इजराइल चुनाव 2026 के शुरुआती रुझानों में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का राजनीतिक गुट संसद में बहुमत के जादुई आंकड़े से पीछे रह गया है। नियमित मतपत्रों की गिनती पूरी होने के बाद, सैकड़ों हजार विशेष मतों का सत्यापन और गिनती अभी बाकी है, जो चुनावी परिणामों की तस्वीर पूरी तरह बदल सकते हैं।
'द टाइम्स ऑफ इजराइल' की रिपोर्ट के अनुसार, नियमित मतों की गिनती के बाद नेतन्याहू के गुट को 53 सीटें मिली हैं। वहीं, गदी आइसेनकोट के नेतृत्व वाले विपक्षी गुट को 48 सीटें और अरब-नेतृत्व वाले दलों को 19 सीटें हासिल हुई हैं। इजराइल की 120 सदस्यीय नेसेट (संसद) में सरकार बनाने के लिए किसी भी दल या गठबंधन को कम से कम 61 सीटों की आवश्यकता होती है। वर्तमान में दोनों मुख्य गुट इस आंकड़े से दूर हैं, और ऐसे में 'डबल-एनवेलप' (दोहरे लिफाफे वाले) वोट निर्णायक साबित हो सकते हैं।
डबल-एनवेलप मतदान प्रणाली क्या है?
डबल-एनवेलप विशेष मतपत्र होते हैं, जिनका उपयोग वे योग्य मतदाता करते हैं जो अपने निर्धारित मतदान केंद्र पर जाकर वोट डालने में असमर्थ होते हैं। इस प्रणाली के तहत वोटों की अलग से, मतदान के दिन के बाद, कड़ाई से जाँच और गिनती की जाती है।
'इजराइल डेमोक्रेसी इंस्टीट्यूट' के मुताबिक, मतदाता अपना मतपत्र एक अज्ञात आंतरिक लिफाफे में डालते हैं, जिसे फिर एक बाहरी लिफाफे में सील किया जाता है। इस बाहरी लिफाफे पर मतदाता का पहचान विवरण दर्ज होता है। चुनाव अधिकारी यह सुनिश्चित करने के लिए बाहरी लिफाफे की जाँच करते हैं कि मतदाता ने अपने नियमित मतदान केंद्र पर पहले ही वोट तो नहीं डाला है। इसके बाद, मत की गोपनीयता बनाए रखने के लिए गिनती से पहले आंतरिक लिफाफे को पहचान विवरण से अलग कर दिया जाता है।
इस व्यवस्था के दायरे में सैनिकों और रिजर्व के जवानों, पुलिस कर्मियों, कैदियों, अस्पताल के मरीजों, कुछ चिकित्सा और चुनाव कर्मचारियों, सीमित गतिशीलता वाले मतदाताओं, नामित मतदान केंद्रों का उपयोग करने वाले विस्थापितों और विदेश में सेवारत योग्य इजरायली प्रतिनिधियों को शामिल किया जाता है।
कितने वोट लंबित हैं और कब होगी गिनती?
लंबित विशेष मतों की संख्या को लेकर अलग-अलग अनुमान सामने आए हैं। 'द टाइम्स ऑफ इजराइल' की रिपोर्ट के मुताबिक लगभग 6,00,000 डबल-एनवेलप वोट गिनती की प्रतीक्षा में हैं, जबकि 'वाइनेट' (Ynet) ने इनकी संख्या 6,50,000 से अधिक बताई है। इसके अलावा, टीपीएस-आईएल समाचार एजेंसी के हवाले से इजराइलएफएम ने इनकी संख्या 6,50,000 से 7,00,000 के बीच होने का अनुमान जताया है।
केंद्रीय चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि इन विशेष मतों की गिनती नियमित मतपत्रों के प्रसंस्करण के बाद शुरू होगी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सत्यापन प्रक्रिया और मतों की कुल संख्या के आधार पर यह गिनती पूरी होने में शुक्रवार सुबह तक का समय लग सकता है।
सीटों के वितरण और गठबंधन पर असर
इजराइल आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली का उपयोग करता है, जहाँ चुनावी सीमा और सीट आवंटन नियमों के अधीन दलों के राष्ट्रीय मतों के हिस्से के अनुसार सीटें आवंटित की जाती हैं। ये अतिरिक्त मत राष्ट्रीय कुल में जोड़े जाते हैं और व्यक्तिगत दलों को मिलने वाली सीटों की संख्या को बदल सकते हैं।
पारंपरिक रूप से ऐसा माना जाता है कि विशेष मत ज़ायोनी दलों के पक्ष में और अरब तथा अति-रूढ़िवादी दलों के मुकाबले अधिक झुकाव रखते हैं। हालांकि, 2026 में सेवारत रिजर्व सैनिकों की भारी संख्या के कारण इस बार का परिणाम अनुमान लगाना अधिक कठिन हो गया है। अंतिम प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि ये मत विभिन्न दलों के बीच किस प्रकार विभाजित होते हैं। इसके अलावा, 3.25% की चुनावी सीमा के करीब खड़े दलों के लिए भी ये वोट बेहद महत्वपूर्ण हैं।
आगे की राजनीतिक प्रक्रिया और राष्ट्रपति की भूमिका
आधिकारिक परिणाम 4 नवंबर तक घोषित किए जाने निर्धारित हैं। जब तक विशेष मतों का सत्यापन और गिनती पूरी नहीं हो जाती, तब तक प्रकाशित सीट वितरण अनंतिम ही रहेगा।
अ अंतिम परिणाम आने के बाद भी सरकार का गठन रातों-रात नहीं होगा। प्रधानमंत्री का चुनाव सीधे इन वोटों से नहीं होता है, बल्कि अंतिम परिणामों के प्रकाशन के बाद, राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग निर्वाचित दलों के प्रतिनिधियों से परामर्श करेंगे और उस सांसद को सरकार बनाने का जिम्मा सौंपेंगे, जिसके बारे में उनका मानना होगा कि उसे संसद में बहुमत हासिल करने का सबसे अच्छा मौका है। उस उम्मीदवार को सरकार बनाने के लिए आवश्यक संसदीय समर्थन जुटाना होगा।