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यूपी में ट्रॉमा एंड इमरजेंसी नेटवर्क से हर साल बचेगी 12 हजार जानें, जानें पूरी योजना

यूपी में ट्रॉमा एंड इमरजेंसी नेटवर्क से हर साल बचेगी 12 हजार जानें, जानें पूरी योजना

उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था में एक ऐतिहासिक बदलाव की शुरुआत हो चुकी है। सड़क दुर्घटनाएं हों या फिर अचानक दिल का दौरा पड़ने जैसी गंभीर मेडिकल इमरजेंसी, हर साल हजारों लोगों की जान सिर्फ इसलिए चली जाती है क्योंकि उन्हें सही समय पर अस्पताल और इलाज नहीं मिल पाता। इस बड़ी समस्या से निपटने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में एक ऐसी फुल-प्रूफ तकनीक आधारित व्यवस्था तैयार की जा रही है, जो चिकित्सा जगत में मील का पत्थर साबित हो सकती है। इसे नाम दिया गया है यूपीटीईएन (उत्तर प्रदेश ट्रामा एंड इमरजेंसी नेटवर्क - UPTEN)

क्या है यूपीटीईएन (UPTEN) और कैसे बदलेगी तस्वीर?

अभी तक की व्यवस्था में आपातकालीन सेवाएं बिखरी हुई थीं। कहीं एंबुलेंस समय पर नहीं पहुंच पाती थी, तो कहीं अस्पताल पहुंचने के बाद स्पेशलिस्ट डॉक्टर या बेड की कमी आड़े आ जाती थी। इस असंगठित ढांचे को दुरुस्त करने के लिए ही यूपीटीईएन को परवान चढ़ाया जा रहा है। इस एकीकृत आपात चिकित्सा नेटवर्क का मुख्य ध्येय उस अहम समय को साधना है जिसे मेडिकल साइंस की भाषा में 'गोल्डन ऑवर' यानी दुर्घटना या गंभीर बीमारी के बाद के शुरुआती 60 मिनट कहा जाता है।

यदि इस अवधि के भीतर मरीज को उचित चिकित्सा मिल जाए, तो जान बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। इस योजना के तहत बर्न, ट्रॉमा, कार्डियक, स्ट्रोक और अन्य सभी प्रकार की गंभीर इमरजेंसी सेवाओं को एक ही सिंगल डिजिटल धागे में पिरोया जाएगा।

173 एकीकृत ट्रॉमा एवं इमरजेंसी मेडिसिन यूनिट्स का होगा जाल

योजना को जमीनी स्तर पर अमलीजामा पहनाने के लिए पूरे प्रदेश में कुल 173 एकीकृत ट्रॉमा एवं इमरजेंसी मेडिसिन यूनिट्स स्थापित करने का लक्ष्य तय किया गया है। इन्हें तीन अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया है ताकि हर स्तर पर मरीजों को त्वरित सहायता मिल सके:

  • लेवल-1 एपेक्स हब: उच्च स्तरीय और अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस 11 हब बनाए जाएंगे।
  • लेवल-2 रीजनल सेंटर: क्षेत्रीय स्तर पर बेहतर इलाज के लिए 36 सेंटर विकसित होंगे।
  • लेवल-3 जिला स्तर की इकाइयां: हर जिले तक पहुंच आसान बनाने के लिए 126 यूनिट्स स्थापित की जाएंगी।

हर साल 12 हजार बहुमूल्य जिंदगियों को बचाने का लक्ष्य

स्वास्थ्य विभाग के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, इस पूरे इकोसिस्टम के चालू होने के बाद हर साल लगभग 10 हजार से 12 हजार लोगों की जान बचाई जा सकेगी। केवल अस्पतालों की संख्या बढ़ाने के बजाय इस बार पूरा जोर 'इंटीग्रेशन' पर है। यानी अस्पताल, एंबुलेंस, ट्रॉमा सेंटर, कमांड सेंटर, डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ सब एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आपस में जुड़े होंगे।

मरीज के अस्पताल पहुंचने का इंतजार करने के बजाय, अब एंबुलेंस के भीतर से ही मरीज की हालत की जानकारी अस्पताल के डॉक्टरों को मिल जाएगी, जिससे अस्पताल पहुंचते ही इलाज तुरंत शुरू हो सके। इसके लिए कुल 1,200 एडवांस्ड लाइफ सपोर्ट (ALS) एंबुलेंस को इस नेटवर्क से जोड़ा जा रहा है, जिन्हें चलता-फिरता अस्पताल कहा जा सकता है। इसके अलावा प्रदेश के सभी 18 मंडलीय स्तर के कमांड सेंटर इस पूरे नेटवर्क की निगरानी और समन्वय का जिम्मा संभालेंगे।

30 से 50 प्रतिशत तक घटेगा रिस्पांस टाइम

समय ही जिंदगी है, और इस बात को समझते हुए रिस्पांस टाइम को 30 से 50 प्रतिशत तक कम करने की रणनीति बनाई गई है। डिजिटल अलर्ट सिस्टम, रियल-टाइम नेटवर्किंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित ट्रायेज तकनीक का इस्तेमाल करके यह तय किया जाएगा कि 'सही मरीज, सही समय पर, सही डॉक्टर और सही विभाग' तक पहुंचे।

अस्पताल पहुंचने से पहले ही महत्वपूर्ण चिकित्सीय फैसले लेने के लिए करीब 10 मिनट का अतिरिक्त मार्जिन समय हासिल करने की रूपरेखा तैयार की गई है, जो क्रिटिकल केयर में गेमचेंजर साबित हो सकता है।

आम जनता की भागीदारी और 'फर्स्ट रिस्पॉन्डर नेटवर्क'

इस योजना की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें केवल सरकारी तंत्र ही नहीं, बल्कि आम नागरिकों को भी जोड़ा जा रहा है। तीन स्तरों पर फर्स्ट रिस्पॉन्डर नेटवर्क विकसित किया जा रहा है:

  • पहला स्तर: पुलिस, हाईवे पेट्रोल, एंबुलेंस चालक और फायर सर्विस के कर्मी।
  • दूसरा स्तर: होमगार्ड्स और अन्य संस्थागत स्वयंसेवक।
  • तीसरा स्तर: आम नागरिकों को बेसिक इमरजेंसी रिस्पांस की ट्रेनिंग देना, ताकि वे संकट के समय शुरुआती मदद दे सकें।

48 घंटे तक मिलेगा पूरी तरह मुफ्त आपातकालीन इलाज

कई बार गरीब परिवार आर्थिक तंगी के चलते शुरुआती समय में पैसे के अभाव में अस्पताल जाने से कतराते हैं या इलाज में देरी कर देते हैं। इस बाधा को पूरी तरह खत्म करने के लिए योगी सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। यूपीटीईएन के तहत आने वाले सभी नागरिकों को संकट की घड़ी में 48 घंटे तक पूरी तरह मुफ्त आपातकालीन उपचार उपलब्ध कराया जाएगा। इससे मरीज और उसके तीमारदारों पर से शुरुआती पैसों का दबाव खत्म हो जाएगा।

इस पूरी व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए एक अलग बजट, पारदर्शी मानव संसाधन नीति, एम्स जैसे बेहतरीन वेतनमान और विशेषज्ञ डॉक्टरों (इमरजेंसी मेडिसिन ऑफिसर्स) के लिए प्रोत्साहन (Incentives) की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जा रही है। उत्तर प्रदेश सरकार का यह कदम राज्य के स्वास्थ्य ढांचे को देश में एक मिसाल के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक बहुत बड़ा और निर्णायक कदम है।

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रोशनी गुप्ता

रोशनी गुप्ता

Writer (स्थानीय खबरें)

रोशनी गुप्ता जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती हैं।...

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