सनातन आस्था के प्रमुख केंद्रों में शुमार बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन से एक बेहद खास और ऐतिहासिक खबर सामने आ रही है। भगवान महाकालेश्वर की भव्य और अलौकिक राजसी सवारी इस बार केवल सड़कों पर ही नहीं, बल्कि रेडियो के तरंगों के जरिए देश और दुनिया के कोने-कोने तक गूंजेगी। प्रसारण की दुनिया में एक नया मील का पत्थर स्थापित करते हुए उज्जैन आकाशवाणी ने एक ऐसा कारनामा करने की ठान ली है, जो अपने आप में अनूठा है। सोमवार, 07 सितंबर 2026 को दोपहर 2 बजे से रात 10 बजे तक, पूरे 8 घंटे लगातार बाबा महाकाल की इस महा-सवारी का सजीव प्रसारण किया जाएगा।
रेडियो इतिहास का सबसे लंबा गैर-खेल सजीव प्रसारण
ब्रॉडकास्टिंग या कहें कि रेडियो के इतिहास में यह अपनी तरह का एक अनूठा और अब तक का सबसे लंबा गैर-खेल गतिविधियों से जुड़ा नॉन-स्टॉप लाइव प्रसारण होने जा रहा है। आकाशवाणी उज्जैन के कार्यक्रम अधिकारी ब्रह्मप्रकाश चतुर्वेदी ने इस संबंध में विस्तृत जानकारी साझा करते हुए बताया कि मध्य प्रदेश के सभी आकाशवाणी केंद्रों से इस कार्यक्रम को एक साथ प्रसारित किया जाएगा। इस आठ घंटे के लंबे सफर में रेडियो के माध्यम से बाबा महाकाल की राजसी सवारी के संपूर्ण मार्ग, एक-एक पड़ाव, प्राचीन धार्मिक अनुष्ठानों, परंपराओं और वहां मौजूद लाखों श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का आंखों देखा हाल जीवंत किया जाएगा।
इस अद्भुत और विशाल कवरेज के महत्व को समझते हुए इसे प्रतिष्ठित 'वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स' और 'लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स' में दर्ज कराने के लिए भी आधिकारिक रूप से नामांकित किया गया है। आकाशवाणी के अनुभवी उद्घोषकों और विशेष कमेंटेटरों की एक दक्ष टीम इस पूरी सवारी के दौरान पल-पल की गतिविधि का ऐसा सजीव और भावपूर्ण वर्णन करेगी कि सुनने वाले श्रोता खुद को मंदिर परिसर या सवारी मार्ग पर ही महसूस करेंगे।
विश्वभर के श्रद्धालुओं के लिए डिजिटल और रेडियो माध्यम
जो श्रद्धालु किन्हीं कारणों से भौतिक रूप से उज्जैन पहुंचकर इस ऐतिहासिक राजसी सवारी का हिस्सा नहीं बन पा रहे हैं, उनके लिए यह प्रसारण किसी वरदान से कम नहीं है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य उज्जैन की इस समृद्ध आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और पौराणिक विरासत को ग्लोबली लाखों-करोड़ों श्रोताओं तक पहुंचाना है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की परिकल्पना के अनुरूप महाकाल की सवारियों में समय-समय पर किए जा रहे अनूठे नवाचारों और आने वाले सिंहस्थ की भव्य झलक भी इस पूरे आयोजन के दौरान सुनने और महसूस करने को मिलेगी।
कहाँ और कैसे सुनें लाइव प्रसारण?
यदि आप भी घर बैठे बाबा महाकाल की इस दिव्य राजसी सवारी के गवाह बनना चाहते हैं, तो आपके लिए कई आसान विकल्प उपलब्ध कराए गए हैं:
- पारंपरिक रेडियो पर एफएम 102.5 मेगाहर्ट्ज फ्रीक्वेंसी ट्यून करें।
- स्मार्टफोन पर 'न्यूज आन एयर' (News On Air) मोबाइल ऐप डाउनलोड करके लाइव सुनें।
- इसके अलावा, मोबाइल के गूगल ब्राउज़र पर सीधा 'आकाशवाणी उज्जैन लाइव' सर्च करके भी इस धार्मिक अनुष्ठान से जुड़ सकते हैं।
सोमवार को निकलेगी अंतिम शाही सवारी, सात स्वरूपों में दर्शन देंगे बाबा
श्रावण और भादों मास के पवित्र संयोजन में हर सोमवार निकलने वाली सवारियों के क्रम में, इस बार भादों मास की अंतिम शाही सवारी सोमवार, 07 सितंबर को धूमधाम से निकाली जाएगी। अवंतिकानाथ भगवान महाकाल अपनी प्रिय प्रजा का हाल जानने के लिए नगर भ्रमण पर निकलेंगे। इस भव्य सवारी की सबसे बड़ी विशेषता यह होगी कि बाबा महाकाल एक साथ सात अलग-अलग स्वरूपों में अपने भक्तों को दर्शन देंगे।
शाही सवारी में इन सात स्वरूपों के होंगे दर्शन
मंदिर प्रबंधन समिति से प्राप्त आधिकारिक विवरण के अनुसार, इस राजसी और भव्य सवारी का क्रम कुछ इस प्रकार रहेगा:
- प्रथम स्वरूप: रजत पालकी में विराजे श्री चन्द्रमौलेश्वर
- द्वितीय स्वरूप: विशाल हाथी पर सवार श्री मनमहेश
- तृतीय स्वरूप: गरुड़ रथ पर सवार भगवान शिवतांडव
- चतुर्थ स्वरूप: नंदी रथ पर सवार उमा-महेश
- पंचम स्वरूप: डोल रथ पर होल्कर स्टेट का मुखारविंद
- षष्ठम स्वरूप: अद्भुत और अलौकिक श्री घटाटोप मुखौटा
- सप्तम स्वरूप: श्री सप्तधान का विशेष मुखारविंद
शाही सवारी का पारंपरिक मार्ग और पूजन विधि
सोमवार को निर्धारित समय यानी शाम ठीक 4 बजे महाकालेश्वर मंदिर के सभामंडप में विधिवत पूजन-अर्चन के साथ इस भव्य यात्रा का शुभारंभ होगा। मुख्य मंदिर के सभामंडप में भगवान श्री चन्द्रमौलेश्वर की वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजा की जाएगी। इसके बाद भगवान रजत पालकी में सवार होकर नगर भ्रमण के लिए आगे बढ़ेंगे। मंदिर के मुख्य द्वार पर पहुंचते ही पालकी में विराजित भगवान श्री चन्द्रमौलेश्वर को सशस्त्र सलामी दी जाएगी, जो इस सवारी का एक बेहद रोमांचक और गौरवशाली पल होता है।
यहाँ से सवारी अपने तय रूट यानी महाकाल घाटी, गुदरी चौराहा, पानदरीबा, कहारवाड़ी और रामानुजकोट से होती हुई पवित्र रामघाट पहुँचेगी। रामघाट पर पहुँचने के बाद पालकी में विराजित भगवान चंद्रमौलेश्वर और गजराज पर आरूढ़ श्री मनमहेश का माँ शिप्रा के पवित्र जल से जलाभिषेक और पूजन-अर्चन किया जाएगा। संध्या आरती के पश्चात यह सवारी पुनः गणगौर दरवाजा, कार्तिक चौक, ढाबा रोड, कमरी मार्ग, टंकी चौक, तेलीवाड़ा, कंठाल, सतीगेट, खड़े हनुमान मंदिर से होते हुए गोपाल मंदिर पहुँचेगी।
गोपाल मंदिर में रियासतकालीन परंपरा के अनुसार सिंधिया स्टेट की ओर से भगवान का विशेष पूजन किया जाएगा। इसके बाद सवारी पटनी बाजार, गुदरी चौराहा और महाकाल घाटी के रास्ते से होते हुए वापस अपने मूल स्थान यानी महाकालेश्वर मंदिर में विश्राम के लिए पहुँचेगी। उज्जैन प्रशासन और मंदिर समिति ने इस ऐतिहासिक आयोजन को लेकर सुरक्षा, साफ-सफाई और यातायात के चाक-चौबंद इंतजाम किए हैं, ताकि देश-विदेश से आने वाले लाखों शिवभक्तों को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।