अनूपपुर में शिक्षकों का फूटा गुस्सा, टीईटी अनिवार्यता और 5 सूत्री मांगों को लेकर निकाली रैली
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अनूपपुर में शिक्षकों का फूटा गुस्सा, टीईटी अनिवार्यता और 5 सूत्री मांगों को लेकर निकाली रैली

अनूपपुर में शिक्षकों का फूटा गुस्सा, टीईटी अनिवार्यता और 5 सूत्री मांगों को लेकर निकाली रैली

अनूपपुर जिले में अध्यापन कार्य से जुड़े शिक्षकों का आक्रोश अब खुलकर सड़कों पर नजर आने लगा है। रविवार को अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा शाखा के बैनर तले जिलेभर के शिक्षक एकजुट हुए और सरकार के खिलाफ अपनी नाराजगी दर्ज कराई। शिक्षकों का यह विरोध मुख्य रूप से सेवारत शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता को समाप्त करने और उनकी अन्य लंबित पांच सूत्रीय मांगों को पूरा करवाने को लेकर है। इस आंदोलन ने प्रशासनिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है और शिक्षा जगत में एक बार फिर से इस नीति पर गंभीर बहस छिड़ गई है।

सामतपुर से कलेक्ट्रेट तक निकाली गई आक्रोश रैली

रविवार की शाम को अनूपपुर के सामतपुर स्थित शिव मारुति मंदिर तालाब परिसर से शिक्षकों ने एक विशाल पैदल रैली निकाली। हाथों में मांग तख्तियां लिए और सरकार विरोधी नारे लगाते हुए शिक्षक कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचे। इस दौरान अनुशासन का पूरा ध्यान रखा गया, लेकिन शिक्षकों के चेहरों पर लंबे समय से चली आ रही उनकी समस्याओं के प्रति गहरी निराशा और संघर्ष का भाव साफ झलक रहा था।

कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचकर शिक्षकों ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के नाम एक विस्तृत ज्ञापन तहसीलदार वेद प्रकाश सिंह को सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से शासन को यह स्पष्ट संदेश देने का प्रयास किया गया कि यदि समय रहते इन जायज मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में इस आंदोलन को और अधिक उग्र किया जा सकता है।

सुबह से ही शुरू हो गया था विरोध प्रदर्शन और उपवास

रैली और ज्ञापन सौंपने की यह प्रक्रिया दोपहर 12 बजे से ही शुरू हो चुकी थी। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, जिलेभर के शिक्षक सामतपुर तिराहा स्थित शिव मारुति मंदिर तालाब के पास एकत्र हुए। वहां उन्होंने अपनी मांगों के समर्थन में सांकेतिक उपवास रखकर विरोध की शुरुआत की।

उपवास स्थल पर ही एक सभा का आयोजन किया गया, जिसमें वक्ताओं ने सरकार की नई नीतियों और खासकर टीईटी (टीटीई) के नियमों को पूरी तरह से औचित्यहीन करार दिया। शिक्षकों का कहना था कि जो शिक्षक बरसों से अपनी सेवाएं दे रहे हैं, उनके ऊपर इस तरह की पात्रता परीक्षा थोपना उनके अनुभव और वर्षों के समर्पण का अपमान है।

शिक्षकों की पांच प्रमुख और अहम मांगें

ज्ञापन में मुख्य रूप से पांच सूत्रीय मांगों को शामिल किया गया है, जो इस प्रकार हैं:

  • टीईटी से मुक्ति: वर्तमान में विद्यालयों में अपनी सेवाएं दे रहे सेवारत शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता से पूरी तरह मुक्त रखा जाए।
  • प्रथम नियुक्ति से सेवा गणना: अध्यापक शिक्षक संवर्ग को उनकी प्रथम नियुक्ति के दिनांक से सेवा अवधि की गणना का लाभ दिया जाए। इसी आधार पर उन्हें पेंशन, ग्रेच्युटी और अवकाश के नगदीकरण का लाभ प्रदान किया जाए।
  • ई-अटेंडेंस का विरोध: विद्यालयों में लागू की गई अव्यवहारिक 'ई-अटेंडेंस' व्यवस्था को तुरंत प्रभाव से बंद किया जाए।
  • वेतन भुगतान: सितंबर 2022 के दौरान हुए आंदोलन या हड़ताल अवधि का रुका हुआ वेतन भुगतान जल्द से जल्द कराया जाए।
  • क्रमोन्नति और समयमान वेतनमान: शिक्षकों के लंबे समय से लंबित क्रमोन्नति और समयमान वेतनमान के आदेश तत्काल प्रभाव से जारी किए जाएं।

जिला अध्यक्ष संजय निगम ने क्या कहा?

शिक्षा संघ अनूपपुर के जिला अध्यक्ष संजय निगम ने इस दौरान मीडिया से बातचीत करते हुए अपनी पीड़ा खुलकर रखी। उन्होंने कहा कि जो शिक्षक अपने जीवन के सबसे महत्वपूर्ण और ऊर्जावान वर्ष विद्यार्थियों के भविष्य को संवारने में लगा चुके हैं, उनकी वर्षों की सेवा और अध्यापन अनुभव को दरकिनार करना किसी भी सूरत में उचित नहीं है।

संजय निगम ने जोर देकर कहा, "एक शिक्षक जब सालों तक कक्षाओं में पढ़ाकर बच्चों को योग्य नागरिक बनाता है, तो उसकी योग्यता का सबसे बड़ा प्रमाण उसका अनुभव और परिणाम होते हैं। अचानक से उन पर टीईटी जैसी तलवार लटकाना उनके मनोबल को तोड़ता है और उनके सेवाकाल के प्रति अविश्वास पैदा करता है।" उन्होंने यह भी याद दिलाया कि इस मुद्दे को लेकर पहले भी कई बार संघ द्वारा ज्ञापन सौंपे जा चुके हैं, लेकिन अब तक ठोस समाधान न मिलने के कारण शिक्षकों को सड़कों पर उतरना पड़ा है।

शिक्षा जगत पर क्या पड़ेगा इसका असर?

विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के विरोध प्रदर्शन केवल अनूपपुर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि प्रदेश के कई अन्य जिलों में भी सुगबुगाहट तेज हो गई है। शिक्षकों का यह असंतोष यदि समय रहते शांत नहीं किया गया, तो इसका सीधा असर शिक्षण व्यवस्था और प्रशासनिक कार्यों पर पड़ सकता है।

फिलहाल, तहसीलदार द्वारा ज्ञापन ले लिए जाने के बाद शिक्षकों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपना प्रदर्शन समाप्त किया, लेकिन उनकी निगाहें अब राज्य सरकार और शिक्षा विभाग के अगले कदम पर टिकी हैं। क्या शासन इनकी मांगों पर विचार कर कोई बीच का रास्ता निकालेगा या यह संघर्ष और आगे बढ़ेगा, यह आने वाले कुछ दिनों में साफ हो जाएगा।

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रोली सिंह

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Writer (स्थानीय खबरें)

रोली सिंह पिछले 2 सालों से पत्रकारिता और न्यूज़ रिपोर्टिंग से जुड़ी हैं। वह लोकल न्यूज़ और लोगों से जुड़े मुद्दों को पढ़ने वालों तक पहुंचाने का काम...

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