नूंह जिले के विकास और जल निकासी की गंभीर समस्या को दूर करने के लिए स्थानीय प्रशासन अब पूरी तरह से हरकत में नजर आ रहा है। सोमवार को नूंह के पुराने रेस्ट हाउस में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में क्षेत्रीय विधायक और कांग्रेस विधायक दल के उपनेता चौधरी आफताब अहमद ने अधिकारियों की क्लास ली। इस दौरान इलाके के रुके हुए विकास कार्यों को रफ्तार देने और किसानों की सबसे बड़ी समस्या यानी 'सैम ग्रस्त' (जलभराव वाली) भूमि के सुधार पर विशेष जोर दिया गया।
अधिकारियों के साथ मैराथन बैठक और टेलीफोनिक निर्देश
सोमवार को हुई इस अहम बैठक में विभिन्न विभागों के प्रमुख अधिकारी मौजूद रहे। इनमें योगेश शर्मा (एक्सईएन पंचायत विभाग), धीरेंद्र (एसडीओ पंचायत विभाग), नूंह और इंडरी ब्लॉक के पंचायत जेई, जयपाल (एसडीओ नगर परिषद), नगर परिषद के जेई, और धर्मेंद्र (एसडीओ एग्रीकल्चर) सहित कई अन्य अधिकारी शामिल हुए।
बैठक की शुरुआत में ही विधायक आफताब अहमद ने दो टूक शब्दों में कहा कि जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों और प्रशासनिक अमले की जिम्मेदारी है कि वे विकास कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करें। जनता लंबे समय से बुनियादी सुविधाओं का इंतजार कर रही है, और अब इसमें किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए विधायक ने पंचायत विकास के निदेशक सुशील सारवान (IAS) से फोन पर सीधे बातचीत की। उन्होंने निदेशक से आग्रह किया कि पंचायतों में अटके पड़े तमाम लंबित कार्यों को युद्ध स्तर पर पूरा कराया जाए, ताकि आम जनता को तुरंत राहत मिल सके।
बुनियादी ढांचे और ग्रामीण विकास पर चर्चा
बैठक का दायरा केवल जल निकासी तक ही सीमित नहीं था, बल्कि इसमें गांवों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर भी विस्तार से मंथन हुआ। चर्चा के मुख्य बिंदु निम्नलिखित रहे:
- गाँव के मुख्य रास्तों और संपर्क मार्गों को तुरंत प्रभाव से दुरुस्त करना।
- सार्वजनिक स्थानों जैसे कब्रिस्तानों और श्मशान घाटों की चारदीवारी (बाउंड्री वॉल) का निर्माण।
- गांवों की फिरनी और आंतरिक नालियों की साफ-सफाई व निर्माण कार्य।
- ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल और स्वच्छता व्यवस्था को पटरी पर लाना।
5000 एकड़ से अधिक बंजर होती भूमि का मुद्दा
इस पूरी बैठक का सबसे संवेदनशील और किसानों के हित से जुड़ा मुद्दा नूंह जिले में जलभराव और 'सैम ग्रस्त' भूमि का रहा। विधायक आफताब अहमद ने अधिकारियों का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि पिछले कई सालों से जलभराव के कारण जिले के दर्जनों गांवों की 5 एकड़ नहीं बल्कि 5000 एकड़ से अधिक उपजाऊ भूमि पर एक दाना फसल का नहीं उग पाया है।
किसानों को हो रहे इस भारी आर्थिक नुकसान पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि यदि समय रहते पानी की निकासी नहीं की गई, तो यह उपजाऊ जमीन पूरी तरह बंजर हो जाएगी। उन्होंने विशेष तौर पर गांगोली, आलदोका, ढेंकली, जयसिंगपुर और नौशेरा जैसे गांवों का जिक्र किया, जहां जलभराव की मार सबसे ज्यादा है और स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है।
चंडीगढ़ स्तर पर भी उठ चुकी है गूंज
यह कोई पहला मौका नहीं है जब विधायक ने इस मुद्दे को उठाया है। इससे पहले बीते महीने भी उन्होंने चंडीगढ़ में एसीएस इरीगेशन अनुराग अग्रवाल (IAS) के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक की थी। उस दौरान भी उन्होंने नूंह जिले में जलभराव की समस्या के स्थायी समाधान के लिए मजबूत नीति बनाने की मांग की थी, ताकि किसानों की आजीविका सुरक्षित हो सके।
प्रशासन की ओर से मिला ठोस आश्वासन
किसानों और आम जनता के बढ़ते दबाव और विधायक की दो टूक चेतावनी के बाद बैठक में मौजूद तमाम अधिकारियों ने सकारात्मक रुख दिखाया। अधिकारियों ने विधायक आफताब अहमद को आश्वस्त किया कि जल निकासी के कार्य को अब युद्ध स्तर पर और तेज गति से अंजाम दिया जाएगा।
प्रशासनिक अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि आगामी कुछ हफ्तों में जलभराव वाले क्षेत्रों से पानी निकालने के लिए नए पंप सेट और वाटर चैनल्स की सफाई का काम शुरू कर दिया जाएगा, ताकि जल्द से जल्द इन इलाकों को खेती के योग्य बनाया जा सके और आगामी सीजन में किसान अपनी फसल की बुवाई कर सकें।
नूंह के राजनीतिक गलियारों और ग्रामीण अंचल में इस बैठक की खासी चर्चा है। अब देखना यह होगा कि कागजी बैठकों और आश्वासनों से इतर, जमीन पर यह जल निकासी का महा-अभियान कितना असरदार साबित होता है और कब तक किसानों के चेहरों पर फिर से रौनक लौटती है।