देश की सबसे आधुनिक और हाई-स्पीड ट्रेनों में शुमार वंदे भारत एक्सप्रेस इन दिनों अपनी समयबद्धता को लेकर चर्चा का केंद्र बनी हुई है। उत्तर प्रदेश के धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र वाराणसी में यात्रियों को एक बार फिर से रेलवे की लेट-लतीफी का शिकार होना पड़ा है। कैंट रेलवे स्टेशन से नई दिल्ली के लिए प्रस्थान करने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस रविवार को अपने निर्धारित समय से साढ़े तीन घंटे की भारी देरी से रवाना हुई। खास बात यह है कि इस रूट पर पिछले दो दिनों से लगातार ट्रेनें अपने समय पर नहीं चल पा रही हैं, जिससे यात्रियों में असमंजस और झुंझलाहट का माहौल साफ देखा जा सकता है।
लगातार दूसरे दिन बिगड़ा ट्रेनों का शेड्यूल
भारतीय रेलवे की पंक्चुअलिटी यानी समय की पाबंदी पर एक बार फिर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। शनिवार को जहां यह प्रीमियम ट्रेन लगभग एक घंटे की देरी से वाराणसी से रवाना हुई थी, वहीं रविवार को स्थिति और भी अधिक बिगड़ गई। ट्रेन संख्या 22435 (वंदे भारत एक्सप्रेस) के वाराणसी कैंट स्टेशन से छूटने का आधिकारिक समय दोपहर ठीक तीन बजे का है। लेकिन, रविवार को तमाम कयासों और इंतजार के बीच यह ट्रेन शाम को लगभग 6:30 बजे के बाद ही नई दिल्ली के लिए प्लेटफॉर्म से बाहर निकल सकी।
इस भीषण देरी के कारण यात्रियों को स्टेशन परिसर और प्लेटफॉर्म पर अपने परिवार के साथ घंटों फंसे रहना पड़ा। वीकेंड का दिन होने के कारण यात्रियों की संख्या भी अच्छी खासी थी, जिससे असुविधा का स्तर और भी अधिक बढ़ गया। बुजुर्गों, महिलाओं और छोटे बच्चों के साथ सफर कर रहे यात्रियों को इस अप्रत्याशित देरी के कारण भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
क्यों लेट हुई वंदे भारत? जानिए मुख्य वजह
मिली जानकारी के मुताबिक, इस पूरी लेटलतीफी की शुरुआत सुबह के समय ही हो गई थी। नई दिल्ली से सुबह ठीक छह बजे अपनी यात्रा शुरू करने वाली यह ट्रेन अपने तय रूट पर आगे बढ़ते हुए दोपहर बाद वाराणसी पहुंचती है। वाराणसी जंक्शन पर इस ट्रेन को सफाई, मेंटेनेंस और अन्य तकनीकी औपचारिकताओं के बाद लगभग एक घंटे के हॉल्ट के बाद वापस नई दिल्ली के लिए रवाना किया जाना होता है।
लेकिन रविवार को यही ट्रेन नई दिल्ली से ही लगभग तीन घंटे की देरी से वाराणसी कैंट स्टेशन पर पहुंची। जब ट्रेन का आगमन ही इतनी देरी से हुआ, तो वापसी की यात्रा भी समय पर शुरू होना संभव नहीं था। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, ट्रेन की री-शेड्यूलिंग और सेफ्टी चेकअप की प्रक्रिया में समय लगने के कारण इसे निर्धारित समयानुसार रवाना नहीं किया जा सका।
यात्रियों का छलका दर्द, रेलवे व्यवस्था पर उठे सवाल
वंदे भारत जैसी प्रीमियम और देश की प्रतिष्ठित ट्रेन में यात्रा करने वाले यात्रियों का कहना है कि वे इस ट्रेन का चुनाव इसलिए करते हैं ताकि वे कम समय में और सटीक समय पर अपनी मंजिल तक पहुंच सकें। सामान्य एक्सप्रेस ट्रेनों की तुलना में इस ट्रेन का किराया भी काफी अधिक होता है। ऐसे में यदि वंदे भारत जैसी ट्रेनें भी घंटों लेट होने लगेंगी, तो आम जनता का इस पर से भरोसा डगमगाना स्वाभाविक है।
- कैंट स्टेशन पर यात्रियों को किन समस्याओं का सामना करना पड़ा:
- प्लेटफॉर्म पर घंटों तक बैठकर इंतजार करना पड़ा।
- ट्रेन के आने का कोई सटीक समय शुरुआती घंटों में पता नहीं चल पा रहा था।
- खान-पान और अन्य जरूरी सुविधाओं के लिए यात्रियों को भटकना पड़ा।
- व्यावसायिक और जरूरी यात्रा पर निकले लोगों की मीटिंग्स और शेड्यूल खराब हुए।
रेलवे प्रशासन की सफाई और आगे की स्थिति
इस घटना के बाद से स्थानीय रेलवे प्रशासन पर भी लगातार दबाव बना हुआ है। हालांकि, अधिकारियों का यह तर्क है कि रूट पर चल रहे अन्य कार्यों, फॉगी सीजन या तकनीकी कारणों के चलते कई बार ट्रेनों का संचालन प्रभावित हो जाता है। लेकिन यात्रियों की मांग है कि यदि ट्रेन किसी कारणवश लेट होती है, तो उसका सटीक अपडेट डिजिटल माध्यमों से समय पर मिलना चाहिए ताकि लोगों को स्टेशन पर आकर लंबा इंतजार न करना पड़े।
फिलहाल, रेलवे के इंजीनियर और ऑपरेशनल टीम इस बात की कोशिश कर रही है कि आने वाले दिनों में वंदे भारत के इस रोटेशन को पूरी तरह से पटरी पर लाया जा सके, ताकि सोमवार और उसके बाद के दिनों में यात्रियों को इस प्रकार की किसी भी अन्य असुविधा का सामना न करना पड़े।