अमेरिकी मध्यावधि चुनाव में सत्तारूढ़ रिपब्लिकन पार्टी को करारी शिकस्त मिली है। 7 प्रमुख आंकड़ों के जरिए जानें डेमोक्रेट्स की इस ऐतिहासिक जीत के मायने।
अमेरिकी मध्यावधि चुनावों में सत्तारूढ़ रिपब्लिकन पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा है। डेमोक्रेटिक पार्टी ने उन क्षेत्रों में भी शानदार जीत दर्ज की है, जहां वे दशकों से संघर्ष कर रहे थे। रॉयटर और यूएसए टुडे के आंकड़ों के आधार पर सामने आए सात प्रमुख आंकड़े इस चुनाव के पूरे घटनाक्रम और अमेरिकी संसद के दोनों सदनों में बदले सियासी समीकरणों को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं।
99 प्रतिशत काउंटियों में कमजोर हुआ रिपब्लिकन प्रदर्शन
बुधवार तक जिन करीब 2,200 काउंटियों में अधिकांश मतों की गिनती पूरी हो चुकी थी, उनमें से 99 प्रतिशत काउंटियों में रिपब्लिकन पार्टी के प्रदर्शन में गिरावट दर्ज की गई। पार्टी को अमीर और गरीब दोनों तरह के इलाकों के साथ-साथ शहरों और उपनगरों में भी भारी नुकसान उठाना पड़ा। जिन काउंटियों के आंकड़े सामने आए हैं, वहां रिपब्लिकन पार्टी के वोटों का हिस्सा वर्ष 2024 में डोनाल्ड ट्रंप को मिले वोटों के मुकाबले आठ प्रतिशत अंक तक कम हो गया है।
94 साल का पुराना रिकॉर्ड ध्वस्त
कंसास के मतदाताओं ने 94 वर्षों में पहली बार सीनेट के लिए किसी डेमोक्रेट उम्मीदवार को चुना है। इस सीट के अलावा रिपब्लिकन पार्टी के अन्य पारंपरिक गढ़ों में भी डेमोक्रेट्स ने निर्णायक बढ़त हासिल की है। कंसास में डेमोक्रेट एडम हैमिल्टन लगभग पांच प्रतिशत अंक से आगे चल रहे थे, जबकि टेक्सास में डेमोक्रेट जेम्स तलारिको ने ट्रंप के पसंदीदा उम्मीदवार केन पैक्सटन पर करीब 12 प्रतिशत अंकों की बढ़त बनाई।
हिस्पैनिक बहुल 64 काउंटियों में बड़ी बढ़त
हिस्पैनिक आबादी बहुल काउंटियों में मतगणना लगभग पूरी होने के बाद डेमोक्रेट्स को जबरदस्त बढ़त मिली है। सीनेट चुनाव वाली ऐसी 64 काउंटियों में रिपब्लिकन पार्टी को मिले वोटों का हिस्सा 2024 के मुकाबले 14 प्रतिशत अंक कम रहा। मेक्सिको की सीमा से सटी टेक्सास की हिडाल्गो काउंटी में रिपब्लिकन वोटों में लगभग 25 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई, जबकि फ्लोरिडा की मियामी-डेड काउंटी में यह हिस्सा 10 प्रतिशत अंक कम हुआ।
प्रतिनिधि सभा के कड़े मुकाबलों में सूपड़ा साफ
रिपब्लिकन पार्टी ने प्रतिनिधि सभा के किसी भी ऐसे निर्वाचन क्षेत्र में जीत हासिल नहीं की है, जहां दो वर्ष पहले ट्रंप की जीत का अंतर 11 प्रतिशत अंक से कम था। यह मजबूत डेमोक्रेटिक लहर का असर था कि उन रिपब्लिकन सांसदों को भी हार का सामना करना पड़ा जिन्हें सुरक्षित माना जा रहा था। डेमोक्रेट्स ने ऐसे चार निर्वाचन क्षेत्रों में भी बाजी मारी जहां ट्रंप 15 प्रतिशत से अधिक के अंतर से जीते थे। इसके अलावा, जिन सीटों को कड़ा मुकाबला माना जा रहा था, वहां रिपब्लिकन पार्टी एक भी सीट जीतने में कामयाब नहीं हो पाई।
सीमा परिसीमन की रणनीति भी हुई नाकाम
रिपब्लिकन पार्टी ने कुछ राज्यों में निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाएं बदलकर प्रतिनिधि सभा में अपना बहुमत मजबूत करने की योजना बनाई थी, जो पूरी तरह असफल साबित हुई। पार्टी ने डेमोक्रेट्स के कब्जे वाली जिन 15 सीटों को अपने पाले में लाने का लक्ष्य रखा था, उनमें से एक भी सीट उसे नहीं मिली। बुधवार तक डेमोक्रेट्स इनमें से 10 सीटों पर जीत दर्ज कर चुके थे और पांच सीटों के परिणाम आने बाकी थे।
ट्रंप के गृह राज्य फ्लोरिडा में कड़ी टक्कर
पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के राजनीतिक रूप से अहम माने जाने वाले गृह राज्य फ्लोरिडा में डेमोक्रेट एंजी निक्सन सीनेट की सीट जीतने से मात्र तीन प्रतिशत अंक से पीछे रह गईं। दो वर्ष पहले हुए चुनाव में ट्रंप ने इसी राज्य में 13 प्रतिशत अंक के बड़े अंतर से जीत हासिल की थी, जिससे इस बार के नतीजे खासे चौंकाने वाले रहे हैं।