छत्तीसगढ़ के संवेदनशील नक्सल प्रभावित जिलों में शुमार बीजापुर से एक बड़ी सुरक्षा सफलता सामने आई है। सुरक्षाबलों की संयुक्त टीम ने खुफिया इनपुट और स्थानीय रणनीति के आधार पर एक बड़े नक्सल ठिकाने का भंडाफोड़ किया है। भैरमगढ़ थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले उतला गांव के घने जंगलों में नक्सलियों द्वारा जमीन के नीचे छिपाकर रखे गए हथियारों के जखीरे को सुरक्षाबलों ने सफलतापूर्वक बरामद कर लिया है। इस कार्रवाई से इलाके में सक्रिय माओवादियों को एक बड़ा झटका लगा है.
गुप्त सूचना और सटीक रणनीति से मिली सफलता
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह पूरी कार्रवाई बीजापुर पुलिस अधीक्षक उमेश प्रसाद गुप्ता के निर्देशन और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (नक्सल) अमन झा के नेतृत्व में अंजाम दी गई। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि हाल के दिनों में राज्य सरकार की पुनर्वास नीति और पुलिस द्वारा चलाए जा रहे जन-जागरूकता अभियानों के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। कई भटके हुए नक्सलियों द्वारा आत्मसमर्पण किए जाने के बाद पुलिस को अंदरूनी इलाकों की सटीक खुफिया जानकारियां मिल रही हैं, जिसके आधार पर यह सर्च ऑपरेशन प्लान किया गया था.
सोमवार को भैरमगढ़ थाने से जिला रिजर्व गार्ड (DRG) और स्थानीय पुलिस बल के जवानों की एक संयुक्त टुकड़ी को विशेष अभियान के तहत उतला के जंगलों में भेजा गया था। जंगल के चप्पे-चप्पे की छानबीन के दौरान जवानों को कुछ संदिग्ध गतिविधियों और जमीन की बनावट में फेरबदल के निशान मिले। इसके बाद पूरी सावधानी और सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए उस विशेष स्थल की खुदाई शुरू की गई.
जमीन के अंदर छिपा रखा था हथियारों का जखीरा
जब जवानों ने चिन्हित स्थान की खुदाई की, तो वहां से नक्सलियों द्वारा प्लास्टिक और अन्य सुरक्षित सामग्रियों में लपेटकर जमीन के नीचे दबाए गए हथियारों का एक बड़ा जखीरा बाहर निकला। बरामद की गई सामग्रियों की सूची काफी लंबी और खतरनाक है, जो यह दर्शाती है कि माओवादी किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की फिराक में थे।
बरामद हथियारों और गोला-बारूद की पूरी सूची:
- 01 एके-47 (AK-47) रायफल
- 01 .315 बोर की रायफल
- 01 शॉट रायफल
- 01 9 एमएम पिस्टल
- 02 एके-47 मैगजीन
- 45 नग एके-47 के जिंदा कारतूस
- 25 नग 9 एमएम के जिंदा राउंड
- 06 नग .315 बोर के जिंदा राउंड
- भारी मात्रा में अन्य नक्सली साजो-सामान और दैनिक उपयोग की वस्तुएं
सुरक्षाबलों की सतर्कता और आगे की कार्रवाई
जंगल के भीतर आईईडी या किसी अन्य छिपे हुए खतरे की संभावना को देखते हुए सुरक्षाबलों ने बेहद सूझबूझ और पेशेवर अंदाज में इस ऑपरेशन को पूरा किया। जवानों ने बिना किसी नुकसान के पूरे हथियारों के जखीरे को अपने कब्जे में लिया और सुरक्षित तरीके से भैरमगढ़ थाने ले आए। पुलिस प्रशासन अब इस बात की जांच कर रहा है कि इन हथियारों को यहां किसने और किस उद्देश्य से छिपाया था तथा इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोग कौन-कौन हैं.
इस बड़ी सफलता के बाद बस्तर संभाग के सुरक्षा अधिकारियों का मनोबल और ऊंचा हुआ है। पुलिस का कहना है कि छत्तीसगढ़ के अंदरूनी इलाकों से माओवाद के खात्मे के लिए सुरक्षाबलों का यह अभियान आगे भी और अधिक आक्रामक तरीके से जारी रहेगा। आम जनता और स्थानीय ग्रामीणों को भयमुक्त माहौल देने के लिए प्रशासन पूरी तरह प्रतिबद्ध है.