व्यावसायिक जिम्मेदारियों और पारिवारिक परंपराओं के बीच संतुलन बिठातीं बरेली की महिला अधिकारी
करवा चौथ के पावन पर्व पर एक ओर जहां हर घर में उत्सव का माहौल रहता है, वहीं कामकाजी महिलाओं के लिए इस दिन के दौरान अपनी जिम्मेदारियों और परंपराओं के बीच तालमेल बिठाना किसी चुनौती से कम नहीं होता। उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में तैनात महिला अधिकारियों ने यह साबित कर दिखाया है कि कर्तव्य पथ पर मुस्तैद रहते हुए भी अपनी संस्कृति और रीति-रिवाजों को कैसे सहेजा जा सकता है। दिनभर दफ्तर के काम, मुकदमों की सुनवाई और प्रशासनिक व्यस्तताओं के बीच इन अधिकारियों ने करवा चौथ के लिए समय निकाला और व्रत की पूरी तैयारी की।
जिला युवा कल्याण अधिकारी आरती जायसवाल की दिनचर्या
कार्यालय के कामकाज में लगातार व्यस्त रहने वाली जिला युवा कल्याण अधिकारी आरती जायसवाल के लिए करवा चौथ का यह दिन खास महत्व रखता है। दिनभर दफ्तर की फाइलों और आधिकारिक बैठकों में समय बीत जाने के कारण उन्हें हाथों में मेहंदी लगवाने के लिए दिन में बिल्कुल वक्त नहीं मिल पाया। इसके बावजूद उनके उत्साह में कोई कमी नहीं आई है। उन्होंने तय किया कि वह रात को घर लौटने के बाद मेहंदी लगाने की प्रक्रिया पूरी करेंगी। आरती जायसवाल का मानना है कि कार्यालय के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को निभाना उनका प्राथमिक कर्तव्य है, लेकिन इसके साथ ही परंपराओं और रीति-रिवाजों का निर्वाह करना भी उतना ही आवश्यक है। उनका कहना है कि दिनभर की थकान के बावजूद जैसे ही त्योहार का जिक्र आता है, मन में एक अलग ही ऊर्जा और उत्साह का संचार हो जाता है। उनके लिए नौकरी की निष्ठा और पारिवारिक परंपराओं से जुड़ाव दोनों का ही अपने-अपने स्थान पर विशेष महत्व है।
जिला प्रोबेशन अधिकारी मोनिका राणा का अनुभव
करवा चौथ के पर्व में केवल व्रत रखना ही शामिल नहीं होता, बल्कि इसके साथ घर-परिवार के लिए खरीदारी करना और पूजा-पाठ से जुड़ी जरूरी सामग्री जुटाना भी एक अहम हिस्सा है। जिला प्रोबेशन अधिकारी मोनिका राणा ने अपनी नौकरी और दफ्तर की व्यस्तताओं के बीच इस पर्व के लिए समय निकाला और हाल ही में अपने हाथों में मेहंदी लगवाई। डीपीओ मोनिका राणा का मानना है कि त्योहारों के प्रति उत्साह और उमंग अक्सर बचपन से ही घर के माहौल को देखकर विकसित होता है। उन्होंने अपनी मां को हमेशा करवा चौथ की तैयारी करते, पूजा का सारा सामान जुटाते और सभी परंपराओं को पूरी निष्ठा से निभाते देखा है, जो आज भी उनकी यादों का एक अहम हिस्सा है। शादी के बाद यही संचित परंपराएं और संस्कार महिला के अपने परिवार में आगे बढ़ते हैं। पति की लंबी उम्र की कामना के साथ रखा जाने वाला यह व्रत इसी पवित्र भाव से जुड़ा हुआ है। खरीदारी और घर की तमाम व्यवस्थाओं के बीच महिलाएं अपनी पसंद और सुविधा के अनुसार इस पर्व को खास बनाने का पूरा प्रयास करती हैं।
महिला थाना प्रभारी छवि सिंह की पुलिस ड्यूटी और व्रत
बरेली के महिला थाने में रोजाना अनगिनत मामले और नए केस आते हैं, जहां कभी किसी की शिकायत को धैर्य से सुनना पड़ता है, तो कभी किसी गंभीर मामले में तत्काल कानूनी कार्रवाई करना अनिवार्य हो जाता है। महिला थाना प्रभारी छवि सिंह की दैनिक दिनचर्या इन्हीं जटिल जिम्मेदारियों के बीच गुजरती है। पुलिस सेवा एक ऐसा पेशा है जहां कब छुट्टी मिल जाए और कब किसी आपात स्थिति या जरूरी मामले के कारण थाने में रुकना पड़ जाए, इसका कोई पूर्व निर्धारित समय नहीं होता। ऐसे कठिन माहौल में किसी त्योहार की तैयारी के लिए वक्त निकालना बेहद कठिन कार्य है, फिर भी छवि सिंह मानती हैं कि अपनी पेशेवर जिम्मेदारी निभाने के साथ-साथ परिवार और परंपराओं के लिए समय निकालना भी उतना ही जरूरी है।
छवि सिंह बताती हैं कि उन्होंने शादी के बाद से ही हर साल करवा चौथ का व्रत रखना शुरू कर दिया था। पुलिस विभाग की इस चुनौतीपूर्ण नौकरी के साथ व्रत रखना और उसकी औपचारिकताएं पूरी करना थोड़ा मुश्किल जरूर है, लेकिन वह इसे बेहद खुशी और संतोष के साथ करती हैं। इस अवसर पर वह अपनी मां और सासू मां को याद करती हैं और बताती हैं कि त्योहार के आने से बहुत पहले से ही घर में खरीदारी का दौर शुरू हो जाता है। हालांकि, अपनी व्यस्त नौकरी के कारण वह खुद कभी खरीदारी के लिए पर्याप्त समय नहीं निकाल पाई हैं, लेकिन इसके बावजूद वह अपने पति की लंबी उम्र के लिए पूरे मन, विश्वास और उल्लास के साथ इस व्रत को रखती हैं। इस बार भी उन्होंने दफ्तर के बाद रात में मेहंदी लगाने और अगले दिन पूरे विधि-विधान से व्रत रखकर पति की दीर्घायु की कामना करने का पूरा मन बनाया है।