दक्षिण एशिया की भू-राजनीति में एक बार फिर से बारूद की गंध तेज हो गई है। डूरंड लाइन के पास के इलाकों में पाकिस्तान की ओर से की गई एयरस्ट्राइक के बाद से काबुल और इस्लामाबाद के बीच का कूटनीतिक और सैन्य तनाव अब खुले संघर्ष में तब्दील होता नजर आ रहा है। अफगान तालिबान सरकार ने इस हमले पर बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए पाकिस्तान को साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि इस दुस्साहस का बदला जरूर लिया जाएगा।
सितंबर 2026 के इस घटनाक्रम ने एक बार फिर दोनों पड़ोसी देशों के रिश्तों को उस मोड़ पर ला खड़ा किया है, जहां किसी भी वक्त बड़ा सैन्य टकराव शुरू हो सकता है। अफगान प्रशासन ने पाकिस्तान की इस कार्रवाई को अपनी संप्रभुता पर सीधा हमला करार दिया है।
कुनार और पक्तिका में बरपा कहर, मासूमों की गई जान
पाकिस्तान की ओर से हाल ही में अफगानिस्तान के सीमावर्ती प्रांतों कुनार और पक्तिका में हवाई हमले (Airstrike) किए गए। शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन हमलों में भारी तबाही मची है। कुनार प्रांत में हुए हमलों की चपेट में आने से कम से कम तीन आम नागरिकों की दर्दनाक मौत हो गई, जिसमें मासूम बच्चे और महिलाएं भी शामिल हैं।
वहीं दूसरी ओर, पक्तिका प्रांत में पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों ने रिहायशी इलाकों को निशाना बनाया। यहाँ कई घरों और स्थानीय बाजारों की दुकानों को पूरी तरह से नेस्तनाबूद कर दिया गया। आम नागरिकों के घरों को निशाना बनाए जाने के बाद से स्थानीय लोगों में भारी गुस्सा है। चश्मदीदों के मुताबिक, आधी रात को हुए इन हमलों से पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई थी और लोग जान बचाने के लिए सुरक्षित स्थानों की तलाश में भागते नजर आए।
जबीहुल्लाह मुजाहिद का कड़ा बयान: 'पाकिस्तान को भुगतने होंगे गंभीर परिणाम'
अफगानिस्तान के मुख्य प्रवक्ता और सूचना एवं संस्कृति मंत्रालय के उप-मंत्री जबीहुल्लाह मुजाहिद ने इन हवाई हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की है। उन्होंने एक आधिकारिक बयान जारी करते हुए पाकिस्तान की सेना और खुफिया एजेंसी आईएसआई को कड़ी चेतावनी दी है।
मुजाहिद ने दो टूक शब्दों में कहा,
"पाकिस्तान की सेना द्वारा अफगान सीमा के भीतर की गई यह कायराना हरकत बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हमारे नागरिकों की जान का हिसाब लिया जाएगा और इस आक्रमण का उचित तथा कड़ा जवाब दिया जाएगा। अफगानिस्तान की संप्रभुता से समझौता करने वालों को इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।"
यह बयान ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच सीमा प्रबंधन और तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के ठिकानों को लेकर पहले से ही तनाव चल रहा है।
मुनीर की सेना और तालिबान आमने-सामने
पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर के नेतृत्व में हाल के महीनों में सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ अभियानों का दायरा बढ़ाया गया है। पाकिस्तानी सेना का दावा है कि वे अफगान सीमा के भीतर छिपे टीटीपी के आतंकियों को निशाना बना रहे हैं। हालांकि, काबुल प्रशासन लगातार इन दावों को खारिज करता आया है।
अफगान सरकार का कहना है कि पाकिस्तान अपनी आंतरिक असफलताओं और विफल आतंकवाद विरोधी नीतियों का ठीकरा अफगानिस्तान के सिर फोड़ना चाहता है। जानकारों का मानना है कि दोनों देशों के बीच की यह तल्खी आने वाले दिनों में और अधिक गंभीर रूप ले सकती है।
क्षेत्रीय सुरक्षा पर मंडराया बड़ा खतरा
काबुल और इस्लामाबाद के बीच इस ताजा सैन्य तनाव ने एक बार फिर क्षेत्रीय स्थिरता पर सवालिया निशान लगा दिया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस पूरे घटनाक्रम पर पैनी नजर बनाए हुए है। यदि सीमा पर यह तनातनी और बढ़ती है, तो इसका असर पूरे मध्य और दक्षिण एशिया की सुरक्षा पर पड़ सकता है।
फिलहाल, अफगान बलों को सीमावर्ती इलाकों में हाई अलर्ट पर रखा गया है, और पाकिस्तान की इस कार्रवाई के बाद से दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंध अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच चुके हैं। देश और दुनिया की तमाम बड़ी खबरों के लिए जुड़े रहिए हमारे साथ।