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रामनगर किला संपत्ति विवाद: विष्णु प्रिया की अर्जी खारिज, जानें क्या है पूरा मामला

रामनगर किला संपत्ति विवाद: विष्णु प्रिया की अर्जी खारिज, जानें क्या है पूरा मामला

वाराणसी के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक केंद्र कहे जाने वाले रामनगर किला, नदेसर पैलेस और बनारस स्टेट की बहुमूल्य संपत्तियों के स्वामित्व को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई में एक अहम मोड़ आ गया है। सिविल जज द्वितीय (वरिष्ठ खंड) नेहा सिंह की अदालत ने इस मामले में चल रही सुनवाई के दौरान एक बड़ा फैसला सुनाते हुए विष्णु प्रिया की उस अर्जी को खारिज कर दिया है, जिसमें मुकदमे को प्रारंभिक स्तर पर ही समाप्त करने की मांग की गई थी। इस फैसले के बाद अब मूल वाद पर आगे की कानूनी कार्यवाही का रास्ता साफ हो गया है और अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 21 सितंबर की तारीख मुकर्रर की है।

साल 2011 से चल रहा है मालिकाना हक का यह कानूनी संघर्ष

काशी राजपरिवार की इन ऐतिहासिक संपत्तियों पर अधिकार को लेकर यह विवाद कोई नया नहीं है। इसकी नींव आज से करीब डेढ़ दशक पहले यानी वर्ष 2011 में पड़ी थी। पूर्व काशी नरेश विभूति नारायण सिंह के पुत्र अनंत नारायण सिंह ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने अपने मूल वाद में खुद को दिवंगत महाराज का ज्येष्ठ पुत्र बताते हुए रामनगर किला, बनारस स्टेट की गद्दी और इससे जुड़ी तमाम संपत्तियों पर अपना एकमात्र कानूनी स्वामित्व होने का दावा ठोका था।

अनंत नारायण सिंह की ओर से दायर किए गए इस वाद में केवल मालिकाना हक की ही मांग नहीं की गई थी, बल्कि विष्णु प्रिया समेत अन्य संबंधित पक्षों को रामनगर किला परिसर से बेदखल करने, स्थायी निषेधाज्ञा (Permanent Injunction) जारी करने और हर्जाने के तौर पर क्षतिपूर्ति की मांग भी शामिल थी। तब से लेकर आज तक यह मामला लगातार न्यायिक दायरे में बना हुआ है और काशी के हलकों में इस पर विशेष नजर रखी जा रही है।

वर्ष 2025 में विष्णु प्रिया ने दाखिल की थी यह विशेष अर्जी

इस कानूनी ड्रामे में नया मोड़ तब आया जब वर्ष 2025 में विष्णु प्रिया ने अदालत में एक महत्वपूर्ण अर्जी दाखिल की। इस अर्जी के जरिए उन्होंने अदालत से गुहार लगाई थी कि अनंत नारायण सिंह द्वारा दायर किए गए मूल मुकदमे को शुरुआती स्तर पर ही (Reject at the Threshold) खारिज कर दिया जाए। अपनी इस मांग के समर्थन में उन्होंने हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों और देश की सर्वोच्च अदालतों की पुरानी न्यायिक नजीरों (Precedents) का हवाला दिया था।

विष्णु प्रिया के अधिवक्ताओं की ओर से यह मजबूत दलील दी गई थी कि वह भी पूर्व काशी नरेश विभूति नारायण सिंह की पुत्री हैं। इस नाते पारिवारिक संपत्तियों में उनका भी उतना ही कानूनी और नैतिक उत्तराधिकार बनता है जितना कि अन्य उत्तराधिकारियों का। उनका तर्क था कि मौजूदा कानूनों के तहत किसी बेटी के अधिकारों को इस तरह से नजरअंदाज नहीं किया जा सकता और उनके कानूनी हिस्से की रक्षा की जानी चाहिए।

1949 के ऐतिहासिक विलय समझौते की भी दी गई दलीलें

दूसरी तरफ, अनंत नारायण सिंह के पक्ष ने विष्णु प्रिया की इस अर्जी का कड़ा विरोध किया। अदालत में सुनवाई के दौरान उनके वकीलों ने 9 सितंबर 1949 को भारत सरकार के साथ तत्कालीन राजपरिवार का जो विलय समझौता (Merjer Agreement) हुआ था, उसका हवाला दिया। इस समझौते के आधार पर संपत्तियों के स्वामित्व, उत्तराधिकार के नियमों और मूल वाद की पोषणीयता (Maintainability) पर लंबी बहस हुई। दोनों पक्षों की ओर से पेश किए गए दस्तावेजों, ऐतिहासिक संधियों और कानूनी बारीकियों को गहराई से परखने के बाद अदालत ने विष्णु प्रिया की उस मांग को नामंजूर कर दिया जिसमें मुकदमे को तुरंत खारिज करने की गुहार लगाई गई थी।

अब आगे क्या होगा? 21 सितंबर को टकटकी लगाए बैठे हैं लोग

अर्जी खारिज होने का सीधा मतलब यह है कि रामनगर किला और बनारस स्टेट की संपत्तियों का मालिकाना हक किसके पास रहेगा, इस पर से पर्दा अभी नहीं उठा है। यह कानूनी विवाद अभी थमा नहीं है, बल्कि मूल वाद पर सुनवाई पूरी क्षमता के साथ आगे बढ़ेगी। चूंकि यह मामला काशी की गरिमा, इतिहास और शाही विरासत से जुड़ा हुआ है, इसलिए शहर के प्रबुद्ध वर्ग और कानूनविदों की इस पर गहरी नजर टिकी हुई है।

अालत की ओर से इस बहुचर्चित मामले में अगली सुनवाई के लिए 21 सितंबर की तारीख तय की गई है। इस आगामी तारीख पर अदालत में कौन से नए दस्तावेज रखे जाते हैं और न्याय की देवी इस शाही विरासत के असली वारिस को लेकर क्या रुख अपनाती है, यह देखने वाला वक्त ही बताएगा। फिलहाल, सभी की निगाहें 21 सितंबर की उस तारीख पर टिक गई हैं जो इस लंबी कानूनी खींचतान को एक नया मोड़ दे सकती है।

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रोली सिंह

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Writer (स्थानीय खबरें)

रोली सिंह पिछले 2 सालों से पत्रकारिता और न्यूज़ रिपोर्टिंग से जुड़ी हैं। वह लोकल न्यूज़ और लोगों से जुड़े मुद्दों को पढ़ने वालों तक पहुंचाने का काम...

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