यूरोप के सबसे ताकतवर देशों में शुमार फ्रांस इन दिनों भीषण छात्र आंदोलन की आग में सुलग रहा है। राजधानी पेरिस से शुरू हुआ यह विरोध प्रदर्शन अब देश के अन्य शहरों में भी फैल चुका है। बिगड़ते हालात के बीच उत्तर फ्रांस के लेंस (Lens) शहर से एक बेहद दर्दनाक और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। यहां हाईस्कूल के प्रदर्शनकारियों और दंगा रोधी पुलिस के बीच हुई झड़प के दौरान पुलिस का एक डिस्पर्सल ग्रेनेड (dispersion grenade) फट जाने से 15 साल के एक किशोर का हाथ और बांह का निचला हिस्सा बुरी तरह उड़ गया।
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह हादसा तब हुआ जब इस किशोर ने जमीन पर पड़े ग्रेनेड को उठा लिया था। पा-द-कले (Pas-de-Calais) क्षेत्र के प्रीफेक्ट फ्रांस्वा-जैवियर लॉच ने इस घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि मामले की आधिकारिक जांच शुरू कर दी गई है। हालांकि, उन्होंने इस घटना की सटीक परिस्थितियों पर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। प्रशासन के अनुसार, घटना के वक्त 200 से 250 प्रदर्शनकारी पुलिस पर लगातार पत्थर और अन्य वस्तुएं फेंक रहे थे।
छात्रों के गुस्से की क्या है असल वजह?
फ्रांस में यह छात्र आंदोलन अब अपने तीसरे हफ्ते में प्रवेश कर चुका है। देश भर के छात्र कक्षाओं में भारी भीड़ (overcrowded classrooms), शिक्षकों की भारी कमी, बजट की तंगी और जर्जर हो चुकी स्कूल इमारतों के खिलाफ सड़कों पर उतरे हैं। छात्रों का आरोप है कि सरकार उनकी शिक्षा व्यवस्था की बुनियादी जरूरतों को नजरअंदाज कर रही है।
प्रदर्शन कर रहे एक छात्र ने अपनी पीड़ा जाहिर करते हुए बताया, "हमारी एक कक्षा में 35-35 छात्र बैठ रहे हैं, बैठने के लिए ठीक से कुर्सियां तक नहीं हैं। स्थिति इतनी बदतर है कि पूरे एक साल तक हमारे स्कूल में विज्ञान का कोई शिक्षक ही नहीं था।" इसके अलावा छात्र इमारतों की खस्ता हालत, अत्यधिक गर्मी वाले क्लासरूम और दोपहर के भोजन के लिए केवल एक घंटे का समय मिलने जैसी समस्याओं से भी परेशान हैं।
हिंसा की आग में सुलगते शहर और पुलिस की सख्ती
यह पूरा आंदोलन सितंबर महीने में पेरिस क्षेत्र से शुरू हुआ था, जो अब देश के कई प्रमुख शहरों में फैल चुका है।
- लिल (Lille): यहां छात्रों और पुलिस के बीच तीखी झड़पें हुईं।
- तूलूज़ (Toulouse): हालात को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले दागने पड़े।
- पेरिस: प्रदर्शनकारियों ने मध्य पेरिस के एक स्कूल में आग लगाकर जबरन घुसने की कोशिश की।
शिक्षा मंत्री एडोउआर्ड गेफ्रे ने जानकारी दी है कि देश भर में कम से कम दो दर्जन स्कूलों को आगजनी और तोड़फोड़ का निशाना बनाया गया है। इन हिंसक झड़पों में अब तक 78 शिक्षक और कम से कम 190 छात्र घायल हो चुके हैं। हालांकि, सरकार का दावा है कि पिछले कुछ दिनों में छात्रों की भागीदारी में कुछ कमी आई है।
मानवाधिकार संगठनों की तीखी आलोचना और पुलिस की कार्रवाई
नाबालिग छात्रों के खिलाफ पुलिस के आक्रामक रवैये ने मानवाधिकार संगठनों को गहरी चिंता में डाल दिया है। मानवाधिकार समूहों ने पुलिस पर लाठियों, आंसू गैस और रबर की गोलियों जैसे भारी हथकंडों का इस्तेमाल करने का गंभीर आरोप लगाया है। अधिकारियों के मुताबिक, पुलिस आचरण से जुड़े कई मामलों की जांच चल रही है, जिसमें एक 16 साल के किशोर का मामला भी शामिल है, जिसकी आंख रबर की गोली लगने से गंभीर रूप से जख्मी हो गई थी।
न्याय मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, विरोध प्रदर्शन शुरू होने के बाद से अब तक 5,000 से अधिक गिरफ्तारियां की जा चुकी हैं, जिनमें से 87 प्रतिशत मामले नाबालिगों से जुड़े हैं। सरकार ने अब कड़े कदम उठाते हुए घोषणा की है कि संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले युवा अपराधियों या उनके माता-पिता को इसके लिए आर्थिक रूप से जिम्मेदार ठहराया जाएगा।
राजनीतिक भूचाल और राष्ट्रपति मैक्रों की मुश्किलें
आगामी राष्ट्रपति चुनाव में अब सिर्फ छह महीने का वक्त बचा है, ऐसे में इस राष्ट्रव्यापी छात्र आंदोलन ने फ्रांस की राजनीति में भारी भूचाल ला दिया है। बढ़ते राजकोषीय घाटे (Budget deficit) से जूझ रही सरकार पर इस संकट ने राजनीतिक दबाव और अधिक बढ़ा दिया है।
सत्तारूढ़ अधिकारियों और मारिन ले पेन की दक्षिणपंथी पार्टी 'नेशनल रैली' ने हार्ड-लेफ्ट पार्टी 'फ्रांस अनबाउंड' (La France Insoumise) पर इस विरोध प्रदर्शन को भड़काने का सीधा आरोप लगाया है। हालांकि, विपक्षी पार्टी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए दावा किया है कि सरकार इस गंभीर संकट का राजनीतिकरण कर रही है और अपनी विफलताओं से ध्यान भटका रही है।
फिलहाल, फ्रांस का यह छात्र आंदोलन थमने का नाम नहीं ले रहा है और आने वाले दिनों में यह देश की राजनीतिक दिशा तय करने में एक बड़ा कारक बन सकता है।