चंदौली जिले के ऐतिहासिक और आध्यात्मिक केंद्र कहे जाने वाले चहनियां विकास खंड स्थित रामगढ़ मठ में आज गुरुवार, 10 सितंबर 2026 को महाकपालिक योगीराज अघोराचार्य बाबा कीनाराम जी का 427वां जन्मोत्सव अत्यंत भव्यता और उल्लास के साथ आरंभ हो गया है। सूर्य की पहली किरण के साथ ही पूरा रामगढ़ क्षेत्र और मठ परिसर 'हर-हर महादेव' के गगनभेदी जयकारों से गूंज उठा। दूर-दराज से पहुंचे लाखों श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने इस आयोजन को एक महाकुंभ का रूप दे दिया है।
दुल्हन की तरह सजा रामगढ़ मठ, अलौकिक है छटा
जन्मोत्सव के अवसर पर सकलडीहा तहसील के अंतर्गत आने वाले रामगढ़ स्थित बाबा कीनाराम के इस पवित्र मठ को किसी दुल्हन की भांति सजाया गया है। आकर्षक विद्युत झालरों, रंग-बिरंगी रोशनी और फूलों की सजावट ने रात के समय मठ की खूबसूरती में चार चांद लगा दिए हैं। उत्तर प्रदेश के अलावा बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश और देश के अन्य हिस्सों से भी बड़ी संख्या में अघोर पंथ के अनुयायी और श्रद्धालु यहाँ पहुंच रहे हैं। हर कोई बाबा कीनाराम के दर्शन कर अपने जीवन को धन्य करने के लिए आतुर दिखाई दे रहा है।
तड़के सुबह किनेश्वर महादेव का जलाभिषेक और शंखनाद
उत्सव के पहले दिन गुरुवार की सुबह तड़के ही कांवड़ियों और श्रद्धालुओं ने किनेश्वर महादेव के पवित्र शिवलिंग पर श्रद्धा के साथ जलाभिषेक किया। इसके बाद मठ के वरिष्ठ पदाधिकारियों और पुजारियों द्वारा विधि-विधान से विशेष पूजन-अर्चन, हवन और महाआरती का आयोजन किया गया।
घंटों, घड़ियालों और शंखनाद की गूंज से पूरा वातावरण पूरी तरह से आध्यात्मिक हो गया है। मठ परिसर में सुबह से ही रामचरितमानस के अखंड पाठ और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों का दौर अनवरत जारी है। वहीं, स्थानीय महिलाओं द्वारा पारंपरिक सोहर और मंगलगीत गाए जाने से यहाँ का माहौल पूरी तरह से लोक-संस्कृति और भक्ति के रंग में रंग गया है।
सांस्कृतिक संध्या में जमेगा रंग, गूंजेंगे भोजपुरी सुर
धार्मिक और आध्यात्मिक आयोजनों के साथ-साथ इस बार जन्मोत्सव में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी विशेष आकर्षण रखा गया है। आज रात ठीक आठ बजे से एक भव्य सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया जाएगा।
इस रंगारंग कार्यक्रम में भोजपुरी के लोकप्रिय और मशहूर गायक समर सिंह अपनी पूरी टीम के साथ मंच पर उतरेंगे और अपनी बेहतरीन प्रस्तुतियों से दर्शकों का मन मोह लेंगे। इस कार्यक्रम को लेकर विशेषकर युवाओं और स्थानीय संगीत प्रेमियों में जबर्दस्त उत्साह देखा जा रहा है। सुरक्षा और अनुशासन के दायरे में होने वाले इस सांस्कृतिक कार्यक्रम के लिए विशेष मंच बनाया गया है.
प्रशासन और पुलिस की कड़ी सुरक्षा व्यवस्था
लाखों की संख्या में श्रद्धालुओं के जुटने की संभावना को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस महकमा पूरी तरह से मुस्तैद और अलर्ट मोड में है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों ने रामगढ़ के मल्टीपरपज हॉल में एक उच्चस्तरीय बैठक कर सुरक्षा व्यवस्था की गहन समीक्षा की थी।
- प्रमुख सुरक्षा और प्रशासनिक इंतजाम:
- मठ परिसर के चारों तरफ मजबूत पुलिस बैरिकेडिंग की गई है।
- भीड़ को नियंत्रित करने और दर्शन-पूजन में सहयोग के लिए करीब 250 प्रशिक्षित स्वयंसेवक मुस्तैद हैं।
- चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल और खुफिया एजेंसियों के जवान तैनात हैं।
- सीसीटीवी कैमरों के जरिए चंचल गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है।
24 घंटे बिजली, पानी और चिकित्सा की पुख्ता सुविधाएं
मेले में आने वाले श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए जिला प्रशासन और मठ प्रबंधन ने मिलकर व्यापक इंतजाम किए हैं।
परिसर में चौबीस घंटे शुद्ध पेयजल, निरंतर साफ-सफाई और निर्बाध विद्युत आपूर्ति की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। जगह-जगह पर स्काउट-गाइड दल द्वारा श्रद्धालुओं को ठंडा पानी पिलाया जा रहा है। स्वास्थ्य सेवाओं के लिहाज से चहनियां स्वास्थ्य केंद्र की एक विशेष मेडिकल टीम मौके पर मौजूद है।
किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए:
- एंबुलेंस सेवा 24 घंटे उपलब्ध है।
- अग्निशामक वाहन (फायर ब्रिगेड) तैनात किए गए हैं।
- श्रद्धालुओं के लिए चेंजिंग रूम बनाए गए हैं।
- कानून और व्यवस्था के लिए मुख्य कंट्रोल रूम और अपनों से बिछड़े लोगों के लिए 'खोया-पाया केंद्र' भी सक्रिय कर दिए गए हैं।
सुरक्षा कारणों से झूलों के संचालन पर पूर्ण प्रतिबंध
मौसम के मिजाज और भारी भीड़भाड़ से जुड़ी सुरक्षा प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए इस वर्ष मेले में किसी भी प्रकार के झूलों के संचालन पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोपरि है, इसलिए नियमों का सख्ती से पालन कराया जा रहा है।
भक्ति और आस्था का अनूठा संगम
बाबा कीनाराम का यह 427वां जन्मोत्सव न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह आपसी सौहार्द और सांस्कृतिक एकता का भी एक बड़ा उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है। उत्तर भारत के प्रमुख मेलों में शुमार इस आयोजन में आने वाले हर श्रद्धालु के चेहरे पर एक अलग ही आध्यात्मिक संतोष और बाबा के प्रति अटूट विश्वास साफ झलकता है। आने वाले दिनों में और भी बड़े धार्मिक कार्यक्रमों के साथ यह उत्सव अपनी पूरी भव्यता के साथ जारी रहेगा।