मध्य पूर्व के भू-राजनीतिक समीकरण एक बार फिर से बेहद संवेदनशील मोड़ पर पहुंच चुके हैं। अरब प्रायद्वीप के सबसे गरीब देशों में शुमार यमन के उच्च और रणनीतिक इलाकों पर हूती विद्रोहियों ने अपनी पकड़ को और अधिक मजबूत करना शुरू कर दिया है। अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के गलियारों में इस बात की चर्चा काफी तेज है कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति और प्रभावशाली नेता डोनाल्ड ट्रंप ने हूती ठिकानों पर संभावित सैन्य हमलों को फिलहाल रोक दिया है। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर ग्लोबल शिपिंग रूट्स और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं खड़ी कर दी हैरणनीतिक रूप से क्यों महत्वपूर्ण हैं यमन के उच्च इलाके?
यमन की भौगोलिक स्थिति दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में से एक के पास है। लाल सागर और अदन की खाड़ी को जोड़ने वाला बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य वैश्विक व्यापार का एक प्रमुख मार्ग है। हूती विद्रोही लगातार इन इलाकों पर अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश में जुटे रहे हैं।
सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि यदि हूती इन उच्च क्षेत्रों पर पूरी तरह से नियंत्रण हासिल कर लेते हैं, तो वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और कच्चे तेल के परिवहन पर उनका अप्रत्यक्ष दबाव और अधिक बढ़ जाएगा। यही कारण है कि दुनिया भर की खुफिया एजेंसियां और देश इस क्षेत्र की पल-पल की गतिविधियों पर पैनी नजर बनाए हुए हैडोनाल्ड ट्रंप के रुख को लेकर क्या हैं चर्चाएं?
सामने आ रही रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका के राजनीतिक हलकों में इस बात की सुगबुगाहट है कि डोनाल्ड ट्रंप ने यमन में हूती विद्रोहियों के खिलाफ किसी भी बड़े सैन्य एक्शन या एयरस्ट्राइक को फिलहाल टालने या रोकने के संकेत दिए हैं। हालांकि, इस फैसले के पीछे के सटीक कारण अभी पूरी तरह से स्पष्ट नहीं हैं, लेकिन विशेषज्ञ इसे कूटनीतिक संतुलन साधने की एक सोची-समझी रणनीति के रूप में देख रहे हैं।क्या कहते हैं अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञ?
- क्षेत्रीय अस्थिरता: जानकारों का मानना है कि हूतियों का बढ़ता प्रभाव यमन की स्थानीय जनता के लिए संकट को और गहरा कर सकता है।वैश्विक व्यापार पर असर: लाल सागर में नाविक सुरक्षा पर लगातार मंडराते खतरे के कारण शिपिंग कंपनियों को लंबे मार्गों का चयन करना पड़ रहा है, जिससे लागत में भारी वृद्धि हुई है।कूटनीतिक उलझन: अमेरिका और उसके पश्चिमी सहयोगियों के सामने यह दुविधा है कि इस संघर्ष को सैन्य बल से रोका जाए या कूटनीतिक वार्ताओं के जरिए हल निकाला जाए।
स्थानीय आबादी पर पड़ रहा है गहरा असरइस चल रहे सत्ता संघर्ष और सैन्य तनाव के बीच यमन की आम जनता सबसे ज्यादा पिस रही है। बुनियादी सुविधाओं का अभाव, महंगाई और विस्थापन का दर्द लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को नर्क बना चुका है। मानवाधिकार संगठनों ने लगातार चेतावनी दी है कि यदि राजनीतिक गतिरोध जल्द खत्म नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में मानवीय संकट और विकराल रूप ले सकता है।
भविष्य के संकेत और वैश्विक प्रतिक्रिया
आने वाले हफ्तों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि अमेरिकी नीति में इस कथित बदलाव का मध्य पूर्व की समग्र सुरक्षा पर क्या असर पड़ता है। क्या हूती विद्रोही इस स्थिति का फायदा उठाकर अपनी स्थिति को और मजबूत करेंगे, या फिर अंतरराष्ट्रीय समुदाय एकजुट होकर कोई नया मोर्चा खोलेगा? इन सभी सवालों के जवाब आने वाले दिनों की कूटनीतिक चालों पर निर्भर करेंगे।फिलहाल, यमन की पहाड़ियों से लेकर वाशिंगटन के शक्ति गलियारों तक, हर कोई इस बात का आकलन करने में जुटा है कि मध्य पूर्व का यह सुलगता हुआ शोला आने वाले समय में कौन सा नया मोड़ लेगा।