प्रचंड चक्रवाती तूफान अर्नब ने 28 अक्टूबर 2026 की तड़के आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में भारी तबाही मचाई है। लैंडफॉल के दौरान 125 से 150 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चली तेज हवाओं और भारी बारिश के कारण शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार तीन लोगों की मौत हो गई है, जबकि 30 से अधिक मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं और 714 गांवों में नुकसान की पुष्टि की गई है।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, चक्रवात अर्नब का लैंडफॉल 28 अक्टूबर को तड़के करीब 1:20 बजे शुरू हुआ। यह प्रक्रिया बापटला और विशाखापट्टनम के बीच, यनम के दक्षिण में काकीनाडा के पास दर्ज की गई। लैंडफॉल के वक्त तूफान की निरंतर हवा की गति 125 से 135 किलोमीटर प्रति घंटा थी, जबकि हवा के झोंके 150 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच रहे थे। इस भयंकर प्राकृतिक आपदा के चलते तटीय क्षेत्रों में जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है।
व्यापक नुकसान और तटीय इलाकों का हाल
तूफान के प्रभाव से आंध्र प्रदेश के कई जिलों में भारी तबाही देखने को मिली है। तेज हवाओं के दबाव से कई कच्चे और पक्के घरों की छतें उखड़ गईं, सड़कों पर बड़े-बड़े पेड़ उखाड़कर गिर गए और निचले तथा तटीय इलाकों में समुद्र का पानी घुसने से बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए हैं। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस चक्रवात की वजह से राज्यभर में 30 मकानों को गंभीर नुकसान पहुंचा है और लगभग 714 गांवों में कम या ज्यादा क्षति दर्ज की गई है। इसके अलावा, पड़ोसी राज्य ओडिशा के दक्षिणी जिलों में भी चक्रवात के असर से तेज हवाएं चल रही हैं और लगातार भारी बारिश का दौर जारी है।
प्रशासनिक तैयारी और राहत एवं बचाव कार्य
आपदा की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार और जिला प्रशासन ने पहले ही बड़े पैमाने पर एहतियाती कदम उठाए थे। आईएमडी की चेतावनी के बाद तटीय क्षेत्रों से कुल 84,000 लोगों को सुरक्षित निकालकर पहले से तैयार किए गए राहत शिविरों (रेस्क्यू शेल्टर) में शिफ्ट कर दिया गया था। प्रशासन द्वारा लोगों के खाने-पीने और चिकित्सीय सहायता के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। लैंडफॉल के तुरंत बाद एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और स्थानीय पुलिस प्रशासन की टीमें फील्ड में उतर चुकी हैं ताकि गिरे हुए पेड़ों को हटाकर रास्तों को साफ किया जा सके और प्रभावितों तक त्वरित सहायता पहुंचाई जा सके।