अघोरपीठ के आदिकेंद्र और संत शिरोमणि बाबा कीनाराम की पावन स्थली पर इन दिनों भक्ति और कला का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। अवसर था बाबा कीनाराम के 427वें जन्मोत्सव का, जिसमें देश के कोने-कोने से पहुंचे श्रद्धालुओं ने हाजिरी लगाकर आशीर्वाद प्राप्त किया। इस भव्य और अलौकिक आयोजन के दौरान एक ऐसा पल आया जब मशहूर शायर और गजलकार भैया लाल पाठक की प्रस्तुति ने वहां मौजूद हर एक शख्स को मंत्रमुग्ध कर दिया।
भैया लाल पाठक की गजलों ने खींचा सबका ध्यान
जन्मोत्सव के इस पावन पर्व पर अपनी कला का प्रदर्शन करते हुए प्रसिद्ध गजलकार भैया लाल पाठक ने जब मंच संभाला, तो पूरा वातावरण अध्यात्म और रस में डूब गया। उनकी सुरीली आवाज और दिल को छू लेने वाले कलात्मक अंदाज ने श्रोताओं को पूरी तरह से मोह लिया। अपनी प्रस्तुति के बाद उन्होंने अपनी गहरी प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि इस पावन धरती पर आकर उन्हें जो मानसिक शांति और ऊर्जा मिली है, उसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है।
"मुझे बाबा के राम जी का आशीर्वाद प्राप्त हुआ है। मैं अपने आपको बेहद धन्य समझ रहा हूं। बाबा जी का यह आशीर्वाद न केवल मेरे लिए, बल्कि मेरे पूरे परिवार और यहां बैठे प्रत्येक श्रद्धालु के लिए परम सौभाग्य की बात है। जय बाबा कीनाराम!" - भैया लाल पाठक (प्रसिद्ध गजलकार)
उनकी इन पंक्तियों में बाबा के प्रति अगाध श्रद्धा साफ झलक रही थी। कार्यक्रम में मौजूद हर भक्त ने उनके सुर में सुर मिलाते हुए 'जय बाबा कीनाराम' के जयकारे लगाए, जिससे पूरा परिसर गूंज उठा।
ग्राम रईया के प्रधान प्रत्याशी मुकेश साहनी ने भी टेका मत्था
इस भव्य जन्मोत्सव समारोह में केवल कला जगत की हस्तियां ही नहीं, बल्कि आम जनता और स्थानीय प्रतिनिधि भी भारी संख्या में पहुंचे। ग्राम रईया से आए ग्राम प्रधान प्रत्याशी मुकेश साहनी ने भी मठ में पहुंचकर बाबा कीनाराम के दरबार में हाजिरी लगाई। उन्होंने विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और बाबा का आशीर्वाद प्राप्त किया।
मुकेश साहनी ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि इस पवित्र स्थल पर आकर उन्हें आत्मिक संतोष मिला है। उन्होंने क्षेत्र की सुख-समृद्धि और शांति के लिए बाबा कीनाराम से प्रार्थना की। उनके साथ आए अन्य समर्थकों ने भी मठ की व्यवस्थाओं की सराहना की और इस ऐतिहासिक जन्मोत्सव का हिस्सा बनने पर गर्व महसूस किया।
अघोर परंपरा और 427वें जन्मोत्सव का महत्व
बाबा कीनाराम का जन्मोत्सव हर साल बड़े ही धूमधाम और अनुशासित तरीके से मनाया जाता है। वर्ष 2026 का यह 427वां जन्मोत्सव अपने आप में बेहद खास रहा। देश-विदेश से आने वाले अघोर अनुयायी इस दिन का पूरे साल इंतजार करते हैं। मठ परिसर में विशेष अनुष्ठान, हवन और सत्संग का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों की संख्या में लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया।
- भव्य सजावट: मठ परिसर को फूलों और रंग-बिरंगी लाइटों से दुल्हन की तरह सजाया गया था।
- सुरक्षा और व्यवस्था: भारी भीड़ को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और मठ के स्वयंसेवकों द्वारा पुख्ता इंतजाम किए गए थे।
- सांस्कृतिक कार्यक्रम: भैया लाल पाठक जैसी हस्तियों की प्रस्तुतियों ने इस आयोजन को एक सांस्कृतिक ऊंचाई प्रदान की।
भक्तों में दिखा भारी उत्साह
संत बाबा कीनाराम के विचारों और उनके द्वारा दिखाए गए मार्ग पर चलने का संकल्प लेकर आए श्रद्धालुओं के चेहरे पर एक अलग ही चमक दिख रही थी। हर कोई बाबा के चरणों में अपनी हाजिरी लगाकर खुद को कृतार्थ मान रहा था। भैया लाल पाठक की गजलों और मुकेश साहनी जैसी स्थानीय शख्सियतों की उपस्थिति ने इस साल के जन्मोत्सव को और भी ज्यादा यादगार बना दिया है।
यह आयोजन एक बार फिर यह साबित कर गया कि आस्था, कला और लोक कल्याण का यह केंद्र आज भी उतनी ही श्रद्धा के साथ लोगों को जोड़ रहा है जितना सदियों पहले था। 'जय बाबा कीनाराम' के नारों के साथ यह जन्मोत्सव इतिहास के पन्नों में एक और सुनहरा अध्याय जोड़ गया।