक्त का उत्साह दोगुना हो गया है। शंकराचार्य जी ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए बताया कि सलधा के इस पावन तीर्थ स्थल पर मात्र 80 बार परिक्रमा करने से भक्तों को सीधे एक करोड़ परिक्रमा के बराबर महापुण्य की प्राप्ति हो सकती है।
सलधा चातुर्मास महोत्सव: अध्यात्म और भक्ति का अद्भुत संगम
बेमेतरा का सलधा गांव इन दिनों पूरी तरह से शिवमय हो चुका है। यहां आयोजित चातुर्मास महोत्सव में दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। कार्यक्रम के दौरान देउरगांव के ग्रामीणों ने पारंपरिक रूप से शंकराचार्य जी की पादुका पूजन किया। इसके साथ ही दंडी स्वामी ज्योतिर्मयानंद सरस्वती ने उन सभी श्रद्धालुओं के नामों की घोषणा की, जिन्होंने इस ऐतिहासिक आयोजन में शिवलिंग स्थापना का सौभाग्य प्राप्त किया है।
धर्मसभा के दौरान अपने ओजस्वी व वक्ता के रूप में प्रसिद्ध शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने घोषणा की कि इस तीर्थ स्थल पर एक साथ सवा लाख शिवलिंगों की स्थापना की जा रही है। इतने बड़े पैमाने पर शिवलिंगों की स्थापना भारत भूमि में एक दुर्लभ और अत्यंत पवित्र घटना है, जो इस स्थान को महातीर्थ के रूप में स्थापित कर रही है।
क्यों खास है सलधा का शिव तीर्थ? जानिए परिक्रमा का गणित
धार्मिक अनुष्ठानों और शास्त्रों में परिक्रमा का विशेष विधान और महत्व बताया गया है। शंकराचार्य जी ने अपने प्रवचन के दौरान विभिन्न देवी-देवताओं की परिक्रमा के नियमों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने समझाया कि:
- माता दुर्गा की एक पूरी परिक्रमा की जाती है।
- भगवान शिव की आधी (सोमसूत्र तक) परिक्रमा करने का विधान है।
चूंकि सलधा में एक साथ सवा लाख शिवलिंगों की स्थापना हो रही है, इसलिए यहां शिवजी की आधी परिक्रमा भी अपने आप में सवा लाख परिक्रमा के बराबर हो जाती है। इस शास्त्र सम्मत गणना के अनुसार, यदि कोई श्रद्धालु इस प्रांगण में केवल 80 बार परिक्रमा पूरी कर लेता है, तो उसे अनजाने या जाने-अनजाने में एक करोड़ परिक्रमा करने के समान महापुण्य की प्राप्ति हो जाती है। यही वजह है कि इन दिनों सलधा में परिक्रमा करने वाले भक्तों की संख्या में भारी इजाफा देखने को मिल रहा है।
शिव पुराण और गुणनिधि की कथा: पापों से मुक्ति का मार्ग
प्रवचन के दौरान शंकराचार्य जी ने शिव पुराण की महिमा का बखान करते हुए भक्तों को जीवन के कई गहरे सत्यों से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि भगवान शिव अत्यंत भोले और परम कृपालु हैं। वे रास्ते से भटके हुए जीव को भी अपनी शरण में ले लेते हैं।
उन्होंने पौराणिक कथा का उल्लेख करते हुए बताया कि किस प्रकार गुणनिधि ने अनजाने में ही सही, लेकिन शिव सेवा और दीपदान किया, जिसके प्रभाव से उनके सारे पाप नष्ट हो गए। शंकराचार्य ने भस्म को इस संसार का अंतिम सार बताते हुए कहा कि जो व्यक्ति सच्चे मन से शिव भक्ति में लीन हो जाता है, वह जीवन के तमाम सूतक और पातक जैसे दोषों से पूरी तरह मुक्त हो जाता है।
मिट्टी से निर्मित शिवलिंग है सर्वोच्च
शिवलिंग निर्माण को लेकर समाज में कई तरह की मान्यताएं और पद्धतियां प्रचलित हैं। इस पर स्पष्टता लाते हुए शंकराचार्य जी ने जोर देकर कहा कि शास्त्रों में वर्णित आठ प्रकार की मूर्तियों में से 'शुद्ध मिट्टी से निर्मित शिवलिंग' को सर्वाधिक श्रेष्ठ और उत्तम माना गया है। उन्होंने श्रद्धालुओं को यही शिवलिंग निर्माण की सही और शास्त्रसम्मत प्रक्रिया अपनाने की सलाह दी, ताकि पूजा का पूर्ण फल प्राप्त हो सके।
अयोध्या धाम से जुड़े संस्मरण और नया आग्रह
चातुर्मास महोत्सव के इस पावन अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों से प्रतिष्ठित लोग भी पहुंच रहे हैं। इसी क्रम में अयोध्या धाम से पधारे प्रमुख व्यक्तित्व संतोष दुबे ने सभा में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। उन्होंने राम मंदिर आंदोलन के संघर्ष के दिनों को याद करते हुए पुरानी यादों को ताजा किया। इसके साथ ही उन्होंने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से यह विशेष आग्रह किया कि वे राम की नगरी अयोध्या में भी एक भव्य आश्रम की स्थापना करें।
संतोष दुबे के इस अनुरोध को शंकराचार्य जी ने बेहद तन्मयता और ध्यान से सुना। उन्होंने अयोध्यावासियों की भावनाओं का सम्मान करते हुए आश्वासन दिया कि इस दिशा में सकारात्मक प्रयास किए जाएंगे और अयोध्या में आश्रम स्थापित करने की रूपरेखा पर विचार किया जाएगा।
दैनिक सत्संग और उमड़ती भीड़
सलधा में चल रहे इस चातुर्मास महोत्सव के दौरान हर दिन सुबह से लेकर शाम तक विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों, सत्संग और प्रवचनों का दौर चलता है। आसपास के जिलों और अन्य राज्यों से भी शिव भक्त यहां पहुंच रहे हैं। छत्तीसगढ़ की यह धरती इन दिनों शिवमय हो चुकी है और सलधा का नाम देश के प्रमुख आध्यात्मिक पटल पर उभर रहा है। विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों का मानना है कि इस तरह के आयोजनों से न केवल धार्मिक संस्कृति को बढ़ावा मिलता है, बल्कि समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी होता है।