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56 साल बाद बरेका में होगा ऐतिहासिक बदलाव, पहली बार जलेगा एक सिर वाला रावण

56 साल बाद बरेका में होगा ऐतिहासिक बदलाव, पहली बार जलेगा एक सिर वाला रावण

भारतीय संस्कृति में पर्व और त्यौहारों का अपना एक अलग ही महत्व होता है, और जब बात विजयादशमी यानी दशहरा की हो, तो देश के कोने-कोने में उत्साह का माहौल देखने को मिलता है। हर साल रावण दहन की परंपरा को देखने के लिए लाखों की भीड़ उमड़ती है, लेकिन क्या कभी ऐसा हुआ है कि दशकों पुरानी परंपरा को अचानक बिल्कुल नया रूप दे दिया जाए? उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित बरेका (बनारस रेल इंजन कारखाना) के केंद्रीय खेल मैदान में इस बार कुछ ऐसा ही अभूतपूर्व और ऐतिहासिक बदलाव होने जा रहा है, जिसकी चर्चा पूरे इलाके में सुर्ख़ियों में बनी हुई है।56 साल पुरानी परंपरा में ऐतिहासिक फेरबदल

वाराणसी के बरेका केंद्रीय खेल मैदान में विजयादशमी का आयोजन इस बार इतिहास रचने के लिए तैयार है। यहां वर्ष 1970 से लगातार यानी पिछले 56 सालों से पारंपरिक रूप से दस सिर वाले रावण के विशाल पुतले का दहन किया जाता रहा है। इस भव्य आयोजन को देखने के लिए न सिर्फ वाराणसी बल्कि आसपास के कई जिलों से भी भारी संख्या में दर्शक पहुंचते हैं। लेकिन इस साल यानी 2026 के दशहरा पर्व पर दर्शकों को एक बिल्कुल नया और हैरान करने वाला नजारा देखने को मिलेगा। इस बार दशकों पुरानी परंपरा को बदलते हुए पहली बार दस सिर के बजाय सिर्फ 'एक सिर' वाले रावण के पुतले का दहन किया जाएगा।

आयोजकों और कारीगरों का मानना है कि समय के साथ हर चीज में नयापन और आधुनिकता की जरूरत होती है। इसी सोच के तहत इस बार रावण के स्वरूप को पूरी तरह से रीडिजाइन किया गया है, जो इस साल के उत्सव का सबसे बड़ा और मुख्य आकर्षण बनने वाला है।

भव्य आकार और अनूठी निर्माण शैली

भले ही रावण के सिरों की संख्या इस बार कम कर दी गई हो, लेकिन उसके कद और भव्यता में कोई कमी नहीं की गई है। बल्कि इसे और अधिक आकर्षक व भव्य बनाया गया है। इस बार बरेका के मैदान में जो रावण का पुतला खड़ा किया जाएगा, उसकी कुल ऊंचाई 70 फीट होगी। हैरानी की बात यह है कि अकेले रावण का सिर ही करीब 20 फीट का तैयार किया जा रहा है, जो दूर से ही देखने में बेहद भव्य लगेगा।

रावण के साथ-साथ उसके भाइयों के पुतलों को भी विशाल रूप दिया जा रहा है। लंकापति रावण के भाई कुंभकर्ण का पुतला 65 फीट ऊंचा और उसके पुत्र मेघनाद का पुतला 60 फीट ऊंचा तैयार किया जा रहा है। इन विशालकाय पुतलों को जमीन पर खड़ा करना और उन्हें सुरक्षित रखना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं होता, इसलिए इस बार इनके निर्माण की इंजीनियरिंग और ढांचे (Structure) में भी बड़ा बदलाव किया गया है ताकि इन्हें मौसम की मार से बचाया जा सके।

मौसम से सुरक्षा और नया परिधान

दशहरे के आसपास अक्सर मौसम के मिजाज को लेकर असमंजस बना रहता है। बारिश की संभावना को देखते हुए इस बार पुतलों के निर्माण में विशेष सावधानी बरती जा रही है। आयोजकों ने बताया कि बारिश के जोखिम से पुतलों को सुरक्षित रखने के लिए इस बार उनके परिधान (वस्त्र) में भी बड़ा बदलाव किया गया है।

रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के भव्य परिधानों को तैयार करने के लिए करीब 350 मीटर चमकदार और मजबूत रेशमी कपड़े का उपयोग किया जा रहा है। जानकारों का कहना है कि रेशमी कपड़े और बदली हुई निर्माण शैली की वजह से यदि बारिश जैसी कोई स्थिति बनती भी है, तो भी पुतलों को अपेक्षाकृत सुरक्षित रखने में काफी मदद मिलेगी और उनका आकर्षण कम नहीं होगा।

सामग्री और कारीगरों की कड़ी मेहनत

इतने विशालकाय पुतलों को आकार देना कोई आसान काम नहीं है। इसके लिए पिछले कई हफ़्तों से देश के कुशल कारीगर दिन-रात मेहनत करने में जुटे हुए हैं। लगभग 10 अनुभवी कारीगरों की टीम पूरी तन्मयता के साथ पुतलों को अंतिम रूप देने में लगी हुई है।

इन तीनों विशाल पुतलों को मजबूती देने के लिए भारी मात्रा में पारंपरिक और आधुनिक सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है:

  • बांस: लगभग 150 मजबूत बांस के टुकड़ों का इस्तेमाल ढांचे को मजबूत बनाने के लिए किया गया है।
  • गत्ता: पुतलों के बाहरी हिस्से और अंगों को आकार देने के लिए करीब 500 किलो गत्ते का उपयोग हो रहा है।
  • तांत और रंग: पुतलों को बांधने और कसने के लिए 100 किलो तांत तथा उन्हें आकर्षक दिखाने के लिए लगभग 25 लीटर रंगों का प्रयोग किया जा रहा है।

कारीगरों का कहना है कि पुतलों के ढांचे को लोहे और बांस के सहारे इस तरह मजबूत किया गया है कि इन्हें मैदान में खड़ा करना पिछली बार की तुलना में काफी आसान हो जाएगा। आमतौर पर बारिश या तेज हवाओं के कारण पुतलों के क्षतिग्रस्त होने का जो डर बना रहता था, उसे इस बार की नई तकनीक से काफी हद तक कम कर दिया गया है। इन पुतलों को दशहरे के मुख्य कार्यक्रम से करीब तीन दिन पहले ही केंद्रीय खेल मैदान में पूरी शान के साथ खड़ा कर दिया जाएगा।

कार्यक्रम की रूपरेखा और मुख्य आकर्षण

विजयादशमी के इस महाआयोजन की रूपरेखा तैयार कर ली गई है। बरेका के केंद्रीय खेल मैदान में मुख्य कार्यक्रम शाम करीब 4:30 बजे से शुरू होगा। शुरुआत पारंपरिक रूपक मंचन के साथ होगी। लगभग ढाई घंटे तक चलने वाले इस रूपक मंचन में भगवान श्री राम के वनगमन से लेकर, सीता हरण, लंका दहन और अंत में रावण वध तक के तमाम प्रसंगों को बेहद खूबसूरती के साथ पांच अलग-अलग दृश्यावलियों में प्रस्तुत किया जाएगा।

इस सांस्कृतिक और धार्मिक मंचन के तुरंत बाद, रात करीब 7:30 बजे सत्य की असत्य पर जीत का प्रतीक यानी रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के भव्य पुतलों का दहन किया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया को सुचारू और त्रुटिहीन बनाने के लिए 18 अक्टूबर को केंद्रीय खेल मैदान में पूरे कार्यक्रम का फाइनल पूर्वाभ्यास (Rehearsal) आयोजित किया जाएगा। रूपक निदेशक एसडी सिंह की कड़ी देखरेख में कलाकार अपने संवाद, गीत, संगीत, मंच व्यवस्था और विभिन्न दृश्यावलियों का कड़ा अभ्यास कर रहे हैं ताकि दर्शकों को एक बेहतरीन और यादगार प्रस्तुति देखने को मिले।

आयोजकों और निर्देशकों का क्या है कहना?

विजयादशमी समिति के महामंत्री अनूप सिंह वत्स ने इस बदलाव के पीछे के मुख्य उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए बताया कि, "दशहरा समारोह में हर साल कुछ नयापन होना चाहिए ताकि दर्शकों का उत्साह बना रहे। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए इस बार परंपरा में थोड़ा बदलाव करते हुए एक सिर वाला रावण का पुतला तैयार कराया जा रहा है, जो सुरक्षा और सुंदरता दोनों दृष्टियों से बेहतर है।"

वहीं, रूपक निदेशक एसडी सिंह ने जानकारी दी कि करीब ढाई घंटे के शानदार मंचन के बाद भव्य आतिशबाजी के साथ तीनों पुतलों का दहन संपन्न होगा। बरेका का यह दशहरा मेला अपनी भव्यता और अनुशासन के लिए पूरे वाराणसी में प्रसिद्ध है। यही वजह है कि यहां केवल स्थानीय लोग ही नहीं, बल्कि आसपास के ग्रामीण और शहरी इलाकों से भी हजारों की संख्या में लोग परिवार सहित पहुंचते हैं।

इस बार 56 साल के इतिहास को पीछे छोड़ते हुए पहली बार नजर आने वाला 'एक सिर वाला भव्य रावण' इस बार के दशहरा उत्सव का मुख्य केंद्र बिंदु रहने वाला है, जिसे देखने के लिए जनता में अभी से भारी उत्सुकता और उत्साह देखा जा रहा है।

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रोली सिंह

रोली सिंह

Writer (स्थानीय खबरें)

रोली सिंह पिछले 2 सालों से पत्रकारिता और न्यूज़ रिपोर्टिंग से जुड़ी हैं। वह लोकल न्यूज़ और लोगों से जुड़े मुद्दों को पढ़ने वालों तक पहुंचाने का काम...

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