उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अतिवृष्टि और बाढ़ से प्रभावित जनपद चित्रकूट का दौरा करने के बाद लखनऊ में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक बुलाई। इस बैठक में उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि प्राकृतिक आपदा से प्रभावित हर एक परिवार तक शासन की मदद तत्काल पहुंचनी चाहिए। बाढ़ और भारी बारिश के कारण राज्य के इस धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र को काफी नुकसान उठाना पड़ा है, जिसके मद्देनजर सरकार अब युद्ध स्तर पर राहत और पुनर्वास के कार्यों को आगे बढ़ा रही है।
फसल और मकान क्षति का तुरंत सर्वे कर मुआवजा देने के आदेश
मुख्यमंत्री योगी ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि जिन किसानों की फसलें अतिवृष्टि और बाढ़ की भेंट चढ़ गई हैं, उनके नुकसान का आकलन अविलंब पूरा किया जाए। सर्वे प्रक्रिया पारदर्शी और तेज होनी ताकि पात्र किसानों को समय पर मुआवजा मिल सके। इसके साथ ही, जिन लोगों के मकान पूरी तरह या आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं, उन्हें मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत सहायता दी जाएगी। आंशिक रूप से टूटे घरों की मरम्मत के लिए भी वित्तीय सहायता मुहैया कराई जाएगी ताकि प्रभावित परिवार जल्द से जल्द अपने जीवन को सामान्य कर सकें।
व्यापारियों और मठ-मंदिरों को भी मिलेगी विशेष आर्थिक मदद
चित्रकूट धाम केवल प्रशासनिक जिला नहीं, बल्कि देश-विदेश के श्रद्धालुओं की आस्था का बड़ा केंद्र है। यहां के स्थानीय व्यापारियों और प्राचीन मठ-मंदिरों को बाढ़ की वजह से भारी आर्थिक क्षति उठानी पड़ी है। मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से इन दोनों वर्गों का जिक्र करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि व्यापारियों के नुकसान का सही आकलन कर उन्हें विशेष पैकेज या सहायता दी जाए। इसके अलावा, बाढ़ के पानी से प्रभावित मठ-मंदिरों की मरम्मत का काम भी तुरंत शुरू किया जाएगा, जिसके संरक्षण में राज्य सरकार पूरा सहयोग करेगी।
48 घंटे के भीतर राहत किट वितरण के सख्त निर्देश
राहत सामग्रियों के वितरण में किसी भी तरह की सुस्ती या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा है कि शेष बची हुई सभी राहत किटों का वितरण अगले 48 घंटों के भीतर प्रभावितों के बीच सुनिश्चित किया जाए। प्रशासन के अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे दफ्तरों में बैठने के बजाय सीधे जमीन पर उतरें और प्रभावित बस्तियों व गांवों में लगातार मौजूद रहकर जनता की हरसंभव मदद करें।
स्वास्थ्य सेवाओं पर विशेष नजर, संक्रामक रोगों से निपटने की तैयारी
बाढ़ का पानी उतरने के बाद सबसे बड़ा खतरा बीमारियों के फैलने का होता है। इसे भांपते हुए स्वास्थ्य विभाग को हाई अलर्ट पर रखा गया है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी के नेतृत्व में मेडिकल टीमें बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में कैंप लगाकर लगातार निगरानी कर रही हैं। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि लोगों को शुद्ध पेयजल और साफ-सफाई की सुविधा प्राथमिकता के आधार पर मिले, ताकि किसी भी तरह की महामारी या संक्रामक बीमारी को फैलने से रोका जा सके।
मंदाकिनी नदी का होगा कायाकल्प, कैचमेंट एरिया से हटेगा अतिक्रमण
पवित्र मंदाकिनी नदी की निर्मलता और स्वच्छता को बनाए रखना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। मुख्यमंत्री ने कड़े निर्देश दिए हैं कि किसी भी स्थिति में सीवर या नालों का गंदा पानी मंदाकिनी में नहीं गिरना चाहिए। इसके लिए पर्यटन, सिंचाई और नगर विकास विभाग को मिलकर एक ठोस कार्ययोजना तैयार करने को कहा गया है। साथ ही, नदी के कैचमेंट एरिया (जलग्रहण क्षेत्र) में जितने भी अवैध अतिक्रमण हैं, उनकी पहचान कर उन्हें कानूनी तरीके से हटाने की कार्रवाई जल्द शुरू होगी। नदी पर बने फुट ओवर ब्रिज का सेफ्टी ऑडिट भी पीडब्ल्यूडी विभाग द्वारा कराया जाएगा ताकि भविष्य में किसी प्रकार की दुर्घटना की गुंजाइश न बचे।
बुनियादी ढांचे और भविष्य की रणनीति पर जोर
- एयरपोर्ट मार्ग का निर्माण: चित्रकूट धाम से एयरपोर्ट जाने वाले मार्ग के निर्माण कार्य में देरी पर नाराजगी जताते हुए सीएम ने इसे विजयादशमी से पहले हर हाल में पूरा करने को कहा है।
- पशुधन सुरक्षा: गोशालाओं की विशेष जांच के निर्देश दिए गए हैं ताकि बाढ़ और बारिश के बीच बेजुबान पशुओं के लिए चारे और स्वास्थ्य की कोई कमी न हो। साथ ही लंपी वायरस से बचाव के इंतजाम करने को भी कहा गया है।
- दीर्घकालिक कार्ययोजना: भविष्य में ऐसी आपदाओं से होने वाले नुकसान को न्यूनतम करने के लिए एक मजबूत लॉन्ग-टर्म प्लान तैयार किया जा रहा है, जिसमें प्राकृतिक जल निकासी और नदी प्रवाह को दुरुस्त करने पर विशेष ध्यान होगा।
सरकार के इन ताबड़तोड़ और सख्त निर्देशों से साफ है कि प्रशासन चित्रकूट की जनता को इस संकट से उबारने के लिए पूरी तरह मुस्तैद है और राहत कार्यों की मॉनिटरिंग खुद मुख्यमंत्री कार्यालय स्तर से की जा रही है।