देश की आन, बान और शान कहे जाने वाले राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे का अपमान किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। लेकिन उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक शहर आगरा से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने देशभक्तों को झकझोर कर रख दिया है। स्वतंत्रता दिवस के जश्न के ठीक पहले आगरा के सिकंदरा थाना क्षेत्र में कूड़े के ढेरों और गंदी नालियों में तिरंगे मिलने से हड़कंप मच गया था। इस मामले ने अब तूल पकड़ लिया है और हिंदू महासभा ने पुलिस-प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही आरोपियों पर मुकदमा दर्ज नहीं किया गया, तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करेंगे और जरूरत पड़ने पर आत्मदाह जैसा कदम उठाने से भी पीछे नहीं हटेंगे।
स्वतंत्रता दिवस के जश्न के बीच सामने आया सनसनीखेज मामला
घटना इसी वर्ष अगस्त के मध्य की है, जब पूरा देश आजादी के जश्न की तैयारियों में जुटा हुआ था। आगरा में भी जगह-जगह तिरंगा यात्राएं निकाली जा रही थीं, जिनमें सामाजिक संस्थाओं से लेकर राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे थे। इसी बीच 13 अगस्त को सिकंदरा थाना क्षेत्र के अंतर्गत कुछ स्थानीय लोगों ने देखा कि कूड़े के ढेरों और नालियों में कई राष्ट्रीय ध्वज पड़े हुए हैं। इस दृश्य को देखकर वहां मौजूद लोगों का गुस्सा फूट पड़ा।
सूचना मिलने पर अखिल भारत हिंदू महासभा के कार्यकर्ता तुरंत मौके पर पहुंचे। उन्होंने इसे देश के सम्मान पर सीधा हमला करार दिया और सिकंदरा थाने में लिखित तहरीर देकर तत्काल एफआईआर (FIR) दर्ज करने की मांग की। कार्यकर्ताओं का कहना था कि जिन महापुरुषों और क्रांतिकारियों ने देश की आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुति दी, उनके बलिदान का यह अपमान असहनीय है।
सीसीटीवी फुटेज सामने आने के बाद भी कार्रवाई से बच रही पुलिस?
इस पूरे प्रकरण में पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। हिंदू महासभा के पदाधिकारियों का दावा है कि उनके पास एक पुख्ता सबूत है। उनके मुताबिक, एक स्थानीय सीसीटीवी कैमरे में साफ तौर पर एक व्यक्ति तिरंगे को कूड़े के ढेर में फेंकता हुआ कैद हुआ है। संगठन के सदस्यों ने इस सीसीटीवी फुटेज और अन्य डिजिटल साक्ष्यों को पुलिस के सुपुर्द कर दिया था।
बावजूद इसके, घटना के कई दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस ने इस मामले में कोई ठोस प्राथमिकी दर्ज नहीं की। हिंदू महासभा के नेताओं का कहना है कि जब उनके पास वीडियो सबूत मौजूद है, तो पुलिस आरोपियों पर हाथ डालने से क्यों बच रही है? आखिर ऐसी कौन सी प्रशासनिक मजबूरी है जो एक राष्ट्रविरोधी कृत्य करने वाले को बचा रही है? इसी ढिलाई के चलते स्थानीय लोगों और कार्यकर्ताओं में पुलिस प्रशासन के प्रति गहरी नाराजगी व्याप्त है।
मुख्यमंत्री से मिलने की जिद और पुलिस की दबिश
मामले में कोई कानूनी कार्रवाई न होते देख हिंदू महासभा ने अपनी रणनीति बदली। कार्यकर्ताओं को जब यह सूचना मिली कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कृष्ण जन्मोत्सव के पावन अवसर पर मथुरा दौरे पर दो दिन रहने वाले हैं, तो उन्होंने सीधे मुख्यमंत्री से मिलकर उन्हें इस पूरी घटना से अवगत कराने का निर्णय लिया।
जैसे ही इस बात की भनक स्थानीय खुफिया तंत्र और पुलिस को लगी, प्रशासनिक अमले में खलबली मच गई। मुख्यमंत्री के दौरे से पहले किसी भी तरह के विवाद या विरोध प्रदर्शन को टालने के लिए पुलिस ने रातों-रात हिंदू महासभा के प्रमुख पदाधिकारियों के घरों पर दबिश देनी शुरू कर दी।
आरोप है कि पुलिस ने हिंदू महासभा युवा जिलाध्यक्ष विशाल कुमार, महिला मोर्चा की महानगर अध्यक्ष निशा ठाकुर, जिलाध्यक्ष मीरा राठौर, प्रदेश प्रवक्ता अवतार सिंह गिल और मंडल अध्यक्ष मनीष पंडित को नजरबंद करने का पूरा प्रयास किया। इस दौरान पुलिस को विशाल कुमार और निशा ठाकुर तो घर पर मिल गए, लेकिन मीरा राठौर, अवतार सिंह गिल और मनीष पंडित पुलिस को गच्चा देकर वहां से निकलने में कामयाब रहे। वर्तमान में आगरा पुलिस इन सभी की तलाश में जुटी हुई है, लेकिन संगठन के तेवर पूरी तरह से आक्रामक बने हुए हैं।
'न्याय नहीं मिला तो करेंगे आत्मदाह' - मीरा राठौर की दो टूक
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान हिंदू महासभा की जिलाध्यक्ष मीरा राठौर ने मीडिया से खुलकर बात की। उन्होंने बेहद आक्रामक और स्पष्ट शब्दों में प्रशासन को चेताया। मीरा राठौर ने कहा, "जिस तिरंगे की रक्षा के लिए देश के अनगिनत वीर सपूतों और क्रांतिकारियों ने हंसते-हंसते अपने प्राणों का बलिदान दे दिया, फांसी के फंदों को चूमा, आज उसी तिरंगे का इस तरह नालियों और कचरे के ढेर में मिलना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और शर्मनाक है।" उन्होंने आगे चेतावनी देते हुए कहा कि यदि पुलिस ने उन्हें और उनके साथियों को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलने से रोकने का कुत्सित प्रयास किया, तो वह आत्मदाह जैसा চরম कदम उठाने के लिए भी मजबूर हो जाएंगी। उन्होंने दो टूक कहा कि वह अकेली नहीं हैं, बल्कि सैकड़ों की संख्या में हिंदू महासभा के कार्यकर्ता इस लड़ाई को अंजाम तक पहुंचाने के लिए पूरी तरह तैयार बैठे हैं।
'कार्रवाई करने के बजाय कार्यकर्ताओं को रोकने में जुटी है पुलिस'
संगठन के प्रदेश प्रवक्ता अवतार सिंह गिल ने भी पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर कड़े सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस के पास घटना के पुख्ता सीसीटीवी फुटेज और साक्ष्य होने के बावजूद दोषियों पर शिकंजा कसने के बजाय, उन लोगों को रोकने की कोशिश की जा रही है जो न्याय की गुहार लगाने के लिए मुख्यमंत्री के पास जाना चाहते हैं।
अवतार सिंह गिल ने आरोप लगाया कि स्थानीय अधिकारियों की मिलीभगत के कारण ही अभी तक मुकदमा दर्ज नहीं किया गया है। उन्होंने दो टूक कहा कि यदि मथुरा में उनकी मुलाकात मुख्यमंत्री से नहीं हो पाई, तो वे अपनी आवाज को और बुलंद करते हुए लखनऊ की ओर कूच करेंगे और राज्य के मुखिया को इस कलंकित करने वाली घटना की पूरी रिपोर्ट सौंपेंगे।
प्रशासनिक चुप्पी और आगे की राह
इस संवेदनशील मामले में पुलिस और प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान या स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। एक तरफ जहां कार्यकर्ता अपने मान-सम्मान की लड़ाई लड़ने के लिए सड़कों पर उतरने को तैयार हैं, वहीं दूसरी तरफ खुफिया एजेंसियां और पुलिस अधिकारी स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक रहे हैं।
आगरा का यह मामला अब केवल एक साधारण प्रशासनिक शिकायत नहीं, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक रूप से एक बड़ा तूल पकड़ चुका है। राष्ट्रीय ध्वज के अपमान के इस मामले में आगामी दिनों में क्या नया मोड़ आएगा और क्या पुलिस आरोपियों तक पहुंच पाएगी, यह देखने वाली बात होगी। फिलहाल, कार्यकर्ता अपनी जिद पर अड़े हैं और निगाहें पूरी तरह से इस बात पर टिकी हैं कि इस मामले में मुख्यमंत्री कार्यालय का क्या हस्तक्षेप रहता है।