छत्तीसगढ़ के मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी जिले से एक बेहद सकारात्मक और प्रेरणादायक पहल सामने आई है। वर्तमान समय में जब युवा पीढ़ी नशे की गिरफ्त में तेजी से फंसती जा रही है, ऐसे में उन्हें बचाने के लिए प्रशासन और समाज ने मिलकर कमर कस ली है। इसी कड़ी में जिले के शासकीय हाईस्कूल मूकादाह में 'सेवा संकल्प अभियान' के अंतर्गत एक विशेष नशामुक्ति जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों और युवाओं को नशे के भयानक दुष्प्रभावों से अवगत कराना और उन्हें एक स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना था।बदलते दौर में युवाओं को बचाना बड़ी चुनौती
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और सोशल मीडिया के इस दौर में किशोर अवस्था के बच्चों का भटकाव एक गंभीर समस्या बनता जा रहा है। किशोरावस्था एक ऐसा पड़ाव होता है जहां उत्सुकता वश या दोस्तों के प्रभाव में आकर युवा अक्सर गलत आदतों की ओर आकर्षित हो जाते हैं। मूकादाह के शासकीय हाईस्कूल में आयोजित इस कार्यक्रम में इसी बात पर विशेष जोर दिया गया कि कैसे समय रहते बच्चों को सही मार्गदर्शन देकर उन्हें इस दलदल में जाने से रोका जा सकता है।
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने खुलकर इस बात पर चर्चा की किशोरावस्था में लिए गए छोटे-छोटे गलत फैसले किस तरह से उनके पूरे भविष्य को अंधकार में धकेल सकते हैं। समाज कल्याण विभाग, नशामुक्ति केंद्र और स्थानीय पुलिस प्रशासन के अधिकारियों ने साझा रूप से इस सत्र का संचालन किया और बच्चों के साथ सीधा संवाद स्थापित किया।
विशेषज्ञों ने बताए नशे के शारीरिक और मानसिक दुष्परिणाम
कार्यक्रम में मौजूद विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को वैज्ञानिक और व्यावहारिक उदाहरणों के जरिए समझाया कि नशा केवल शरीर को ही नहीं, बल्कि व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक प्रतिष्ठा को भी पूरी तरह से तबाह कर देता है।
- शारीरिक नुकसान: नियमित रूप से नशीले पदार्थों का सेवन करने से तंत्रिका तंत्र (Nervous System) कमजोर होता है, जिससे गंभीर बीमारियां जैसे कैंसर, लिवर सिरोसिस और हृदय संबंधी समस्याएं पैदा होती हैं।
- मानसिक प्रभाव: नशे की लत से स्मरण शक्ति कमजोर होती है, डिप्रेशन, एंग्जायटी और निर्णय लेने की क्षमता में भारी गिरावट आती है।
- सामाजिक पतन: एक नशेड़ी व्यक्ति न केवल खुद को बल्कि अपने पूरे परिवार को आर्थिक और सामाजिक संकट में डाल देता है, जिससे परिवार की खुशियां छिन जाती हैं।
सामूहिक सहभागिता और जन-जागृति पर जोर
इस आयोजन की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि इसमें केवल छात्र-छात्राएं ही शामिल नहीं हुए, बल्कि बड़ी संख्या में स्थानीय अभिभावक, शिक्षक और क्षेत्र के जनप्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान इस बात पर विशेष बल दिया गया कि केवल स्कूलों में बच्चों को पढ़ा देने से नशा मुक्ति संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए पूरे समाज को एक परिवार की तरह आगे आना होगा।
अभिभावकों को यह समझाया गया कि वे अपने बच्चों के व्यवहार पर पैनी नजर रखें और उनके साथ दोस्ताना व्यवहार अपनाएं ताकि बच्चा अपनी किसी भी समस्या या उलझन को छिपाए बिना सबसे पहले अपने माता-पिता के साथ साझा करे।
सरपंच ने दिलाई नशामुक्त समाज की शपथ
कार्यक्रम के अंतिम चरण में एक बेहद भावुक और संकल्पित माहौल देखने को मिला। स्कूल परिसर में मौजूद सभी विद्यार्थियों, शिक्षकों, अभिभावकों और गणमान्य नागरिकों ने एक स्वर में नशामुक्त समाज के निर्माण का संकल्प लिया।
गाँव के सरपंच ने सभी को सामूहिक रूप से शपथ दिलाई कि वे जीवन में कभी भी किसी भी प्रकार के नशीले पदार्थों का सेवन नहीं करेंगे और अपने आस-पास के लोगों को भी इसके दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करेंगे। शपथ लेते समय बच्चों के चेहरों पर एक अलग ही आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प दिखाई दे रहा था।
सेवा संकल्प अभियान का मूल उद्देश्य
जिला प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे 'सेवा संकल्प अभियान' का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। इस अभियान के तहत केवल नशामुक्ति ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ भी लगातार जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
मूकादाह का यह कार्यक्रम इस बात का प्रमाण है कि यदि सही समय पर सही दिशा में प्रयास किए जाएं, तो समाज में सकारात्मक बदलाव लाना असंभव नहीं है। इस तरह के आयोजनों से न केवल युवाओं में जागरूकता आती है, बल्कि वे समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को भी बेहतर ढंग से समझने लगते हैं। स्थानीय ग्रामीणों ने भी प्रशासन की इस पहल की भूरी-भूरी प्रशंसा की है और उम्मीद जताई है कि ऐसे अभियान आगे भी लगातार जारी रहेंगे ताकि उनकी आने वाली पीढ़ी पूरी तरह से सुरक्षित और स्वस्थ रह सके।