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24 घंटे में 133 हमले! यमन में हूतियों की खैर नहीं, बड़ा सैन्य एक्शन

24 घंटे में 133 हमले! यमन में हूतियों की खैर नहीं, बड़ा सैन्य एक्शन

मिडिल ईस्ट की सुलगती आग अब एक नए और बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुकी है। ईरान और उसके सहयोगियों के खिलाफ पश्चिम एशिया में घेराबंदी और तेज हो गई है। हाल ही में सामने आई एक बड़ी सामरिक रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी समर्थित यमन सेना ने ईरान समर्थित हूती (Houthi) विद्रोहियों की कमर तोड़ने के लिए एक अभूतपूर्व और बड़ा सैन्य अभियान छेड़ दिया है। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि महज 24 घंटे के भीतर 133 से ज्यादा मिलिट्री ऑपरेशन को अंजाम दिया गया है।

महज 24 घंटे में 133 ऑपरेशन: आखिर क्या है यमन का नया प्लान?

यमन सेना और सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन का मुख्य उद्देश्य अब हूती विद्रोहियों के ठिकानों को पूरी तरह नेस्तनाबूद करना है। पिछले कुछ हफ्तों से लाल सागर और क्षेत्रीय सीमाओं पर बढ़ते तनाव के बीच यह अब तक का सबसे बड़ा और आक्रामक सैन्य कदम माना जा रहा है। सैन्य सूत्रों के हवाले से मिल रही जानकारी के मुताबिक, देश के अलग-अलग रणनीतिक मोर्चों पर एक साथ समन्वित हमले किए जा रहे हैं।

इन 24 घंटों में चलाए गए 133 ऑपरेशनों में मुख्य रूप से हूती विद्रोहियों के हथियारबंद ठिकाने, गोला-बारूद के गोदाम, और उनके कम्युनिकेशन सेंटर्स को निशाना बनाया गया है। इस ताबड़तोड़ कार्रवाई से विद्रोही गुट में भारी खलबली मच गई है।

ईरान के लिए बड़ा झटका

विशेषज्ञों का मानना है कि हूती विद्रोही मिडिल ईस्ट में ईरान के 'प्रॉक्सी वॉर' (Proxy War) का एक बेहद मजबूत और अहम हथियार रहे हैं। लाल सागर में कमर्शियल जहाजों पर होने वाले हमलों के पीछे भी इन्हीं विद्रोहियों का हाथ माना जाता रहा है। ऐसे में, सऊदी समर्थित यमन सेना द्वारा की जा रही यह सख्त कार्रवाई सीधे तौर पर तेहरान (ईरान की राजधानी) के लिए एक बड़ा सामरिक झटका साबित हो रही है।

  • रणनीतिक बढ़त: इस बड़े सैन्य एक्शन से यमन सरकार को अपने उन इलाकों को वापस पाने में मदद मिल रही है जो लंबे समय से विद्रोहियों के कब्जे में थे।
  • अंतर्राष्ट्रीय प्रभाव: वैश्विक व्यापार मार्ग के लिहाज से बेहद अहम लाल सागर की सुरक्षा के लिए इन ऑपरेशनों को जरूरी माना जा रहा है।
  • हूती गुट पर दबाव: लगातार हो रही एयर स्ट्राइक्स और ग्राउंड कॉम्बैट से हूतियों की रसद और सप्लाई चेन लगभग ठप पड़ गई है।

जमीनी हकीकत और आगे क्या होगा?

यमन के इन इलाकों में स्थिति बेहद तनावपूर्ण बनी हुई है। आम नागरिकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए राहत और बचाव कार्यों के साथ-साथ सेना अपनी रणनीतिक बढ़त को मजबूत करने में जुटी है। विश्लेषकों का यह भी कहना है कि अगर यह सैन्य दबाव इसी तरह जारी रहा, तो आने वाले दिनों में हूती विद्रोहियों को शांति वार्ता की मेज पर आने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है, या फिर उनका सैन्य नेटवर्क पूरी तरह बिखर जाएगा।

फिलहाल, मध्य पूर्व के इस नए रणक्षेत्र में हर घंटे बदलते समीकरण पूरी दुनिया की नींद उड़ाए हुए हैं। देखना यह होगा कि ईरान इस स्थिति में अपने सबसे वफादार सहयोगियों को बचाने के लिए क्या नया दांव चलता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1: यमन सेना ने हूतियों के खिलाफ हाल ही में कितने ऑपरेशन चलाए?

सऊदी समर्थित यमन सेना ने महज 24 घंटे के भीतर हूती विद्रोहियों के खिलाफ कुल 133 सैन्य अभियानों (Military Operations) को अंजाम दिया है।

Q2: हूती विद्रोहियों को किसका समर्थन प्राप्त है?

हूती विद्रोहियों को वैचारिक और सैन्य रूप से ईरान का समर्थन प्राप्त माना जाता है, जो मिडिल ईस्ट में अपना प्रभाव बढ़ाने के लिए इनका इस्तेमाल करता है।

Q3: इन ऑपरेशनों का मुख्य उद्देश्य क्या है?

इन सैन्य अभियानों का मुख्य उद्देश्य यमन में हूती विद्रोहियों के कब्जे वाले क्षेत्रों को मुक्त कराना और लाल सागर में उनकी गतिविधियों पर लगाम लगाना है।

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काव्या त्रिपाठी

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Senior Editor

काव्या त्रिपाठी बिजनेस और टेक्नोलॉजी की जटिल दुनिया को सरल और स्पष्ट रूप में प्रस्तुत करने के लिए जानी जाती हैं। वे आर्थिक बदलाव, स्टार्टअप इकोसिस्...

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