हरियाणा के अंबाला जिले से एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली खबर सामने आ रही है। रविवार दोपहर को धूलकोट गांव के पास एक निर्माणाधीन इमारत का लेंटर डालते समय पूरी बिल्डिंग अचानक भरभराकर नीचे जमींदोज हो गई। इस भीषण हादसे में अब तक चार मजदूरों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि मलबे के नीचे कई अन्य श्रमिकों के दबे होने की आशंका जताई जा रही है। घटना के बाद से पूरे इलाके में कोहराम मचा हुआ है और प्रशासनिक अमले में हड़कंप की स्थिति है।
लेंटर डालने के दौरान हुआ अचानक हादसा
प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय लोगों से मिली जानकारी के अनुसार, यह हादसा उस वक्त हुआ जब मजदूर इमारत की छत पर लेंटर डालने का काम कर रहे थे। अचानक निर्माणधीन ढांचे का संतुलन बिगड़ गया और देखते ही देखते पूरी इमारत मलबे के ढेर में तब्दील हो गई। घटना के वक्त इमारत के भीतर और आसपास बड़ी संख्या में श्रमिक काम में जुटे हुए थे। अचानक हुए इस हादसे से किसी को भी संभलने का मौका नहीं मिला और पलक झपकते ही लोग मलबे के नीचे दब गए।
हादसे के तुरंत बाद आसपास केव इलाकों में अफरा-तफरी मच गई। चीख-पुकार की आवाजें सुनकर स्थानीय ग्रामीण तुरंत मौके की तरफ दौड़े। बिना एक क्षण गंवाए लोगों ने अपने स्तर पर राहत और बचाव कार्य शुरू किया तथा मलबे में फंसे लोगों को निकालने का प्रयास किया। साथ ही, तुरंत पुलिस प्रशासन और आपातकालीन सेवा डायल 112 को घटना की सूचना दी गई।
40 से 50 श्रमिक कर रहे थे काम
हादसे में सुरक्षित निकाले गए और घायल हुए कुछ मजदूरों ने बताया कि जिस वक्त यह दुर्घटना हुई, उस समय इमारत के अंदर लगभग 40 से 50 श्रमिक अलग-अलग हिस्सों में काम कर रहे थे। इतनी बड़ी संख्या में मजदूरों की मौजूदगी के कारण हादसे का दायरा और भी गंभीर हो गया है। प्रशासन के लिए इस वक्त सबसे बड़ी चुनौती मलबे में दबे अन्य लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना है।
अब तक 10 घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी भारी पुलिस बल के साथ तुरंत घटनास्थल पर पहुंच गए। स्थानीय लोगों की मदद से पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए मलबे से अब तक 10 गंभीर रूप से घायल श्रमिकों को बाहर निकाला है। इन सभी घायलों को तुरंत एम्बुलेंस के जरिए अंबाला सिटी के नागरिक अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां डॉक्टरों की विशेष देखरेख में उनका इलाज युद्धस्तर पर चल रहा है। कई घायलों की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है, जिससे मरने वालों का आंकड़ा बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।
युद्धस्तर पर जारी है रेस्क्यू ऑपरेशन
मौके पर स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राहत और बचाव कार्यों में तेजी ला दी गई है। मलबे को हटाने के लिए भारी-भरकम मशीनों और जेसीबी का इस्तेमाल किया जा रहा है। प्रशासनिक अमला, पुलिस बल और एनडीआरएफ/एसडीआरएफ की तर्ज पर स्थानीय रेस्क्यू टीमें मलबे के ढेर को हटाने में जुटी हैं ताकि समय रहते अंदर फंसे हर एक व्यक्ति तक पहुंचा जा सके। अंधेरा होने से पहले ज्यादा से ज्यादा मलबे को साफ करने का प्रयास किया जा रहा है।
प्रशासन की पैनी नजर और सुरक्षा मानकों पर सवाल
- सुरक्षा इंतजामों की होगी जांच: इस भीषण हादसे के बाद निर्माण कार्यों में बरती जाने वाली सुरक्षा सावधानियों और मानकों पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
- अधिकारियों का बयान: जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने मौके का मुआयना किया है और स्पष्ट किया है कि शुरुआती प्राथमिकता मलबे में दबे लोगों को बचाना है। इसके बाद हादसे के कारणों की गहन जांच की जाएगी।
- दोषियों पर होगी कार्रवाई: प्रशासन का कहना है कि यदि इस भवन निर्माण में किसी भी तरह की लापरवाही या मानकों की अनदेखी पाई जाती है, तो संबंधित ठेकेदार और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
फिलहाल, घटनास्थल पर मातम का माहौल है और पीड़ित परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल है। प्रशासन लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन की मॉनिटरिंग कर रहा है और हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया जा रहा है। ताज़ा अपडेट्स के लिए हमारे साथ बने रहें।