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दिल्ली के सत्य निकेतन में ढही पीजी बिल्डिंग, मलबे में दबे छात्रों की तलाश जारी, 2 की मौत

दिल्ली के सत्य निकेतन में ढही पीजी बिल्डिंग, मलबे में दबे छात्रों की तलाश जारी, 2 की मौत

राजधानी दिल्ली के पॉश इलाके और छात्रों के प्रमुख ठिकाने माने जाने वाले सत्य निकेतन से एक अत्यंत दुखद और दिल दहला देने वाली खबर सामने आ रही है। दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के ठीक नजदीक स्थित एक पेइंग गेस्ट (पीजी) की पुरानी इमारत अचानक भरभराकर जमींदोज हो गई। इस भीषण हादसे में अब तक दो लोगों की दर्दनाक मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कई अन्य छात्रों के अभी भी मलबे में दबे होने की आशंका जताई जा रही है। घटना की सूचना मिलते ही प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया और तुरंत युद्धस्तर पर राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया गया।

एम्स ट्रॉमा सेंटर में चल रहा घायलों का इलाज

प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस वीभत्स दुर्घटना के बाद मलबे से निकालकर कुल सात गंभीर रूप से घायल लोगों को तुरंत एम्स ट्रॉमा सेंटर पहुंचाया गया था। डॉक्टरों के अथक प्रयासों के बावजूद दो घायलों को बचाया नहीं जा सका, जिनकी अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। अन्य घायलों की हालत भी नाजुक बनी हुई है, जिनका इलाज डॉक्टरों की विशेष देखरेख में किया जा रहा है। प्रशासनिक अधिकारियों का पूरा ध्यान इस समय मलबे में फंसे बाकी लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने पर केंद्रित है।

शीर्ष नेतृत्व ने लिया संज्ञान, अमित शाह ने की उच्चस्तरीय बात

इस बड़े हादसे ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने इस दुर्घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है और स्थिति पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए हैं। आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट के जरिए गृहमंत्री ने जानकारी दी कि उन्होंने इस संबंध में दिल्ली की मुख्यमंत्री, दिल्ली के पुलिस कमिश्नर और एनडीआरएफ (राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल) के महानिदेशक से फोन पर लंबी बातचीत की है और जमीनी हालात का जायजा लिया है।

गृहमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि स्थानीय प्रशासन और एनडीआरएफ की टीमें आपसी तालमेल के साथ तेजी से रेस्क्यू ऑपरेशन को अंजाम दे रही हैं। मलबे में फंसे हर एक शख्स को सुरक्षित बाहर निकालना इस वक्त हमारी पहली प्राथमिकता है। घायलों को तुरंत और हर संभव चिकित्सीय सहायता मुहैया कराई जा रही है। उन्होंने घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की ईश्वर से कामना की है।

मुख्यमंत्री और उपराज्यपाल ने किया घटनास्थल का दौरा

हादसे की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने खुद मोर्चा संभाला और तुरंत दुर्घटना स्थल का दौरा किया। मुख्यमंत्री ने मौके पर पहुंचकर राहत कार्यों की खुद निगरानी की और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उनके साथ उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने भी सभी संबंधित प्रशासनिक एजेंसियों को आपसी समन्वय बनाकर काम करने और रेस्क्यू में किसी भी तरह की ढिलाई न बरतने के कड़े निर्देश जारी किए हैं।

युद्धस्तर पर चल रहा है रेस्क्यू ऑपरेशन

घटनास्थल पर इस समय भारी पुलिस बल के साथ-साथ कई अन्य बचाव एजेंसियां तैनात हैं। मुख्यमंत्री ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि राहत कार्यों में कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही है। इस अभियान में निम्नलिखित प्रमुख एजेंसियां पूरी ताकत से जुटी हुई हैं:

  • राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF): मलबे को हटाने और दबे हुए लोगों को सुरक्षित तलाशने के लिए आधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल कर रही है।
  • जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA): पूरे ऑपरेशन की मॉनिटरिंग और प्रशासनिक समन्वय का काम देख रहा है।
  • दिल्ली फायर सर्विस: किसी भी आकस्मिक स्थिति से निपटने और आग या अन्य खतरों को रोकने के लिए मुस्तैद है।
  • दिल्ली पुलिस और एमसीडी: सुरक्षा व्यवस्था संभालने और मलबे को तेजी से हटाने के लिए भारी मशीनरी का संचालन कर रही है।
  • सिविल डिफेंस: राहत कार्यों में वालंटियर्स के रूप में पूरी मदद कर रहा है।

एहतियात के तौर पर खाली कराई गई आसपास की इमारतें

हादसे की भयावहता को देखते हुए प्रशासन ने किसी भी संभावित बड़े खतरे को टालने के लिए तुरंत कड़े कदम उठाए हैं। एहतियात के तौर पर गिरी हुई इमारत के ठीक बगल वाली बिल्डिंग को भी पूरी तरह से खाली करवा लिया गया है। ऐसा इसलिए किया गया है क्योंकि लगातार हो रही सुगबुगाहट और मलबे के दबाव से आसपास की कमजोर संरचनाओं के भी गिरने का खतरा बना हुआ था।

स्थानीय लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि यह पीजी बिल्डिंग काफी पुरानी थी और इसकी स्ट्रक्चरल मजबूती पर लंबे समय से सवाल उठ रहे थे। हालांकि, प्रशासनिक जांच के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि इस इमारत के ढलने के पीछे मुख्य तकनीकी कारण क्या थे—क्या यह अवैध निर्माण का नतीजा था या फिर रखरखाव की भारी कमी।

प्रभावित परिवारों को हरसंभव मदद का भरोसा

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने स्पष्ट किया है कि सरकार इस मुश्किल समय में प्रभावित परिवारों के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है। हादसे में जिन परिवारों ने अपनों को खोया है या जिनके बच्चे घायल हुए हैं, उन्हें हरसंभव वित्तीय और मानसिक सहायता पहुंचाई जाएगी। सरकार हालात पर लगातार करीब से नजर बनाए हुए है और जब तक रेस्क्यू ऑपरेशन पूरी तरह समाप्त नहीं हो जाता, तब तक प्रशासनिक अमला मौके पर ही मुस्तैद रहेगा।

यह हादसा एक बार फिर राजधानी दिल्ली में अनियोजित निर्माण, पुरानी इमारतों के रख-रखाव और सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर गंभीर सवाल खड़े करता है। फिलहाल पूरे देश की निगाहें सत्य निकेतन के इस राहत शिविर और एम्स अस्पताल पर टिकी हैं, जहां हर कोई मलबे में फंसे अन्य छात्रों के सुरक्षित बाहर निकलने की प्रार्थना कर रहा है।

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रोशनी गुप्ता

रोशनी गुप्ता

Writer (स्थानीय खबरें)

रोशनी गुप्ता जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती हैं।...

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