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अंबाला इमारत हादसा: 15 घंटे का खौफनाक रेस्क्यू, 6 की मौत और सौदेबाजी पर फूटा गुस्सा

अंबाला इमारत हादसा: 15 घंटे का खौफनाक रेस्क्यू, 6 की मौत और सौदेबाजी पर फूटा गुस्सा

हरियाणा के अंबाला में हुए एक दिल दहला देने वाले बहुमंजिला इमारत ढहने के हादसे ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है। मलबे के नीचे दबे लोगों को बाहर निकालने के लिए प्रशासन और राहत बचाव टीमों को लगातार 15 घंटे तक संघर्ष करना पड़ा। इस भीषण त्रासदी में अब तक 6 लोगों की जान जाने की आधिकारिक पुष्टि हो चुकी है, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने न केवल स्थानीय प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि इंसानियत को शर्मसार करने वाली एक ऐसी घटना को भी जन्म दिया है जिसने जनता के गुस्से की आग को और भड़का दिया है।

15 घंटे तक चला महा-रेस्क्यू ऑपरेशन

हाइवे और घनी आबादी वाले इलाके के पास स्थित इस इमारत के अचानक भरभरा कर गिरने से चीख-पुकार मच गई थी। रात के अंधेरे में जैसे ही यह हादसा हुआ, स्थानीय लोग तुरंत मदद के लिए आगे आए। इसके तुरंत बाद राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), राज्य आपदा मोचन बल (SDRF), स्थानीय पुलिस और दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंच गईं।

रेस्क्यू ऑपरेशन कितना खतरनाक और चुनौतीपूर्ण था, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि टीमों को कंक्रीट के भारी मलबे को हटाने के लिए गैस कटर और आधुनिक हाइड्रोलिक मशीनों का सहारा लेना पड़ा। अंधेरे, धूल के गुबार और लगातार ढहते मलबे के जोखिम के बीच बचाव कर्मियों ने जान जोखिम में डालकर एक-एक शख्स को तलाशने की कोशिश की। करीब 15 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद जब मलबा हटाया गया, तो वहां से छह शव बरामद किए गए। घायलों को तुरंत नजदीकी सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी स्थिति नाजुक बनी हुई है।

मुआवजे का 'खेल' और जनता का फूटा गुस्सा

इस हादसे के बाद का सबसे बड़ा और चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब अस्पताल और घटनास्थल के पास मुआवजे को लेकर कथित तौर पर सौदेबाजी करने पहुंचे दो लोगों की स्थानीय लोगों ने जमकर धुनाई कर दी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जब पूरा शहर इस दर्दनाक हादसे के सदमे में था और पीड़ित परिवार अपने अपनों की तलाश में बिलख रहे थे, तब कुछ कथित दलाल और मध्यस्थ पीड़ित परिवार के पास पहुंचे।

बताया जा रहा है कि इन लोगों ने मामले को रफा-दफा करने और मुआवजे के रूप में महज 8 लाख रुपये में सौदा करने की कोशिश की। जैसे ही यह बात स्थानीय लोगों को पता चली, उनका गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। आक्रोशित भीड़ ने दोनों व्यक्तियों को घेर लिया और उनकी जमकर पिटाई कर दी। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि पुलिस को तुरंत हस्तक्षेप करना पड़ा और बड़ी मुश्किल से दोनों को भीड़ के चंगुल से छुड़ाकर हिरासत में लिया गया।

प्रशासनिक लापरवाही और जांच के घेरे में निर्माण

यह हादसा कोई प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि इंसानी लापरवाही का एक और जीता-जागता उदाहरण है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि जिस इमारत में यह खौफनाक हादसा हुआ, उसके निर्माण में मानकों की भारी अनदेखी की गई थी। स्थानीय लोगों का आरोप है कि अवैध तरीके से कमजोर नींव पर कई मंजिलें खड़ी कर दी गई थीं, जिसकी शिकायत कई बार संबंधित विभागों से की गई थी, लेकिन अधिकारियों ने हमेशा की तरह आंखें मूंद रखी थीं।

प्रशासन के सख्त कदम

  • उच्चस्तरीय जांच कमेटी: हादसे के कारणों की तह तक जाने के लिए जिला प्रशासन ने एक विशेष जांच समिति का गठन किया है जो यह तय करेगी कि इसके लिए कौन-कौन जिम्मेदार है।
  • बिल्डर और मालिकों पर शिकंजा: पुलिस ने इमारत के मालिकों और निर्माण से जुड़े ठेकेदारों के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या और अन्य गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है।
  • सौदेबाजी करने वालों पर कार्रवाई: 8 लाख रुपये में मामले को दबाने की कोशिश करने वाले दोनों संदिग्धों से पुलिस कड़ाई से पूछताछ कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि उनके पीछे किसका हाथ था।

पीड़ित परिवारों का दर्द और न्याय की गुहार

इस हादसे ने कई परिवारों को पूरी तरह से उजाड़ दिया है। किसी ने अपना कमाऊ बेटा खो दिया है, तो किसी के सिर से पिता का साया उठ गया है। अस्पताल के बाहर अपनों का इंतजार कर रहे परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। वे सिर्फ न्याय चाहते हैं और उन तमाम भ्रष्ट अधिकारियों तथा लापरवाह बिल्डरों के खिलाफ कड़ी सजा की मांग कर रहे हैं जिनकी अनदेखी की वजह से यह बड़ा हादसा हुआ।

अंबाला की यह घटना यह सोचने पर मजबूर करती है कि हमारे शहरों में खड़े किए जा रहे कंक्रीट के ये जंगल इंसानी जिंदगियों के लिए कितने सुरक्षित हैं। जब तक निर्माण कार्यों में भ्रष्टाचार पर लगाम नहीं लगेगी और नियमों का सख्ती से पालन नहीं होगा, तब तक ऐसे हादसों में मासूम लोगों की बलि चढ़ती रहेगी। फिलहाल, पुलिस और प्रशासन इस पूरे मामले की हर एक कड़ी को जोड़ने में जुटी है ताकि दोषियों को कानून के कटघरे में खड़ा किया जा सके।

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निवेदिता ठाकुर

निवेदिता ठाकुर

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निवेदिता ठाकुर जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती है...

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